आईपीएस के.विजय कुमार का नाम हर किसी ने सुना होगा और अगर नहीं भी सुना है तो, अब से हर मीडिया चैनल पर सुनने को मिल ही जाएगा। जब से कश्मीर में आर्टिकल 370 हटा है तब से घाटी में नए-नए बदलाव हो रहे हैं। फिर चाहे घाटी में कर्फ़्यू का हटना हो, अजित डोभाल का दौरा हो या फिर पूर्व आईपीएस अधिकारी के.विजय कुमार का कश्मीर में नए उप-राज्यपाल बनने का प्रस्ताव। लेकिन इन सब के बीच अब कश्मीर में नए उप-राज्यपाल बनाने पर बात काफी जोर-शोर से चल रही है और इसके लिए विरप्पन को मारने वाले के.विजय कुमार का नाम पहले आ रहा है।

retired ips k vijay kumar   overseasfid twitter 9 august  2019
के.विजय कुमार की तस्वीर,फोटो सोर्स:गूगल

क्या है पूरी खबर?

आजकल जम्मू-कश्मीर में नए नियम और कानून बन रहे हैं। नए-नए बदलाव भी हो रहे हैं। जो माहौल घाटी में बना हुआ है उसके बाद सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि हालात बदलने में ज़्यादा समय नहीं लगेगा। किसी को भी डरने की ज़रूरत नहीं है और अगर कश्मीर के लोग कहीं जाना चाहते हैं तो, आराम से जा सकते हैं। ये सभी बातें हर न्यूज़ चैनल के हेडलाइन में देखी जा सकती है लेकिन, हालातों का जायज़ा लेने से ज़्यादा घाटी के लोगों के दर्द को समझने की ज़रूरत है।

इन्हीं सब मामलों के बीच एक ख़बर आई है। जहां तामिलनाडु के पूर्व आईपीएस अधिकारी के.विजय कुमार को कश्मीर का पहला उप-राज्यपाल बनाने की बात हो रही है। इससे पहले भी विजय कुमार कश्मीर में बीएसएफ़ आईजी के रूप में अपनी सेवाएँ दे चुके हैं। इस समय वह कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक के सलाहकार हैं।

विजय कुमार तमिलनाडु कैडर के 1975 बैच में आईपीएस अधिकारी रह चुके हैं। तमिलनाडु में वीरप्‍पन एक ऐसा नाम था जिससे हर कोई खौफ में जीता था। एक तरह से ये नाम वहाँ के लोगों के लिए सिरदर्द बना हुआ था। इस अपराधी को पकड़ने के लिए करोड़ों खर्च करने के बाद भी सरकार उसका कुछ बिगाड़ नहीं पा रही थी। विरप्पन के हाथ कई अधिकारियों के खून से रंगे हुए थे। यही सब कारण थे जिसकी वजह से वीरप्‍पन के नाम का खौफ पूरे इलाके में था। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखकर आईपीएस अधिकारी विजय कुमार ने विरप्पन को पकड़ने का जिम्मा अपने सर लिया था और उसे बख़ूबी अंजाम भी दिया।

IPS Vijay kumar
विजय कुमार और विरप्पन की तस्वीर,फोटो सोर्स:गूगल

विजय कुमार 1975 में आईपीएस अधिकारी थे

विजय कुमार तमिलनाडु कैडर में साल 1975 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं। 1998-2001 के बीच वो कश्मीर वैली में बीएसएफ के इंस्पेक्टर जनरल भी थे। उस समय बीएसएफ़ ने आतंकवादियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। विजय कुमार उस समय सबसे ज्यादा चर्चा में रहे, जब वह ‘स्पेशल टास्क फोर्स’ यानी एसटीएफ में तैनात थे। इसके बाद साल 2004 में चंदन तस्कर वीरप्पन को मारने वालों में के.विजय कुमार का नाम भी शुमार था। फिर 2010 में जब नक्सलियों ने दंतेवाड़ा में सीआरपीएफ के 75 जवानों की हत्या कर दी थी तब, नक्सलियों पर धावा बोलने के लिए के.विजय कुमार को सीआरपीएफ का डायरेक्टर जनरल बनाया गया था।

के.विजय कुमार ने किताब भी लिखी

विजय कुमार ने अपनी लिखी किताब ‘वीरप्पन:चेजिंग द ब्रिगैंड’ में विरप्पन के आतंक से लेकर अपने हर टास्क के बारे में बताया है। इस किताब में उन्होंने वीरप्पन के बारे में बताया हैं। अपने ऑपरेशन कोकून से जुड़े कई खुलासों को उन्होंने इस किताब में लिखा। तमिलनाडु के एसटीएफ की टीम को संभालने वाले के.विजय कुमार ने वीरप्पन द्वारा की गयी हत्याओं और अपहरण जैसी घटनाओं के बारे में भी बताया था। इस किताब में कन्नड़ के अभिनेता राजकुमार को 108 दिन तक अगवा किए जाने की घटना भी शामिल है।

Image result for chasing the brigand by k.vijay kumar
फोटो सोर्स:गूगल

इस तरह से अगर के. विजय कुमार कश्मीर के पहले उप-राज्यपाल बनते हैं तो यह घाटी में रहने वालों के लिए बड़ी बात है। ऐसा इसलिए क्योंकि जिस तरह का माहौल इस वक्त घाटी में हैं उससे देखते हुए के विजय कुमार का उप-राज्यपाल के रुप में चुना जाना सराहनिय कदम है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here