RCEP, रीजनल कंप्रेहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप. इन दिनों खूब सुर्खियों में है. दरअसल यह एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट है. इस एग्रीमेंट में 10 ASEAN देश और 6 FTA पार्टनर्स हैं. जिनमें म्यांमार, लाओस, विएतनाम, थाईलैंड, कम्बोडिया, मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, ब्रूनेई और फिलीपींस ASEAN के अंदर आते हैं. वहीं चीन, भारत, जापान, साउथ कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड FTA पार्टनर्स हैं.

RCEP को लेकर सबसे पहले बात 2012 में शुरू हुई थी. तब से लेकर अब तक इसको लेकर कई समझौते हुए हैं. अगर भारत समेत तमाम देश इस पर साइन कर देते हैं तो यह दुनिया का सबसे बड़ा ट्रेड ब्लॉक बन जाएगा.

जिसके बाद इन 16 देशों के प्रोडक्ट हर देश में उपलब्ध हो जाएंगे. साथ ही निर्यात पर लगने वाला टैक्स कम या खत्म हो सकता है. अब सवाल ये उठता है भारत इसका विरोध क्यों कर रहा है?

RCEP समिट, फोटो सोर्स: गूगल
RCEP समिट, फोटो सोर्स: गूगल
इसकी सबसे बड़ी वजह है चीन. चीन और अमेरिका के बीच इस वक्त ट्रेड वॉर चल रहा है. जिस वजह से उसे बेहद नुकसान उठाना पड़ रहा है. अब जब ये RCEP साइन हो जाएगा, चीन के लिए भारतीय बाजार में प्रवेश करना और भी आसान हो जाएगा. जिसके बाद वो अमेरिका से होने वाले नुकसान की भरपाई भारतीय बाजारों में अपने माल को बेच कर करेगा.

जिसका सीधा असर भारतीय उद्योगपतियों और किसानों पर पड़ेगा. यही वजह है कि भारत सरकार इसका विरोध कर रही है. इसके अलावा किसानों ने भी देश भर में इसको लेकर विरोध किया था.

उनका कहना था कि ये संधि होती है तो देश के एक तिहाई बाजार पर न्यूजीलैंड, अमेरिका और यूरोपीय देशों का कब्जा हो जाएगा और भारत के किसानों को मिलने वाले मूल्यों में गिरावट आ जाएगी.
 भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के संयोजक वीएम सिंह, फोटो सोर्स: गूगल
भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के संयोजक वीएम सिंह, फोटो सोर्स: गूगल
इसके अलावा डेयरी उत्पादों को ले कर भी चिंता जताई गई थी. अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के संयोजक वीएम सिंह का कहना था कि,

मौजूदा समय छोटे किसानों की आय का एकमात्र साधन दूध उत्पादन ही बचा हुआ है, ऐसे में अगर सरकार ने RCEP समझौता किया तो डेयरी उद्योग पूरी तरह से तबाह हो जायेगा और 80 फीसदी किसान बेरोजगार हो जाएंगे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, फोटो सोर्स: गूगल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, फोटो सोर्स: गूगल
इन्हीं सब समस्याओं के चलते पीएम मोदी ने RCEP से बाहर रहने का फैसला किया था. उनका कहना था,

किसानों, व्यापारियों और उद्योगों का काफी कुछ दांव पर है. कर्मचारी और उपभोक्ता हमारे लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं. आज जब हम RCEP के 7 साल के वार्ता को देखते हैं, तो वैश्विक आर्थिक और व्यापारिक परिदृश्य सहित कई चीजें बदल गई हैं. हम इन परिवर्तनों को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते हैं. मौजूदा RCEP समझौता RCEP की मूल भावना के खिलाफ है.

पीएम मोदी के इस फैसले का सारे देश ने स्वागत किया है. इतना ही नहीं हमेशा पीएम मोदी के विरोध में खड़ी रही कांग्रेस भी उनके इस फैसले के साथ खड़ी नज़र आ रही है. हालांकि, चीन हर मुमकिन कोशिश कर रहा है कि पीएम मोदी अपना फैसला बदले दें. ताकि उसके हाथ से भारतीय बाज़ार न निकल जाए.

चीन विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग,फोटो सोर्स: गूगल
चीन विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग,फोटो सोर्स: गूगल
यही वजह है कि चीन के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा है कि,

हम इसमें (RCEP) जल्द भारत को शामिल करना चाहते हैं. भारत के पास 2.7 अरब लोगों का विशाल बाज़ार है. हम दोनों साथ मिल कर काम करेंगे तो ये दोनों देशों के लिए फायदेमंद होगा. भारत की चिंताओं पर सभी 15 देश विचार करेंगे और आपसी सहमति से इसे सुलझाया जाएगा.

चीन के प्रधानमंत्री ली क्यांग ने भी भारत के जल्द RCEP में शामिल होने की उम्मीद जताई है. साथ ही बाकी 15 देशों के इसमें शामिल होने को लेकर अपनी खुशी का इजहार किया है. अब देखना ये है कि, भारत चीन के इस आग्रह को किस तरह लेता है?

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