भारतीय सेना जो चौबीसों घंटे देश की सीमाओं की सुरक्षा में तत्पर खड़े रहते हैं. सियाचिन ग्लेशियर की माइनस डिग्री की जमा देने वाली ठंड हो या 50 डिग्री की तपती गर्मी वाले पाकिस्तान से सटे राजस्थान बॉर्डर, हर मोर्चे पर भारतीय सेना के जवान सुरक्षा में तैनात रहते हैं.

लेकिन देश की रक्षा करने वाले जवानों की हिफाज़त करना भी उतना ही जरूरी होता है जितना कि देश को सुरक्षित रखना. जिसके लिए जवानों को खास तरह की बुलेट प्रूफ जैकेट और हेलमेट पहनने को दिये जाते है. क्योंकि सरहदों पर तैनात जवान को दुशमन की गोली कब, कहां से निशाना बना ले किसी को पता नही रहता. इसलिए हमेशा सीमा पर तैनात सिपाहियों को हथियारों और बुलेट प्रूफ तकनीकी से लैस रखा जाता है.

आपने कश्मीर में तैनात जवानों को बुलेटप्रूफ जैकेट और हेलमेट पहने देखा होगा. लेकिन इसके अलावा आपने इन सैनिकों के हेलमेट पर एक और अजीब से निशान को नोटिस किया होगा. लेकिन जानकारी के अभाव में आपने इस निशान को नज़रअंदाज़ कर दिया होगा.

प्रतीकात्मक तस्वीर , फोटो सोर्स – गूगल

लेकिन अब हम आपकी जानकारी में इजाफा कर देते हैं. जिसके बाद आप इस इस अजीब से निशान के रहस्य को समझ पाएंगे. और आगे से कोई पूछेगा तो गर्व से बता पाएंगे.

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स – गूगल

कश्मीर में तैनात जवानों के सिर की हिफाजत के लिए एक खास तरह का हेलमेट दिया जाता है जिसे ‘पटका’ कहा जाता है. ‘पटका’ हेलमेट को विशेष तौर पर सिख सैनिकों के लिए बनाया गया था, सिख सैनिकों को उनकी पगड़ी के कारण सेना के मॉडल 1974 के तहत बने हेलमेट पहनने में दिकक्त होती है. क्योंकि पगड़ी के कारण सिख जवानों को हेलमेट पहनने पर बहुत अधिक गर्मी लगती थी. जिसको ध्यान में रखकर पटका को बनाया गया था. पर अब की जरूरतों के हिसाब से कश्मीर में तैनात सेना के जवान इस पटका हेलमेट का इस्तेमाल करते हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स – गूगल

‘पटका’ की खासियत

  • पटका की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सेना के स्टैंडर्ड हेलमेट से हल्का और आरामदायक होता है.
  • बहुत देर तक पहने रहने पर भी जवानों को इससे थकान महसूस नहीं होती.
  • पटका पर लगे फ्लैप को गर्दन, गाल और आंख को बचाने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
  • पटका को भीतर की तरफ से बेहद नरम चीज़ से बनाया जाता है जो पटका को अधिक आरामदायक बनाता है.
  • पटका को बेहद ठंडी जगहों पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है, क्योंकि ये थोड़ी गर्मी का एहसास दिलाता है. इसी वजह से पहाड़ी एरिया में तैनात सिख जवान भी इसे असानी से अपनी पगड़ी के ऊपर पहन सकते हैं.
  • हल्का और आरामदायक बनाने के साथ ही पटका हेलमेट को मजबूती और सुरक्षा के लिहाज से भी खास बनाया गया  है. पटका का बुलेट प्रूफ शील्ड इतनी मजबूत है कि एके-47 की घातक गोलियां भी इसे भेद नहीं सकतीं. क्योंकि घाटी में आतंकी AK-47 का अधिकतर इस्तेमाल करते हैं.इस वजह से पटका कश्मीर में तैनात जवानों के लिए बहुत जरूरी हो जाता है.
  • पटका को इतने अच्छे तरीके से डिज़ाइन किया गया है कि कोई भी उपकरण आसानी से इसके साथ एडजस्ट हो जाता है.पटका में आसानी से आधुनिक संचार उपकरणों, दूरबीन, रेंजफाइंडर और नाइट विज़न उपकरणों के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है.
  • फिलहाल पटका हेलमेट का इस्तेमाल राष्ट्रीय राइफल्स, सीआरपीएफ और कश्मीर में तैनात भारतीय सेना के पैरा स्पेशल फोर्स के जवानों द्वारा किया जाता है.

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