सिंपल सी खबर ये है कि फिल्ममेकर अनुराग कश्यप ने ट्विटर छोड़ दिया है. अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें नया क्या है वो तो पहले भी ऐसा कर चुके हैं. जब उनकी फिल्‍म बॉम्‍बे वेलवेट आई थी और आते ही डब्बे में चली भी गई थी, तब लोगों ने उनको बेकार का फिल्‍ममेकर बताया था।

अनुराग कश्यप फिल्में तो अच्छी बनाते ही हैं मगर लोग उनको बेबाक अंदाज में बोलने की वजह से भी जानते हैं. अपनी इसी बेबाकी के लिए ही अनुराग को ट्विटर छोड़ना पड़ा।

फिल्ममेेकर अनुराग कश्यप, फोटो सोर्स- गूगल

दरअसल कश्मीर में चल रहे आर्टीकल 370 के खिलाफ अनुराग ने बैक टू बैक 3 ट्वीट किए थे. अनुराग ने 5 अगस्त को किए गए अपने इस ट्वीट में लिखते हैं- उन्हें सरकार के फैसले पर विरोध से कहीं ज्यादा फैसला लिए जाने के तरीके से डर लग रहा है. आर्टीकल 370 या 35A, के बारे में में ज़्यादा नहीं कह सकता. इसका इतिहास तो नहीं जानता हूँ. मैं अभी भी इस पूरे मामले को समझा नहीं हूँ. कभी लगता है 370 को जाना चाहिए था, कभी लगता है क्यों गया. ना तो मैं कश्मीरी मुसलमान हूँ, ना ही कश्मीरी पंडित. मेरा कश्मीरी दोस्त कहता है कश्मीर की कहानी Roshomon की तरह है।

अनुराग कश्यप अपने दूसरे ट्वीट में लिखते हैं कि कई पहलू हैं कश्मीर के. सभी सही हैं और सभी ग़लत. बस इतना जानता हूँ कि जिस तरीके से यह सब हुआ, सही नहीं था. उन्होंने लिखा, पता है डराने वाली बात क्या है, ये कि एक आदमी सोचता है कि 1,200,000,000 लोगों के लाभ के लिए क्या बेहतर है. उसे मालूम है, उसे अपनी शक्त‍ि का इस्तेमाल करने की एक्सेस है. अनुराग कश्यप ने सीधा तो किसी का नाम नहीं लिया मगर उनका संकेत साफ तौर पर मोदी पर था।

बस इसके बाद तो जैसे ट्रोलर को काम मिल गया. ट्रोलर्स बिना कुछ सोचे-समझे, लगे उनके पैरेंट्स को और उनकी बेटी को गरीयाने. कुछ एक ने तो उनके मम्मी-पापा को फोन कॉल्स तक किए. अनुराग की बेटी को रेप की धमकियां मिलने लगी।

फोटो सोर्स- गूगल

इन सबके बाद अनुराग ने एक ट्वीट फिर किया और उसमें लिखा कि- जब आपके माता-पिता को फोन आने लग जाएं और आपकी बेटी को ऑनलाइन धमकियां मिलने लगे तो, फिर कोई भी बात नहीं करना चाहेगा. कोई वजह या कोई भी तर्क नहीं बचेगा. दबंगों का राज होगा और दबंगई जीने का नया तरीका. आप सबको नया भारत मुबारक हो और आप इसमें रह सकें. आपको खुशियां और तरक्की मिले. ये मेरा आखिरी ट्वीट है क्योंकि मैं ट्विटर छोड़ रहा हूं. जब मैं बिना डर के बोल नहीं सकता तो मैं बोलूंगा ही नहीं. गुड बाय।

फोटो सोर्स- गूगल

हमारे देश के सविंधान में सबको बोलने की आजादी है. यहां कोई भी बिना झिझक के अपनी बात रख सकता है. मगर पिछले कुछ समय से ये सब खत्म सा हो रहा है, न्यू इंडिया में।

अगर किसी को अनुराग कश्यप की बाते बुरी लगी तो, उसको अनुराग को कहना चाहिए था ना कि उनकी बेटी को या घर वालों को. सोचने वाली बात ये है कि जब अनुराग ने ये ट्वीट किया होगा तो घर वालों को तो पूछा नहीं होगा. ये उनकी खुद की सोच है. मगर ट्रोल करने वालों को कुछ कहाँ समझ आता है. इनका तो जैसे काम ही बन गया है किसी को भी ट्रोल करना।

फिल्ममेकर, अनुराग कश्यप, फोटो सोर्स- गूगल

अनुराग कश्यप से भी मुझे ये उम्मीद नहीं थी कि आप इतनी जल्दी हार मान गए. आपको इन ट्रोलर्स से जमकर लड़ना चाहिए था. ताकि इनको समझ आए कि किसी की मां- बहन को बोलना कितना महंगा पड़ सकता है। ट्विटर से इस तरह आपका हट जाना कहीं न कहीं उनके हौसले बुलंद करेगा और उनके मन में एक किरण फूटेगी कि वो जो कर रहे थे, वो सही तरीका था किसी को भी चुप करवाने का।

कौन हैं ये ट्रोलर्स

अनुराग कश्यप पहले ऐसे शख्श नहीं हैं जिनके साथ ऐसी घटना हुई है. जिन्हें दक्षिणपंथियों ने निशाना बनाया है. कई सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार और भी तमाम लोगों को जमकर ट्रोल किया जाता रहा है और धमकियाँ दी जाती रही हैं. अभिनेत्री स्वरा भास्कर, पत्रकार रवीश कुमार, पुण्य प्रसून वाजपेयी, अभिसार शर्मा जैसे लोगों को धमकियाँ मिलती रही हैं. मगर सोचनीय बात ये है कि आज तक इन ट्रोलर्स के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

अभी तो आपको और हमको ये सब नॉर्मल लग रहा है मगर जिस तरह से ‘हिंदू राष्ट्रवाद’ और ‘जय श्रीराम’ जैसे नारे से देश में नफरत भरी जा रही है, वो खतरनाक है. इससे भी ज्यादा खतरनाक है देश के मुखिया का इन ट्रोलर्स को फॉलो करना. इसका अंजाम क्या होगा ये तो सोचकर ही डर लगता है. सबसे जरूरी ये है कि सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए कि आखिर ये नफ़रत कहाँ से शुरू हो रही है और ऐसी नफ़रत फैलाने वालों के ख़िलाफ़ पर्याप्त कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है. पर, वो भी मुमकिन दिखता नहीं है कि ऐसा कुछ हो पाएगा।

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