सोशल मीडिया पर इन दिनों एक तस्वीर को खूब वायरल किया जा रहा है। इस तस्वीर में दिखाया जा रहा है कि राहुल गांधी और उनका पूरा परिवार इंदिरा गांधी के अंतिम संस्कार पर कलमा पढ़ रहा है। आपके पास भी इस तरह के संदेश आए होंगे या फेसबुक चलाते हुए आपने भी ये तस्वीर देखी होगी जिसमे एक शव रखा है और उसके आस-पास पूरा गांधी परिवार है जो कि कलमा पढ़ने की मुद्रा में हैं। इस तस्वीर को खूब वायरल किया जा रहा है जिसमें लिखा है कि राजीव और राहुल गांधी इंदिरा की लाश के आगे कलमा पढ़ रहे हैं। तो क्या वाक़ई ये तस्वीर इंदिरा के अंतिम संस्कार की है? अगर ऐसा नहीं है तो तस्वीर का सच क्या है? हम आज इसी वायरल न्यूज़ के असली-नकली होने की पड़ताल कर रहे हैं.

वायरल फोटो

अक्सर राहुल गांधी और गांधी परिवार के हिन्दू होने पर सवाल खड़े किए जाते हैं और चुनावों के दौरान तो ऐसी पोस्टों को खूब शेयर किया जाता है। आजकल जो तस्वीर वायरल की जा रही है उसमे राजीव गांधी और राहुल गांधी किसी अंतिम यात्रा में कलमा पढ़ रहे हैं। लोगों का कहना है कि इस फोटो में राहुल कलमा पढ़ रहे हैं और फिर भी खुद को ब्राह्मण कहते हैं।

जब हमने इस फोटो की पड़ताल की तो सामने आया कि जो ये फोटो शेयर की जा रही है ये असल में किसी के अंतिम संस्कार की ही है मगर ये इन्दिरा गांधी के अंतिम संस्कार की नहीं है। अब सवाल ये है कि आखिर ये फोटो किसके अंतिम संस्कार की है?

ये फोटो 30 साल पुरानी है और ये जनाज़ा फ्रंटियर गांधी का है। फ्रंटियर गांधी का असली नाम है खान अब्दुल गफ्फ़ार खान। इन्हें बादशाह खान या बाचा खान कहकर भी पुकारा जाता था।

असली-नकली पड़ताल –

फ़ैक्ट 1 : इमेज को रिवर्स सर्च करने पर पता चल सकता है कि इस तस्वीर को सबसे पहले पाकिस्तानी लेखक व नेता मोहसिन दावर ने ट्वीट किया था।

फ़ैक्ट 2 : इंदिरा गांधी की मृत्यु के वक्त राहुल गांधी की उम्र 14 साल थी और जब अब्दुल गफ्फार खान मरे उस वक्त राहुल गांधी 18 साल के थे। इंदिरा गांधी के अंतिम संस्कार के दौरान की कई तस्वीरें हैं, जिनमें राहुल गांधी वायरल तस्वीर के मुकाबले ज्यादा छोटे दिखते हैं।

फोटो सोर्स – गूगल

फैक्ट 3 : पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मृत्यु 31 अक्टूबर, 1984 को हुई और परिवार ने उनका अंतिम संस्कार में हिंदू परंपराओं के अनुसार किया। वाशिंगटन पोस्ट की 4 नवंबर, 1984 की एक रिपोर्ट में इस अंतिम संस्कार का वर्णन कुछ ऐसे किया गया है “ब्राह्मण वैदिक मंत्रों का पाठ कर रहे थे और परिवार के सदस्य धीरे-धीरे धुआं निकलती चिता पर लकड़ियां लगाने के लिए 10 फुट ऊंचे मंच पर चढ़ने लगे। हज़ारों शोकाकुल लोगों का सामूहिक विलाप गूंज उठा, जिसके बाद ऊंची उठती आग की लपटों के साथ एकाएक निःशब्दता छा गई।”

फैक्ट 4 : इंदिरा गांधी के अंतिम संस्कार की कई वीडियोज सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज़ हैं, इनमें से कुछ को यू-ट्यूब पर भी देखा जा सकता है।

वैधानिक चेतावनी: 

हिंदुस्तान में फेक न्यूज़ बनाने और फैलाने वालों का कारोबार व्यापक रूप ले चुका है। आए दिन ऐसे कई झूठ गढ़े जाते हैं। सोशल मीडिया एक ज़रिया बन चुका है फेक न्यूज़ और फर्ज़ी अफवाहों को फैलाने का। फेक न्यूज आपके दिमाग के लिए खतरनाक है और लोगों की जिंदगियों के लिए भी।

अगर आपको लगता है कि कुछ फर्जी या फेक है तो लोगों से कहिए कि वे जानकारी शेयर करने से पहले उसकी जांच कर लें। सिर्फ इसलिए शेयर ना करें क्योंकि कोई आपको शेयर करने के लिए कह रहा है। भले ही वे आपके मित्र ही क्यों ना हों। बाकी ऐसी किसी भी न्यूज़ या वायरल पोस्ट/फोटो/वीडियोज के असली-नकली की जांच करने के लिए आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर मैसेज भी भेज सकते हैं।

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