कहते हैं पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती है और इस बात को आज के समय में हर कोई साबित भी कर रहा है। सब अपनी ज़िंदगी के सपनों को जीना चाहते हैं और कहीं-न-कहीं उन्हें पूरा करने में सक्षम भी रहते हैं। हर किसी की ज़िंदगी में वो दिन ज़रूर आता है, जिसकी मेहनत लोग सालों से कर रहे होते हैं या आसान शब्दों में कहें तो ज़िंदगी का ब्रेक उन्हें मिल जाता है।

इसी बात से जुड़ी एक खबर दिल्ली से आई है। खबर है, दिल्ली की प्रसिद्ध युनिवर्सिटी जवाहर लाल नेहरू युनिवर्सिटी की। वहाँ काम कर रहे एक सिक्योरिटी गार्ड ने JNU का एंट्रेंस एग्जाम पास किया। सुनने में ये जितना अलग-सा लग रहा है उतना ही दिलचस्प भी है क्योंकि आज के इस दौर में युवा पीढ़ी पढ़ाई को जो अहमियत देकर बैठी है उस हिसाब से रामजल मीना (जिसने एंट्रेंस एग्ज़ाम पास किया है) के एग्जाम पास करने से कईयों को सबक मिल रहा है कि पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती है। साथ ही जिस युनिवर्सिटी को दंगों, प्रदर्शनों और देशविरोधी घटनाओं का अड्डा कह कर बदनाम किया गया है वहाँ लोग पढ़ाई करके अपनी ज़िंदगी बदलने के लिए जाते हैं।

जल मीना की तस्वीर, फोटो सोर्स: गूगल

कौन है रामजल मीना?

रामजल मीना राजस्‍थान के भजेरा गांव के रहने वाले हैं। रामजल के पिता एक मजदूर हैं इसलिए उनका आगे पढ़ने का सपना अधूरा रह गया था। उनकी पढ़ाई पूरी न होने का एक कारण यह भी था कि उनके स्कूल और घर की दूरी लगभग 28-30 किलोमीटर थी इसलिए वे पढ़ाई पूरी नहीं कर सके।

मीडिया से बात करते समय रामजल ने बताया कि,

मैं जब साल 2014 में जेएनयू आया था तो यहां पढ़ाई का माहौल देखकर बहुत प्रभावित हुआ था। तभी से मैंने यहां पढ़ने के बारे में सोचा।

आगे उन्होंने बताया कि,

इसके बाद मैंने अपने फोन में कई एजुकेशन ऐप इंस्‍टॉल भी किए। फोन पर मैं करेंट अफेयर्स पढ़ने लगा। हर रोज़ मैं करीब चार घंटे अपनी पढ़ाई पर खर्च करता था। आज मैं खुश हूं कि मेरी मेहनत रंग लाई है। लेकिन अभी मैं सिविल सर्विसेज़ की भी तैयारी कर रहा हूं। अभी ये नहीं जानता हूं कि भविष्‍य में मेरी ये तैयारी क्‍या मोड़ लेगी लेकिन, फिर भी मैं कोशिश करूंगा। जेएनयू में पढ़ाई का माहौल देखकर मैं हमेशा सोचता हूं कि मेरे बच्‍चे भी यहीं पढ़ाई करें। अभी मेरी एक बेटी नौंवी की पढ़ाई कर रही है और दूसरा बच्‍चा चौथी कक्षा में पढ़ता है। मैं चाहता हूं कि, भविष्य में दोनों इसी कैंपस से पढ़ाई करें। मेरी इस सफलता पर कॉलेज के प्रोफेसर भी मुझे बधाई दे रहे हैं। साथ में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं।

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जेएनयू में गार्ड की नौकरी करते रामजल मीना, फोटो सोर्स: गूगल

रामजल की इस सफलता के बारे में जानते हैं

भारत के प्रतिष्‍ठित संस्‍थान जवाहर लाल नेहरू युनिवर्सिटी (JNU) से पढ़ना ज्‍यादातर स्‍टूडेंट्स का सपना होता है। ऐसे बहुत से स्टूडेंट्स हैं जो चाहते हैं कि, उन्हें इस युनिवर्सिटी में कैसे भी एडमिशन मिल जाए। कई हजार बच्चों में से कुछ ही बच्चों का ये सपना पूरा हो पाता है। लेकिन इन्हीं सबके बीच में एक ऐसा इंसान आता है, जिसने ये प्रवेश परीक्षा पास की। रामजल ने स्टूडेंट न होते हुए भी इस परीक्षा को पास करके दिखाया। एक गार्ड की नौकरी करते हुए अपने सपनों को उड़ान देने जैसा जज़्बा बहुत ही कम लोग दिखा पाते हैं। ऐसा ही कुछ जेएनयू के परिसर में भी हुआ। वहाँ पर काम कर रहे सिक्‍योरिटी गार्ड के रूप में रामजल मीना ने ये एंट्रेंस एग्ज़ाम पास तो किया ही, साथ में बी.ए रूस ऑनर्स का एंट्रेंस एग्ज़ाम भी पास किया। अब से रामजल यहां स्‍टूडेंट की तरह रहकर सिर्फ पढ़ाई करेंगे।

अपनी खुशी और चिंता ज़ाहिर करते हुए रामजल ने कहा कि,

मेरी कक्षाएं जल्द ही शुरू होने वाली हैं। मेरी नौकरी का क्या होगा और मैं अपने परिवार की देख भाल कैसे करूंगा इसकी मुझे चिंता है। लेकिन मुझे उम्मीद है कि कोई-न-कोई रास्ता जरूर निकलेगा। इन दिनों मैं ‘यूपीएससी’ की तैयारी भी कर रहा हूं। अभी मुझे नहीं पता कि, भविष्य में क्या होने वाला है।

हमारे आस-पास रामजल जैसे कई लोग हैं, जो पढ़ना चाहते हैं मगर उनमें से कुछ ही लोग इस सपने को पूरा कर पाते होंगे। लेकिन यहाँ रामजल मीना के इस जज़्बे ने हर उस बंदे के लिए उम्मीद जगाई है जो किसी-न-किसी वजह से ज़िंदगी से हताश हो चुके होंगे। ये बहुत ज़रूरी है कि हम जिस भी हालात में रहें, लेकिन कभी निराश नहीं होना चाहिए, और निरंतर प्रयास में लगे रहना चाहिए पता नहीं कब ज़िंदगी की नांव किस मोड़ पर हमें हमारी मंज़िल से मिला दे। रामजल ने भी अपनी इस जीत से हम सभी तक ये संदेश पहुंचाया है।

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