हार को मौका दिए बिना अपनी कोशिशें जारी रखनी चाहिए. बस मेहनत ही हमारी जरूरतों को पूरा करती है. ये कहना है देश की पहली दिव्यांग महिला IAS अधिकारी प्रांजल पाटिल का.

देश की पहली नेत्रहीन महिला आईएएस अफसर बनकर, प्रांजल पाटिल लोगों के लिए मिसाल बन गयी हैं. मुंबई से लगे उल्हासनगर की रहने वाली प्रांजल पाटिल केरल कैडर में नियुक्‍त होने वाली पहली दृष्टि बाधित आईएएस अफसर बन गयी हैं. सोमवार को प्रांजल पाटिल ने केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में सब कलेक्‍टर के तौर पर पदभार संभाल लिया है. जिसमें प्रांजल के पदभार ग्रहण कार्यक्रम में सामाजिक विधि विभाग के सचिव बीजू प्रभाकर ने हिस्सा लिया.

इससे पहले 2016 में पहली बार UPSC की परीक्षा देने वाली प्रांजल पाटिल ने 773वां स्थान हासिल करते हुए सबको चौंका दिया था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय रेलवे लेखा सेवा (IRAS) में प्रांजल को नौकरी आवंटित की गई थी लेकिन, ट्रेनिंग के दौरान रेलवे मंत्रालय ने 100 प्रतिशत नेत्रहीनता के आधार पर प्रांजल पाटिल को नौकरी देने से इनकार कर दिया था.

फोटो सोर्स - गूगल
फोटो सोर्स – गूगल

इतना सब कुछ होने के बावजूद भी हार न मानते हुए प्रांजल पाटिल ने 2017 में एक बार फिर UPSC की परीक्षा दी. जिसमें 124वीं रैंक हासिल करते हुए प्रांजल IAS के लिए सिलेक्ट की गईं. IAS की ट्रेनिंग के बाद प्रांजल ने 2017 में केरल के एरनाकुलम जगह से उप कलेक्‍टर के रूप में अपने प्रशासनिक करियर की शुरुआत की थी.

पहले ही प्रयास में यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में कामयाबी पाने वाली प्रांजल पाटिल, फोटो सोर्स - गूगल
पहले ही प्रयास में यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में कामयाबी पाने वाली प्रांजल पाटिल, फोटो सोर्स – गूगल

प्रांजल ने बताया 2016 में रेलवे की नौकरी छीने जाने की वजह से उन्हें बहुत दुःख हुआ था. यही नहीं, आंखों का ऑपरेशन फेल होने से भी उन्हें काफी तकलीफें उठानी पड़ी थी.

जन्म से ही प्रांजल पाटिल की आंखे कमजोर थीं. छठवीं क्‍लास में एक स्‍टूडेंट ने प्रांजल की आंख में पेंसिल मार दी थी. उस हादसे के बाद उनकी एक आंख की रोशनी चली गई. अगले एक साल में प्रांजल की दूसरी आंख की रोशनी भी चली गई. आखों की रोशनी पूरी तरह से खोने के बाद भी प्रांजल ने हिम्‍मत नहीं हारी और जीवन में कुछ कर गुजरने की चाहत लिए आगे बढ़ती रहीं.

मुंबई के दादर स्थित श्रीमति कमला मेहता स्कूल से प्रांजल ने अपनी शुरुआती पढ़ाई की. यह स्कूल प्रांजल जैसे दृष्टिहीन बच्चों के लिए था, जहां पढ़ाई ब्रेल लिपि से होती थी. यहाँ से 10वीं तक की पढ़ाई करने के बाद प्रांजल ने चंदाबाई कॉलेज से आर्ट्स में 12वीं की. 12वीं में 85% नंबर लाकर प्रांजल ने अपनी प्रतिभा का लोहा स्कूल के दिनों में ही मनवा दिया था. इसके बाद प्रांजल ने ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज का रुख किया. जहां से उन्होंने बीए की डिग्री हासिल की. जिसके बाद प्रांजल दिल्ली पहुंचीं और जेएनयू से एमए किया.

स्थानीय मीडिया से बात करते हुए प्रांजल ने कहा

मैं पूरी ईमानदारी से अपना काम करूंगी. इंसान को कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए. आप जो सोचें वो पूरा हो सकता है. बस लगन होनी चाहिए. प्रांजल ने अपनी कामयाबी का श्रेय माता-पिता के अलावा अपने पति को भी दिया.

 भारत की पहली दृष्टिहीन महिला आईएएस अधिकारी हैं पाटिल , फोटो सोर्स - गूगल
भारत की पहली दृष्टिहीन महिला आईएएस अधिकारी हैं पाटिल , फोटो सोर्स – गूगल

बचपन से पूरी तरह से दृष्टिविहीन होने के बावजूद भी प्रांजल ने जो कर दिखाया है वो अनगिनत लोगों के लिए एक मिसाल है.