JNU के छात्र सड़क पर हैं. शासक संसद में हैं. लाठी-डंडे बरस रहे हैं छात्र पिट रहे हैं. न छात्रों को संसद के अंदर आने दिया जा रहा है और न ही संसद वाले शासक बाहर आ रहे हैं. दोनों ही वजहों से हालत बद से बदतर हो गई है. पुलिस बर्बरता कर रही है. शासक का हुक्म बजा रही है. फीस बढ़ाने का मुद्दा अब राष्ट्रीय मुद्दा बन गया है. बात फंडामेंटल राइट्स तक पहुंच गई है. शिक्षा फ्री होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? इस पर भी बहस हो रही है.

पर हम मुद्दे से भटकेंगे नहीं. JNU, छात्र और पुलिस पर ही डटे रहेंगे. वैसे ही जैसे पुलिस छात्रों पर डंडे बरसाने में डटी हुई है. सोमवार को जब JNU के छात्र फीस बढ़ोत्तरी को लेकर विरोध करते हुए संसद की तरफ बढ़ रहे थे. ठीक उसी वक्त पुलिस ने अपना रौद्र रूप धारण किया और छात्रों पर डंडे बरसाने शुरू कर दिया. कई छात्र इस लाठी चार्ज में गंभीर रूप से घायल हुए. जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया.

 शशि भूषण JNU के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के स्टूडेंट यूनियन के काउंसलर हैं, फोटो सोर्स: गूगल
शशि भूषण JNU के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के स्टूडेंट यूनियन के काउंसलर हैं, फोटो सोर्स: गूगल

इस लाठी चार्ज में सबसे ज्यादा चोट शशि भूषण को लगी है. शशि भूषण JNU के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के स्टूडेंट यूनियन के काउंसलर हैं. अपने ऊपर हुए लाठी चार्ज को लेकर उनका कहना था कि

मैंने उन्हें बताया कि मैं दृष्टि बाधित हूं. मैंने उन्हें चश्मा उतार कर दिखाया ताकि पुलिसवाले ये समझ जाएं लेकिन, वे नहीं रूके. वे मुझे मारते रहे. इस हमले के बाद शशि भूषण को एम्स के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया.

JNU में फीस वृद्धि को लेकर कई पुराने छात्र भी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. उन्हीं में से एक हैं, संदीप के लुईस. संदीप ने पिछले साल JNU से पीएचडी की डिग्री हासिल की थी. उनका कहना था कि

जैसे ही बैरीकेट टूटा, उन्होंने छात्रों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया. मेरे साथ भी पुलिसवालों नें धक्का-मुक्की की. उनमें से एक ने मेरा पैर खींचा जिससे मेरा संतुलन बिगड़ा और सिर फुटपाथ से टकरा गया. मेरे सिर पर पांच टांके लगाने पड़े.

सभी छात्रों के साथ पुलिस वालों ने यही बर्ताव किया है. इतना ही नहीं छात्रों को रोकने गए अध्यापकों पर भी पुलिस ने लाठियां चलाईं. इसको लेकर JNU टीचर्स एसोसिएशन के सचिव सुरजीत मजूमदार ने कहा कि

मुझे लात मारी गई, लाठी से मारा गया और धक्का मारा गया. उन्हें अच्छी तरह पता था कि हम टीचर हैं, उन्होंने अनजाने में ऐसा नहीं किया है. उन्होंने हमसे पूछा कि तुम लोग किस तरह के टीचर हो?

फीस बढ़ोत्तरी को लेकर JNU के छात्र  प्रदर्शन करते हुए, फोटो सोर्स: गूगल
फीस बढ़ोत्तरी को लेकर JNU के छात्र प्रदर्शन करते हुए, फोटो सोर्स: गूगल
वहीं इन सब को लेकर पुलिस प्रवक्ता संदीप सिंह रंधावा ने दावा किया कि

बैरीकेट लांघने और उसे तोड़ने की कोशिश में छात्रों ने खुद को घायल कर लिया.

वहीं बढ़ी हुई फीस और छात्रों पर हुए हमले को लेकर JNU के छात्रों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की है. प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया है कि,

हम पिछले 23 दिनों से मांग कर रहे हैं लेकिन, कोई भी हमारी बात नहीं सुन रहा है. दिल्ली पुलिस के द्वारा जो लाठीचार्ज की गई, वह बर्बरता है. छात्रों ने कहा कि कई छात्र जो घायल हैं, वे इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का हिस्सा नहीं बन पाए. प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्रा ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस के पुरुष जवानों के द्वारा छात्राओं को पकड़ा जा रहा था, जो कि पूरी तरह से गलत है. वहीं दिल्ली पुलिस ने धारा 144 तोड़ने को लेकर छात्रों के खिलाफ FIR दर्ज की है.

अब भी प्रशासन या सरकार की तरफ से छात्रों को कोई आश्वासन नहीं दिया गया है. यह साफ जाहिर करता है कि सरकार को छात्रों औऱ उनके भविष्य से कोई लेना-देना नहीं है. अगर होता तो मुद्दा बवाल बनने से पहले सुलझ जाता और स्थिति इतनी खराब नहीं होती.

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