भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (ISRO) ने 25 नवंबर को भारत की सरहदों की निगरानी के लिए बनाए गए कार्टोसैट-3 सैटेलाइट को लॉन्च करने की घोषणा की थी. लेकिन, अब इसकी लॉन्चिंग 25 की बजाय 27 नवंबर को होगी. इसके बाद ISRO दिसंबर महीने में दो और सर्विलांस सैटेलाइट्स रीसैट-2बीआर1 और रीसैट-2बीआर2 लॉन्च करने वाला है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ऐसा पहली बार होने जा रहा है जब ISRO श्रीहरिकोटा से इस साल में हुई सभी सैटेलाइट्स की लॉन्चिंग सैन्‍य उद्देश्‍यों से कर रहा है.

सैन्‍य उद्देश्‍यों के साथ-साथ देश की सुरक्षा के लिए ISRO लगातार सैटेलाइट्स अन्तरिक्ष में भेज रहा है, फोटो सोर्स - गूगल

सैन्‍य उद्देश्‍यों के साथ-साथ देश की सुरक्षा के लिए ISRO लगातार सैटेलाइट्स अन्तरिक्ष में भेज रहा है, फोटो सोर्स – गूगल

ISRO ने बताया कि,

अब इस कार्टोसैट-3 सैटेलाइट को दूसरे लॉन्चपैड से 27 नवंबर की सुबह 9.28 बजे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से अंतरिक्ष के लिए रवाना किया जाएगा. जो अंतरिक्ष में पृथ्वी से 509 किलोमीटर दूर 97.5 डिग्री के झुकाव के साथ अपनी कक्षा में स्थापित होगा. कार्टोसैट-3 सैटेलाइट को पीएसएलवी-सी47 (PSLV-C47) रॉकेट की मदद से लॉन्च किया जाएगा. कार्टोसैट-3 के साथ ही अमेरिका के 13 अन्य नैनो सैटेलाइट्स भी प्रक्षेपित किए जाएंगे. 6 स्ट्रैपऑन्स के साथ PSLV की 21वीं उड़ान होगी. जबकि, PSLV की ये 74वीं उड़ान होगी.

PSLV C-47 जिसकी मदद से कार्टोसैट-3 को अन्तरिक्ष में छोड़ा जाएगा, फोटो सोर्स - गूगल

PSLV C-47 जिसकी मदद से कार्टोसैट-3 को अन्तरिक्ष में छोड़ा जाएगा, फोटो सोर्स – गूगल

दरअसल कार्टोसैट-3, कार्टोसैट सीरीज का नौवां सैटेलाइट होगा. इस सीरीज का पहला सैटेलाइट कार्टोसैट-1, 5 मई 2005 को पहली बार लॉन्च किया गया था. वहीं कार्टोसैट-3 पहले वाले सभी सैटेलाइट की तुलना में काफी एडवांस है. आइये अब हम आपको भारत के इस ब्रह्मास्त्र माने जाने वाले सैटेलाइट Cartosat-3 (कार्टोसैट-3) के बारे में बताते हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स - गूगल

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स – गूगल

कार्टोसैट-3 सैटेलाइट के कैमरे की ताकत का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि ये अंतरिक्ष से जमीन पर 1 फीट से भी कम (9.84 इंच) की ऊंचाई तक की तस्वीर लेने में सक्षम है. यानि, आप की कलाई पर बंधी घड़ी पर दिख रहे सही समय की भी सटीक जानकारी देगा. इसके साथ ही ये कैमरा जमीन पर 25 सेंटीमीटर की दूरी पर मौजूद दो ऑब्जेक्ट के बीच का अंतर पता कर सकता है. सैटेलाइट कैमरे की यही खूबियां इसे दुनिया में अब तक का सबसे आधुनिक सैटेलाइट बनाता है. अभी तक इतनी सटीकता वाला सैटेलाइट कैमरा किसी देश ने लॉन्च नहीं किया है. अमेरिका की निजी स्पेस कंपनी डिजिटल ग्लोब का जियोआई-1 सैटेलाइट 16.14 इंच की ऊंचाई तक की तस्वीरें ले सकता है.

कार्टोसेट-3 प्रक्षेपण की प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स - गूगल'

कार्टोसेट-3 प्रक्षेपण की प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स – गूगल’

कार्टोसैट-3 सैटेलाइट के प्रमुख कार्य

मुख्य रूप से कार्टोसैट-3 का इस्तेमाल देश की सीमाओं की निगरानी के लिए किया जाएगा. कार्टोसैट-3 पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में LoC के नजदीक स्थित आतंकी कैंपों पर पैनी नजर रखने वाली देश की सबसे ताकतवर आंख होगी. इसके अलावा विभिन्न प्रकार के मौसम में पृथ्वी की तस्वीरें लेने में सक्षम कार्टोसैट-3 प्राकृतिक आपदाओं के समय भी देश की मदद करेगा.

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स - गूगल

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स – गूगल

गौरतलब है कि, 26/11 मुंबई हमले के बाद देश की सीमाओं की निगरानी और घुसपैठ रोकने के लिए भारत ने कार्टोसैट सीरीज के सैटेलाइट्स को विकसित करना शुरू किया था. इससे पहले रीसैट-2बी सैटेलाइट 22 मई 2019 को छोड़ा गया था. बता दें कि पाकिस्तान पर हुई सर्जिकल और एयर स्ट्राइक के समय भारतीय सेना ने इन्हीं कार्टोसैट उपग्रहों की मदद से आतंकयों के ठिकानों की सही लोकेशन का पता लगाया था. इसके अलावा स्ट्राइक के दौरान इसी सैटेलाइट के जरिये लाइव तस्वीरें मंगाई गईं थीं.

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