देश भर में दुर्गा पूजा बड़े धूम-धाम से मनाई जा रही है. चारो तरफ इसको लेकर हर्षों-उल्लास का माहौल है. इसी बीच बंगाल मे एक ऐसी घटना घटी है, जिसने त्योहार के इस माहौल को हिंदू-मुस्लिम विवाद में बदल दिया है. दरअसल, कोलकता के एक पंडाल में दुर्गा पूजा चल रही थी. इसी दौरान अजान की रिकॉर्डिंग बजने को लेकर खूब बवाल हो गया है.

पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है

कोलकाता में एक जगह है, बेलियाघाट. यहां के एक वकील हैं, शांतनु सिंघा. उन्होंने इस मामले को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. यह शिकायत ई-मेल द्वारा भेजी गया है. मेल मे कहा गया है कि,

दुर्गा पूजा के पंडाल से अजान की रिकॉर्डिंग बजा कर आयोजक राज्य में शांति और सद्भाव भंग करने का प्रयास कर रहे हैं. इससे हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंची है. शांतनु ने अपनी बात को साबित करने के लिए सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की दलील देते हैं.

हालांकि, पुलिस ने इस मामले में FIR  दर्ज नहीं की है.

दुर्गा पूजा पंडाल बेलियाघाट (कोलकाता ), फोटो सोर्स: गूगल
दुर्गा पूजा पंडाल बेलियाघाट (कोलकाता ), फोटो सोर्स: गूगल

आयोजकों का इसको लेकर क्या कहना है?

कहा ये जा रहा है कि अज़ान की रिकॉर्डिंग नहीं बल्कि उर्दू में इस्लाम के बारे में एक संदेश बजाया गया था. इसका मकसद हिंदू और मुस्लिम संप्रदाय में भाईचारे का संदेश देना था. सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल होने के बाद पक्ष और विपक्ष से तमाम प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.

इस दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष तृणमूल कांग्रेस के विधायक परेश पाल हैं. उन्होंने इस पूरे मामले पर कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया है.

इस बार सभी धर्मों को ध्यान में रखते हुए इस पंडाल को तैयार किया गया था. आयोजकों का कहना है कि,

समाज और देश में बढ़ती असहिष्णुता को ध्यान में रखते हुए इस बार ‘आमरा एक, एका नया'(हम एक हैं, अकेले नहीं) की थीम रखी गई थी. बीते दो दिनों से पंडाल में अजान की रिकॉर्डिंग बजाने पर इलाके के कई लोगों में भारी नाराजगी है. उनकी दलील है कि दुर्गा पूजा राज्य में सबसे बड़ा त्यौहार है.

कोलकाता के बेलियाघाट का 33-पल्ली का दुर्गा पूजा पंडाल, फोटो सोर्स: बीबीसी
कोलकाता के बेलियाघाट का 33-पल्ली का दुर्गा पूजा पंडाल, फोटो सोर्स: बीबीसी

कई लोगों ने इसका खुल कर विरोध किया है

पंडाल के आस-पास रहने वाले लोगों में इसको लेकर खासा गुस्सा है. वहां रहने वाले तार्केश्वर पाल कहते हैं,

सभी धर्मों का सम्मान करना अलग बात है. लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि हमें दूसरे धर्मों के रीति-रिवाजों का पालन भी करना होगा. पूजा के पंडाल से अजान बजाना गलत है. उनका सवाल है कि क्या ईसाई या मुस्लिमों के त्योहार के दौरान हिंदू देवी-देवताओं के गीत या भजन चलाए जाते हैं?

इस पूरे विवाद को तूल पकड़ता देख, दुर्गा पूजा समिति के सचिव ने अपनी बात रखी है. परिमल डे कहते हैं,

बंगाल की दुर्गा पूजा अपने सामाजिक संदेशों के लिए मशहूर है. अपनी थीम के तहत हमनें पंडाल में मंदिर के अलावा चर्च और मस्जिद के मॉडल लगा कर इन धर्मों के प्रतीक चिह्नों का भी इस्तेमाल किया है. समिति का मकसद यह संदेश देना है कि मानवता सभी धर्मों से परे है.

दरअसल, दुर्गा पूजा के दौरान सर्व धर्म समभाव की थीम के तहत एक वीडियो बजाया गया था. इसमें तीनों धर्मों के बारे में बताया गया था.

इस पर डे का कहना है कि,

मां दुर्गा की पूजा के दौरान अजान की रिकॉर्डिंग बजाने के आरोप निराधार हैं. लोगों ने हिंदू और ईसाई धर्म के बारे में वीडियो में दिए गए संदेशों की तो अनदेखी कर दी. लेकिन, निहित स्वार्थ वाले कुछ तत्व उर्दू में जारी संदेश पर विवाद खड़े कर रहे हैं.

बीबीसी के मुताबिक इस विवाद के बाद पंडाल में लोगों की तादाद कई गुना बढ़ गई. पर अभी तक इस बात का खुलासा नहीं हुआ है कि इस तरह की हरकत की किसने हैं?

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