पिछले कुछ सालों में गाय के नाम पर, धर्म के नाम पर हुई मॉब लिंचिंग ने कई लोगों की जानें ली. इस तरह की लिंचिंग के वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए. लोगों ने इन वीडियोज़ को देख कर दुख प्रकट किया तो कुछ लोगों ने पीड़ित आदमी को ही दोषी बताया. लेकिन जितनी दफा इस तरह के वीडियो देखे गए उतनी ही दफे लोगों के भीतर की संवेदनाएं कुछ मर गईं.

इन दिनों सोशल मीडिया पर ऐसा ही एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है, जिसमें गौहत्या के शक में लोगों ने एक आदमी को पीट-पीट कर मार डाला और तीन लोगों के गंभीर रूप से घायल कर दिया.

झारखंड के जूरूम गांव में बुधवार को एक बैल की मौत हो गई. मौत प्राकृतिक कारणों से हुई. बैल के मालिक अद्रानिस कुजूर ने बैल की मौत के बारे में गांव वालों को बताया.

गांव से लगभग 35 लोग खेत में पड़े बैल का मांस काटने पहुंचे थे. तभी हाथ में रॉड और सरिए लेकर लोगों की भीड़ इन गांव वालों के ऊपर टूट पड़ी. इस भीड़ का कहना था कि ये गांव वाले गाय का मांस काट रहे हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर. फोटो साभार- गूगल

ये गांव वाले आदिवासी हैं, जब भी किसी के यहां ऐसे बड़े पशु की मौत हो जाती है तो गांव वाले मांस काटने के लिए पहुंचते हैं. लेकिन दिमाग से अंधे लोगों को न तो कुछ दिखाई देता है और न ही कुछ सुनाई देता है. वो बस अपने धर्म के नाम पर लोगों की पीट कर उनकी जान लेने पर तुल जाते हैं. लेकिन खुद को धर्म का रक्षक बताने वाले लोग नहीं जानते कि किसी की जान सबसे बड़ा धर्म है. कोई भी धर्म किसी की जान लेने का अधिकार आपको नहीं देता फिर चाहे सामने वाला दोषी भी क्यों न हो और ये लोग तो फिर भी मासूम और निर्दोष थे.

इस भीड़ ने जब हमला किया तो कुछ लोग इससे बच कर भागने में कामयाब रहे लेकिन चार लोग इस भीड़ के चंगुल में फंस गए और इस भीड़ ने प्रकाश लाकड़ा को पीट-पीट कर मार डाला इसके साथ ही तीन लोगों को गंभीर रूप से घायल कर दिया.

भीड़ के इस हिंसक हमले के बाद पुलिस इन चारों पीड़ितों को पुलिस स्टेशन ले गई. जहां उन्हें खुले आसमान के नीचे बैठाया गया उन्हें अस्पताल ले जाने की जगह पुलिस ने उन्हें पुलिस स्टेशन के बाहर रखा.

घायल पीड़ितों में से एक पीड़ित ने कहा-

“हमें डुमरी पुलिस स्टेशन के बाहर रखा गया प्रकाश के शरीर में कोई हरकत नहीं हो रही थी. गांव के एक चौकीदार ने हमें देखकर पानी पिलाया, कंबल ओढ़ाया और हमारे लिए आग जला दी.”

इसके उलट पुलिस अधिकारियों का बयान जिसमें उन्होंने कहा-

“चारों पीड़ितों को पुलिस स्टेशन लाया गया था जिनमें से एक की हालत बहुत खराब हो गई थी और अस्पताल ले जाते हुए उसने दम तोड़ दिया.”

इन दोनों बयानों में अंतर साफ देखा जाता है. इस तरह की घटनाओं में पुलिस की लापरवाही का ये कोई पहला केस नहीं है इससे पहले भी मॉब लिंचिंग के मामलों में पुलिस की लापरवाही देखी जा चुकी है.

इस घटना में जो सबसे बड़ी बात है वो ये है कि मॉब लिंचिंग करने वाले लोगों ने इन पीड़ितों के खिलाफ पशु वध के मामले में एफआईआर दर्ज़ कर ली है.
जबकि बैल का मालिक कह चुका है कि बैल की मौत प्राकृतिक कारणों की वज़ह से हुई थी.
मॉब लिंचिंग के मामले में भी सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है. ये सभी लोग पास ही के जैरागी गांव के रहने वाले हैं. ये लोग छत्तीसगढ़ से वापस लौट रहे थे और इन्होंने देखा कि कुछ लोग किसी जानवर का मांस काट रहे हैं, इन्हें लगा कि ये जानवर गाय है तो इन्होंने लोगों को पीटना शुरू कर दिया.

एक और पीड़ित ने बताया-

“अचानक कुछ लोग आए और हमें पीटने लगे. हमें ये भी नहीं पता था कि हमें क्यों पीटा जा रहा है. वो लोग हमें पीट रहे थे और नारे लगा रहे थे.”

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