सोती हुई मीडिया अब तो जाग जाओ हमारा एक साथी अभी तक जेल में बंद है.

किसी का अगर दोहरा चरित्र है तो उसे चरित्रहीन कहने में कोई दोष है क्या?

आज की हमारी मीडिया ऐसी ही हो गयी है. हम इस मीडिया के पार्ट हो कर भी खुद को इन सभी मीडिया के गिनती से खुद को अलग ही रखते हैं.

कुछ दिनों पहले अलीगढ़ मुस्लिम युनिवेर्सिटी में एक रिपोर्टर पर हमला हुआ था. क्या आपको वह घटना याद है?

कुछ दिनों पहले मणिपुर में एक पत्रकार को गिरफ्तार कर लिया गया था. क्या आपको वह घटना याद है?

अगर आपने इस घटना के बारे में सुना भी होगा तब भी आप इस खबर को भूल गए होंगे. चलिये आपको याद दिला देते हैं और बता दें कि 100 दिन से ज़्यादा का समय हो गया है पर अभी तक वह पत्रकार जेल में ही बंद है. मणिपुर के पत्रकार किशोरचन्द्र वंगखेम को नेशनल सेक्युर्टी एक्ट के मामले में गिरफ्तार किया गया था. उसका जुर्म यह था कि उसने मणिपुर के सीएम को प्रधानमंत्री मोदी का कठपुतली कहा था. 19 नवम्बर 2018 को किशोरचन्द्र कि गिरफ्तारी हुई थी जिसके बाद से उसकी वाइफ़ और दो बच्चियों की ज़िंदगी बदल गयी है.

किशोरचन्द्र वंगखेम फोटो सोर्स गूगल

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर किशोरचन्द्र वंगखेम की पत्नी रंजिता एलंगबम को महिला संगठन ने पुरस्कृत किया. उन्हें पुरस्कार उनके साहस के लिए दिया गया है जो उन्होने सरकार के विरुद्ध खड़ा होकर दिखाया है. उनकी पत्नी ने बताया कि-

“अब मेरी और मेरे परिवार कि ज़िंदगी पूरी बदल गयी है. पहले मैं अपने काम और अपने परिवार पर ही सिर्फ ध्यान दिया करती थी पर अब सब बदल गया है. अब मुझे राजनीति के खबरों पर भी ध्यान रखना पड़ता है और इसपर भी ध्यान देना पड़ता है कि आस पास क्या चल रहा है. मैंने अपनी बड़ी बेटी को भी वादा किया है कि उसके पिता उसकी मौसी के शादी से पहले आ जाएंगे. अब सब कुछ कोर्ट पर डिपेंड करता है.”

रंजिता ठौबल डिस्ट्रिक्ट अस्पताल में थेरेपिस्ट का काम करती हैं. रंजिता बताती हैं कि उनके पति को इसलिए पुलिस गिरफ्तार करके ले गयी थी क्योंकि उन्होने फेस्बूक पर सीएम बिरेन सिंह कि आलोचना करते हुए एक विडियो प्रकाशित की थी. उन्हे 19 नवम्बर को गिरफ्तार किया गया था जिसके छह दिन के अंदर छोड़ दिया गया था. जिसके बाद उनपर NSA का चार्ज लगाकर उन्हें फिर से जेल भेज दिया गया था.

चीफ़ मिनिस्टर बिरेन सिंह ने इस मामले में कहा था-

“मैं अपने लीडर कि आलोचना को बर्दाश्त कर सकता हूँ  पर उनके अपमान को नहीं. वह हमारे नेशनल हीरो जैसे रानी लक्ष्मी बाई और नरेद्र मोदी के बारे में अभद्र बात कह रहे थे.” 

 

किशोरचन्द्र वंगखेम अपनी पत्नी और दोनों बेटियों के साथ /फोटो सोर्स गूगल

रंजिता बताती हैं कि-

“27 नवंबर को जब पुलिस मेरे पति को लेकर पुलिस स्टेशन चले गए तब उनके बाद मैं भी पुलिस स्टेशन गयी. पहली बार बस अकेले मिलने गयी थी दूसरी बार खाना और गर्म कपड़े लेकर गयी थीं. दोनों बार हमारे फोन को जब्त कर लिया गया था. हमें दो या तीन दिन बाद पता चला कि मेरे पति को NSA की धारा लगा कर गिरफ्तार किया गया है.” 

अगर आलोचना करने से ही किसी को जेल में बंद कर दिया जाता है तो फिर आज़ादी हमे किस चीज़ की मिली है ?

अंग्रेजों के समय में भी अगर हम उनके खिलाफ कुछ बोलते थे तो यही सलुक किया जाता था और अब भी यही किया जा रहा है. तो फिर हम किस आज़ादी की बात करते हैं. अब सही मायनों में कहा जा सकता है कि सत्ता का हस्तांतरण अंग्रेजों ने किया था. अंग्रेजों के समय में मीडिया अंग्रेजों के खिलाफ लिखने के लिए संघर्ष किया करती थी.

 

 

Facebook Comments

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here