भारतीय रेलवे को लेकर कई सारी शिकायतें रहती हैं। चाहे ट्रेन का लेट चलना हो या फिर अधिकारियों की लापरवाही हो जिससे आए दिन रेलवे हादसे होते रहते हैं। हाल फिलहाल CAG (Comptroller and Auditor General of India) की एक रिपोर्ट आई थी। जिसमें यह कहा गया था कि बीते 10 सालों में भारतीय रेलवे अपने सबसे बदतर दौर से गुजर रही है। रेलवे की कमाई भी रसातल में पहुंच गई है। कमाई को आसान भाषा में समझने की कोशिश करें तो, रेलवे 98.44 रुपये लगाकर 100 रुपये की कमाई कर रही है। यानि, कुल 1 रुपये 56 पैसे का मुनाफ़ा। मतलब कमाई के नाम पर रेलवे ठेंगा दिखा रही है। लेकिन, दूसरी तरफ एक नया बवाल यह भी है कि भारतीय रेलवे एक चूहे को मारने के लिए 2,800 रुपये खर्च कर रही है।

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स: गूगल

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आपने अगर ट्रेन की विंडो सीट पर बैठ कर सफर करने का आनंद लिया होगा तो आपने भी रेलवे ट्रैक के आस-पास चूहों को कबड्डी खेलते हुए देखा होगा। चूहों का साईज भी ऐसा होता है कि आदमी एक बार देख कर जरुर डर जाएगा। रेलवे इन चूहों से निपटने के लिए तरह-तरह के उपाय लाती है। पैसे भी खर्च करती है। लेकिन, कितने पैसे खर्च करती है इस पर किसी का ध्यान नहीं गया होगा, आज तक नहीं। एक RTI में इसी बात का खुलासा हुआ है।

रेलवे के अधिकारियों ने RTI का जवाब देते हुए कहा कि रेलवे और उसके कोचिंग सेंटर्स भी चूहों की बढ़ती संख्या से परेशान हैं। लेकिन, उनसे निपटने का भी काम चल रहा है। 17 जुलाई को आरटीआई में जो जानकारी मिली है वो बेहद ही चौंकाने वाली है। चेन्नई डिवीजन के अनुसार उन्होंने मई 2016 से अप्रैल 2019 तक 5.89 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यानि, लगभग तीन साल के बीच 5 करोड़ 90 लाख रुपये खर्च कर दिए गए हैं। अगर इसको कैलकुलेट करके समझें तो, दिमाग चकरा जाएगा। तीन साल का मतलब 1095 दिन, 5 करोड़ 90 लाख रुपये के हिसाब से एक दिन में लगभग 54 हज़ार (53,881 रुपये) खर्च किए जा रहे हैं। मतलब एक दिन में चूहा मारने पर लगभग 54 हज़ार का खर्च और रेलवे कहती है कि वह घाटे में चल रही है।

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स: गूगल

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पश्चिमी रेलवे का भी यही हाल है। पश्चिम रेलवे ने बीते तीन सालों में चूहों का खात्मा करने यानि रोडेंट कंट्रोल के लिए 1.52 करोड़ रुपये से ज़्यादा खर्च किए हैं। इतने पैसे खर्च करने का रिजल्ट ये निकला कि 5,457 चूहे मारे गए। पढ़कर लगेगा- वाह कमाल कर दिया, पांच हज़ार से ज्यादा चूहे मार दिए। लेकिन, सच तो ये है कि एक चूहा मारने के पीछे 2,800 रुपये लुटा दिए गए पश्चिमी रेलवे द्वारा।

जब आरटीआई से इस बारे में खुलासा हुआ तो उसके बाद रेलवे के एक अधिकारी ने इस पर सफाई देते हुए बताया,

रेलवे को नुकसान होने से बचाने के लिए रोडेंट कंट्रोल किया जा रहा है. यदि रोडेंट कंट्रोल नहीं होगा, तो चूहे यात्रियों का सामान भी बर्बाद कर देंगे। रेलवे स्टेशन पर कई बारीक तारें लगी होती हैं। इनमें से एक भी कट जाए तो सिग्नल ठप हो सकता है और रेल व्यवस्था रुक सकती है।

इसी दौरान यह भी खबर आई थी कि सिर्फ नागपुर रेलवे स्टेशन पर पिछले दो सालों में चूहों से निपटने के लिए 10.56 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इस बात की जानकारी भी RTI से मिली थी। मतलब रेलवे तो मुनाफा कमा रही है लेकिन, उसका यह मुनाफा चूहों को मारने में खर्च हो जा रहा है। सुन कर कितना अजीब लगता है कि रेलवे की अर्थव्यवस्था में चूहा रुकावट बना हुआ है। धन्य हो रेलवे और माननीय पीयूष गोयल साहब, अगर ट्विटर की दुनिया से बाहर निकलेंगे तो, शायद चूहों से निपटने के लिए कुछ सस्ता और टिकाऊ उपाय मिल जाए।

इस ख़बर की सत्यता जांची गई जिसमें यह ख़बर गलत पाई गई है।

जांच में पाई गई पूरी रिपोर्ट यहां पढ़े।