सेना से जुड़ी संवेदनशील सूचनाओं के लीक होने के मामले में भारतीय सेना ने कड़ा कदम उठाते हुए सेना के अधिकारियों और जवानों के लिए कड़ी चेतावनी जारी की है. इस चेतावनी में सभी सैन्य कमांडरों से कहा गया है कि सूचनाओं के लीक होने पर रिपोर्ट न करने वाले दोषियों को ‘कठोर दंड’ दिया जाए.

सूचनाएं लीक होने के मामलों पर रोक लगाने के लिए भारतीय सेना ने उठाया बड़ा कदम , फोटो सोर्स -

सूचनाएं लीक होने के मामलों पर रोक लगाने के लिए भारतीय सेना ने उठाया बड़ा कदम , फोटो सोर्स –

भारतीय सेना की तरफ से जारी की गयी इस एडवाइजरी में कहा गया है,
‘इन्फॉर्मेशन लीकेज से जुड़े मामलों की रिपोर्ट ना किया जाना एक गंभीर अपराध है और ऐसा करने वालों (डिफॉल्टर्स) को ‘कठोर दंड’ दिया जाएगा.

सूचनाएं लीक मामले की जांच कर रहे सैन्य कमांडर दोषी को दंड देते समय सख़्ती से काम लें, ऐसे गंभीर मामलों में नरम रुख बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स - गूगल

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स – गूगल

सेना की एडवाइजरी में कहा गया है- “सेना से जुड़ी किसी भी जानकारी का लीक होना गंभीर अपराध है. फिर चाहे ये अपराध अनजाने में हुआ हो या जानबूझ कर. अब इससे सख्ती से निपटा जाना चाहिए. कमांडरों को हर स्तर पर इस ख़तरे को रोकना चाहिए.”

आर्मी चीफ़ बिपिन रावत, फोटो सोर्स - गूगल

आर्मी चीफ़ बिपिन रावत, फोटो सोर्स – गूगल

इस एडवाइजरी में कहा गया है कि, आर्मी की सभी सूचनाओं को फुलप्रूफ तरीके से सुरक्षित बनाया जाए. किसी भी संचार माध्यम से सेना के अन्य अंगों (वायुसेना, नौसेना) से बात करते समय ट्राई-सर्विसेज़ डायलिंग स्कीम का इस्तेमाल किया जाए.

टेलीफोन प्रमाणिकता प्रोटोकॉल पर कड़े दिशा निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए. बिना किसी संदेह की स्थिति में कॉलर की पहचान साबित हो जाने के बाद ही कोई बात की जाए.

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स - गूगल

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आर्मी को अंदेशा है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसीज के निशाने पर हमारे ऐसे सैनिक या अधिकारी हो सकते हैं, जिनके पास आर्मी की मूवमेंट से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां रहती हैं. इनमें ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों का स्टाफ और यहां तक कि पूर्व सैनिक भी हो सकते हैं.

सेना ने ये बड़ा कदम, जाने-अनजाने में लगातार लीक हो रही सूचनाओं के जुड़े कई मामलों के सामने आने के बाद उठाया है. कुछ जवानों की लापरवाही की वजह से आर्मी से जुड़ी संवेदनशील सूचनाएं सार्वजनिक मंच (पब्लिक डोमेन) पर आने लगी हैं. पिछले कई सालों से दुश्मन देशों की महिला एजेंट लगातार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, व्हाट्सएप के जरिए भारतीय सैन्य कर्मियों को अपने मोह जाल में फंसा कर सूचनाएं हासिल करने की कोशिशों में लगी हुई हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स - गूगल

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हाल में ही राजस्थान के पोखरण से सैन्य सूचनाएं लीक होने से जुड़ा एक मामला ख़बरों में आया था. जहां तैनात सेना के 2 जवान ISI महिला एजेंट के हनी ट्रेप जाल में फंस कर भारतीय सेना से जुड़ी गुप्त सूचनाएं पाकिस्तान पहुंचा रहे थे. इस सनसनी खेज घटना के सामने आने के बाद सेना ने देर न करते हुए ऐसे मामलों पर लगाम लगाने के मकसद से ये कदम उठाया है.

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स - गूगल

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सेना सूत्रों ने बताया, ऐसे मामलों में अक्सर एक ट्रेंड देखा गया है, जहां पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों द्वारा भारतीय सैन्य कर्मियों को फंसाने के लिए विदेशी नंबरों का इस्तेमाल किया जाता हैं. कई मामलों में तो पाकिस्तानी एजेंट भारतीय सेना के संचार नेटवर्क में भी सेंध लगा चुके हैं. इस दौरान अनुमति लेने के लिए दुश्मन एजेंट्स ने सेना के अन्य अंगों की शाखाओं के सुरक्षा अधिकारी के तौर पर अपनी फ़र्जी पहचान बताई है.

बता दें कि अपनी कार्यवाही के तहत भारतीय सेना ने, 150 के करीब  फर्जी पहचान वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स की पहचान की है. जिनका प्रयोग कभी-न-कभी सैन्य कर्मियों से गोपनीय सूचनाएं हासिल करने के लिए किया गया है.

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