मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पिछले साल जून में कश्मीर के पुलवामा में आतंकवादियों द्वाNरा राइफलमैन औरंगज़ेब के अपहरण और हत्या की घटनाओं के संबंध में सेना अपने ही तीन जवानों को हिरासत में लेकर पूछ-ताछ कर रही है. तीनों जवान 44 राष्ट्रीय राइफल्स के हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि 44 राष्ट्रीय राइफल्स के तीन सैनिकों को हिरासत में लिया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है.

औरंगज़ेब फोटो सोर्स- गूगल

सूत्रों ने खुलासा किया कि सेना को संदेह है कि राष्ट्रीय राइफल्स के सैनिकों ने राइफलमैन औरंगज़ेब के बारे में जानकारी आतंकवादियों से साझा की थी. कहा जा रहा कि इन तीन जवानों के अलावा और लोग भी हो सकते हैं जिन्होंने इस काम में उनकी मदद की है.

फिलहाल इस मामले में पूछताछ जारी है जिसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है. जून 2018 में ईद मनाने के लिए घर लौटते समय राइफलमैन औरंगज़ेब को आतंकवादियों ने अगवा कर लिया था और उसकी हत्या कर दी गई थी. औरंगज़ेब को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है.

औरंगज़ेब जम्मू और कश्मीर के 4 लाइट इन्फैंट्री का था और शोपियां के शादिमर्ग में 44 राष्ट्रीय राइफल्स शिविर में तैनात था. पुलवामा में उसका शव अपहरण के कुछ घंटों बाद मिला. जिसके कारण कश्मीर में बड़े पैमाने पर लोगों ने रोष ज़ाहिर किया. रक्षा प्रवक्ता कर्नल राजेश कालिया ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि सेना निश्चित रूप से उन परिस्थितियों की जांच कर रही है जिसके कारण औरंगजेब का अपहरण और हत्या हुई थी. जिन सैनिकों से पूछताछ की जा रही है उनके नाम आबिद वानी, ताजमुल अहमद और आदिल वानी है. इनके परिवार वालों से भी पूछताछ की जा रही है.

औरंज़ेब फोटो साभार गूगल

रिपोर्ट में यह बात भी कही गयी है कि आबिद वानी के भाई तौसेफ अहमद पर 4 फरवरी सोमवार को राष्ट्रीय राइफल्स कर्मियों द्वारा हमला किया गया था. परिवार के अनुसार उन्हें कैंप में बुलाया गया था जहाँ उनकी पिटाई की गई. वह अभी श्रीनगर के एक अस्पताल में भर्ती हैं जहां उनका इलाज़ चल रहा है. औरंगज़ेब सेना के अधिकारी मेज़र शुक्ला के निज़ी गार्ड थे जिन्होंने अप्रैल 2018 में आतंकवादी समीर टाइगर को मार गिराया था. उस मुठभेड़ में मेज़र शुक्ला घायल हो गए थे.

मंगलवार को जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सेना पर पुलवामा निवासी तौसीफ वानी जो कि सेना के सिपाही आबिद वानी के भाई हैं उन पर टॉर्चर करने का आरोप लगाया है. मारे गए राइफलमैन औरंगज़ेब, पिछले साल जून में परिवार के साथ पुंछ में घर पर ईद मनाने जा रहे थे. वह बस पकड़ने के लिए एक कार से पुलवामा बस स्टैंड की ओर जा रहे थे. तभी आतंकवादियों ने कार को कुछ किमी पहले रोक लिया. आतंकवादियों ने औरंगज़ेब का अपहरण कर उनकी हत्या कर दी. राइफलमैन का शव पुलवामा जिले के कलम्पोरा में अपहरण के स्थल से लगभग 10 किमी दूर बरामद किया गया था.

कार के चालक की पहचान एक स्थानीय सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में फार्मासिस्ट फारूक अहमद अल्लई के रूप में हुई थी. अल्लई ने कहा कि उन्हें आतंकवादियों ने पीटा उसके बाद औरंगजेब को कार से बाहर खींचकर ले गए. अल्लई ने बाद में पुलवामा के राजपोरा पुलिस स्टेशन को घटना की विस्तार से जानकारी दी थी.

औरंज़ेब फोटो साभार गूगल

जानकारी पास करने के लिए आबिद के भाई तौसीफ का फोन का इस्तेमाल किया जा रहा था. इस बात की जानकारी इस केस से जुड़े अफसर ने दी है.

“कॉल रिकॉर्ड डेटा आबिद और तौसीफ की भागीदारी को दिखा रहा है. शौकत डार जो की एक आतंकवादी है उसको जानकारी दी गयी थी जब औरंगज़ेब कैंप छोड़ कर घर के लिए रवाना हुआ था.”

अन्य अधिकारियों का कहना है कि – तौसीफ अब श्रीनगर के एक अस्पताल में भर्ती है, उसे मंगलवार को कैंप में बुलाया गया था. तौसीफ ने ही कार की व्यवस्था कराई थी. जिसमें औरंगजेब 14 जून को घर के लिए निकला था. हालांकि, तौसीफ ने इन दावों से इंकार किया है.

उन्होंने कहा –

“ये सभी झूठे आरोप हैं … न तो मैंने और न ही मेरे भाई ने कुछ किया है.”

अगर यह आरोप सिद्ध होते हैं तब यह देखना होगा कि इन पर क्या कार्रवाई होती है. अगर कश्मीर की बात की जाए तो, यहाँ तो अगर किसी इंसान पर आर्मी वाले को शक भी होता है तो उन्हें गोली मारने की छूट है. अब देखना होगा कि इन देशद्रोहियों के साथ क्या होता है. अगर फौज में ही ऐसे लोग मौजूद रहेंगे तो भला हम सीमा पर तैनात जवानो पर कैसे भरोसा कर पाएंगे?

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