भारतीय रेलवे दुनिया की चौथी सबसे बड़ी रेल नेटर्वक है. जाहिर है इसकी जिम्मेदारियां भी बड़ी ही होगीं. लेकिन इन सबसे ज्यादा जरूरी हो जाता है यात्रियों के सुख-सुविधाओं का ख्याल रखना जैसै कि यात्रियों की पसंद के खाने को उपलब्ध कराना और भारतीय रेलवे की कुछ ट्रेनों को छोड़ दें तो, बाकी सारी ट्रेनों में खाने की शिकायत हमेशा से रही है. उसकी गुणवत्ता को लेकर हमेशा से यात्री सवाल उठाते रहते हैं. ख़ासकर बिहार की ओर जाने वाली ट्रेनों में स्थिति तो और बदतर हो जाती है.

लेकिन, अब रेलवे बिहार की ओर जाने वाली ट्रेनों के खान-पान में बदलाव करने जा रही है. जिसमें बिहार से चलने वाली ट्रेनों में इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (आईआरसीटीसी) घर में बनने वाले खानों को शामिल करेगी. जैसे कि लिट्टी-चोखा, दही-चूड़ा और देहाती चिकेन. इस सुविधा का शुरू करने का कारण यही है कि यात्रियों की हमेशा शिकायत रहती है कि उन्हें ट्रेन में घर जैसा खाना नहीं मिलता है.

लिट्टी, जिसे रेलवे अपने मेन्यू में शामिल करेगी ( फोटो सोर्स गूगल)

रेलवे की इस सुविधा में क्या खास है?

इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन की ओर से बिहार से खुलने वाली लंबी दूरी की तमाम ट्रेनों में स्थानीय स्तर पर प्रचलित भोजन व नाश्ता उपलब्ध कराया जाएगा. यही नहीं, अब पेंट्री कार के वेटर भी ‘गुड मॉर्निग’ और ‘हेलो-हाय’ कहकर यात्रियों का अभिवादन करेंगे.

रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि IRCTC ने उत्तर बिहार की ओर से चलने वाली ट्रेनों में सुबह के नाश्ते में दही-चूड़ा मुहैया कराने का फैसला लिया है. जबकि मध्य बिहार और दक्षिण बिहार के क्षेत्र से गुजरने वाली ट्रेनों में लिट्टी-चोखा और मांसाहारी खानों में देहाती चिकेन भी उपलब्ध कराया जाएगा.

दही-चूड़ा, जिसे रेलवे अपने मेन्यू में शामिल करेगी ( फोटो सोर्स गूगल)

IRCTC के क्षेत्रीय प्रबंधक राजेश कुमार ने बताया कि दक्षिण भारत की ट्रेनों में इडली, डोसा और पश्चिम भारत से चलने वाली ट्रेनों में भी स्थानीय व्यंजन यात्रियों को परोसे जाते हैं. यात्रियों की हमेशा यह शिकायत रहती थी कि घर जैसे खाने (स्थानीय) ट्रेनों में उपलब्ध नहीं होते. यात्रियों की इसी शिकायत को दूर करने के लिए रेलवे ने यह योजना बनाई है.

बिहार के दरभंगा, मुजफ्फरपुर सहित उत्तर बिहार के स्टेशनों से चलने वाली ट्रेनों में यात्रियों के लिए चूड़ा-दही का विकल्प होगा. यात्री लिट्टी-चोखा और घुघनी का भी स्वाद चख सकेंगे. यात्री लिट्टी के साथ देहाती चिकेन, दालपूड़ी के साथ सब्जी, चूड़ा और मूंग घुघनी, सत्तू पराठा के साथ दही और अचार का भी मजा ले सकेंगे.

राजेश कुमार ने बताया कि बिहारी व्यंजनों की ब्रांडिंग करने के लिए ट्रेनों में यहां के मशहूर व्यंजनों को शामिल किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि IRCTC के कोलकाता स्थित क्षेत्रीय मुख्यालय ने पटना ऑफिस को जो लिस्‍ट भेजी है उसकी जिम्मेवारी होटल प्रबंधन संस्थान (IHM) को दी गई है. IHM इन व्यंजनों को खास तरीके से यात्रियों को परोसने के लिए स्‍टडी कर रहा है.

देहाती चिकेन, जिसे रेलवे अपने मेन्यू में शामिल करेगी ( फोटो सोर्स गूगल)

IRCTC के क्षेत्रीय प्रबंधक राजेश कहते हैं कि ट्रेनों में यात्रियों को बेहतर खान-पान की सुविधा मिले, इसका खास ध्यान रखा जा रहा है. अब पेंट्री-कारों के वेंडरों और वेटरों को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि पेंट्री-कार के वेंडरों और वेटरों के अपने कार्यों में प्रशिक्षित नहीं होने के कारण अक्सर यात्रियों के साथ झगड़ा होने की शिकायत मिलती रहती है. यात्रियों की इन शिकायतों को दूर करने के लिए अब वेंडरों और वेटरों को प्रशिक्षित किया जाएगा. इन वेंडरों को प्रशिक्षित करने के लिए बिहार के दानापुर में स्थित एक संस्था को इसकी जिम्मेदारी दी गयी है.

रेलवे के इस कदम से यात्रियों को काफी सहुलियत होगी. लेकिन, महज मेन्यू भर बनाने से यह जरूरी नहीं है कि यात्रियों को जो भोजन मिलेगा वो स्वादिष्ट ही होगा क्योंकि अभी भी बिहार से चलने वाली लंबी दूरी की तमाम ट्रेनों में खाने की सुविधा तो है लेकिन, जो खाना मिलता है उसे देखकर खाने वालों की खाने की इच्छा ही मर जाती है.

मेन्यू देखकर तो लगता है कि वाह क्या खाना है! लेकिन जब खाना प्लेट में आता है तो, भोजन की क्वालिटी देखकर यात्रियों का पेट ऐसे ही भर जाता है. इसलिए रेलवे अभी जो नई योजना को लागू कर रही है, वह एक सराहनीय कदम है. लेकिन रेलवे को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि भोजन कि क्वालिटी भी मेन्यू की तरह ही दमदार हो. यह योजना कब से लागू होगी रेलवे ने तारीख को लेकर अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं किया है.

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