विजय दशमी बीत गई. सत्य की असत्य पर विजय हो गई. मोदी जी ने कल द्वारका में रावण भी जला दिया और इसी के साथ ‘अपने भीतर का रावण मारे’ वाले व्हाट्स ऐप मैसेजेस आने बंद हो गए. ये सारी बातें लगभग-लगभग सबको पता ही हैं. जो नहीं पता वो ये है कि कल देश के रक्षा मंत्री ने विदेश में जाकर शस्त्र पूजा की है. रक्षा मंत्री यानि राजनाथ सिंह. कड़ी निंदा वाले.

राजनाथ सिंह कल राफेल रिसीव करने फ्रांस गए थे. फ्रांस ने हाई टेक्नॉलजी से लैस पहला राफेल भारत को सौंप दिया है. इसी पहले राफेल को लेने के लिए सरकार ने राजनाथ सिंह को भेजा था. राजनाथ सिंह गए, कागज-पत्तर पर दस्तखत किये, फिर टेस्ट फ्लाई भी लिया. पर राफेल में बैठने से पहले उन्होंने जो किया वो सोशल मीडिया पर आकर मीम मटेरियल बन गया.

राफेल का पूजा करते राजनाथ सिंह, फोटो सोर्स: गूगल
राफेल का पूजा करते राजनाथ सिंह, फोटो सोर्स: गूगल

किया ये कि राफेल में बैठने से पहले उन्होंने ‘भारतीय हिंदू परंपरा’ के अनुसार नए वाहन की पूजा की. नारियल तोड़ी, फूल चढ़ाए, लड्डू चढ़ाए, राफेल के ऊपर रोली से ओम बनाया और आखिर में पहियों के नीचे नींबू रख कर शस्त्र पूजा पूरी की.

यहां तक तो ठीक था. पर ये सब करते हुए की फोटोज मीडिया में आ गई और वहाँ से  सोशल मीडिया में. बस यहीं से गड़बड़ हो गई. राजनाथ जी ट्रोल हो गए.

कुछ लोगों ने कहा कि ये भारतीय परंपरा की पहचान है. वहीं कुछ लोग कह रहे हैं कि ये बस हिन्दू धर्म का प्रचार है. जबकि तीसरे टाइप के लोगों का कहना है कि राजनाथ सिंह ने ऐसा करके भारत देश के पिछड़े होने का सबूत दिया है. अब जैसे जितने मुंह वैसी उतनी बातें.

एक ट्वीट में कहा गया –

राजनाथ सिंह ने पहियों के नीचे नींबू इसलिए रखा ताकि राफेल मे कभी तेल की कमी न आए, रास्ते में बिगड़े न, कभी पंचर न पड़े और कभी कोई पीछे से ठोक कर डेंट न लगा दे।

दूसरे ट्वीट में किसी दूसरे व्यक्ति ने राजनाथ सिंह के साथ मोदी जी को भी टैग कर दिया और कहा-

बेरोजगारी दूर करने और 15 लाख खाते मे आने के लिए कितने नींबू की ज़रूरत पड़ेगी?

वहीं एक तीसरे ट्विटर हैंडल से ट्वीट आया कि,

मैं विमानों की पूजा करने की बेतुकी रिवायत की निंदा करता हूँ. यह एक धर्म की परंपरा है. ऐसा करना मूर्खता है. राफेल को कर दाता के पैसों से खरीदा गाया है जिसमे मैं भी शामिल हूँ.

ये मीम और ट्रोलिंग से हट कर थोड़ी समझदारी वाली बात थी.

पर ऐसा नहीं है कि यहां सब राजनाथ सिंह की इस शस्त्र पूजा का विरोध ही कर रहे हैं. मितरों! इस संसार में भांति-भांति के लोग हैं और ट्विटर काफी डेमोक्रेटिक भी है. जहाँ हर किसी को बोलने/लिखने की आज़ादी है. यही बात एक सज्जन को पता थी तो उन्होंने ट्वीट किया कि,

मुझे समझ नहीं आता कि क्यों इसे धर्म का रंग दिया जा रहा है, हमें गर्व होना चाहिए. जब मैं राफेल की तस्वीर देखता हूँ, तो गर्व होता है, शस्त्र पूजा में क्या गलत है?

सही बात है, क्या गलत है?

गलत ये है कि, राफेल किसी धर्म का प्रतीक नहीं है, किसी धर्म विशेष का नहीं है और न ही किसी एक धर्म के एक व्यक्ति ने खरीदा है. राफेल देश की सेना के लिए, देश की सुरक्षा के लिए देश के नागरिकों के टैक्स से खरीदा गया है. देश के नागरिकों के अंदर सिर्फ हिन्दू नहीं आते हैं. इसमें और धर्मों के लोग भी शामिल हैं ऐसे में सिर्फ हिन्दू धर्म के रीति-रिवाज से पूजा करने का क्या मतलब? फिर पूजा करनी ही क्यों थी? विज्ञान की हत्या करने के और भी तरीके हैं. राफेल जैसे उन्नत तकनीक से लैस विमान के पहियों के नीचे दो नींबू रख कर विज्ञान को चिढ़ाना अच्छी बात थोड़ी है.

फोटो सोर्स: गूगल
फोटो सोर्स: गूगल

पर हो सकता है जो हम, आप या बाकी लोग न देख पा रहे हो वो रक्षामंत्री ने देखा हो. जैसे कि… हो सकता है राजनाथ सिंह ने फ्रांस की टेक्नॉलजी को कम तर दिखाने के लिहाज से फ्रांस में जाकर, फ़्रांस के वैज्ञानिकों के सामने ही भारत के प्राचीन विज्ञान का उदाहरण देने के लिए नींबू और ओम वाला आइडिया लगाया हो, Who Knows?

इसलिए हम राजनाथ सिंह जी की निंदा करने वालों की कड़ी निंदा करते हैं. क्योंकि,

East Or West India is The Best

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