ये कहना गलत न होगा कि आजादी के 70 सालों में भारत और अमेरिका के बीच मधुर होते संबंधो का यह सबसे अच्छा दौर चल रहा है. बीते कुछ सालों में दोनों ही देशों के बीच व्यापार, निवेश, आर्थिक सहयोग एवं सुरक्षा को लेकर नए-नए समझौते हो रहे हैं. इसकी एक और बानगी देखने को मिली है.

दरअसल अमेरिकी विमान कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने कहा है कि अगर भारत उसके साथ 114 विमानों का सौदा कर ले तो वह अपने नए एफ-21 लड़ाकू विमानों को दूसरे किसी देश को नहीं बेचेंगे. हालांकि व्यापक स्तर पर कंपनी के इस प्रस्ताव को उसके अपने अमेरिकी, यूरोपीय और रूसी कंपनियों के साथ चल रही प्रतिस्पर्धा पर बढ़त बनाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.

प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो सोर्स – गूगल

लड़ाकू विमान बनाने वाली कंपनी लॉकहीड मार्टिन के लिए रणनीतिक एवं कारोबार विकास के उपाध्यक्ष विवेक लाल ने अपने दिये एक साक्षात्कार में बताया कि अगर कंपनी को एफ-21 को अनुबंध मिला तो भारत कंपनी के वैश्विक युद्धक तंत्र का हिस्सा भी बनेगा जोकि करीब 165 अरब आमेरिकी डॉलर का बाजार है.

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विवेक लाल ने समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए साक्षात्कार में कहा कि इस नए लड़ाकू विमान को भारत के 60 से ज्यादा वायु सेना बेस स्टेशनों में काम करने के लिहाज से डिजाइन किया गया है. जिसके तहत इन विमानों में प्रमुख विशेषतायें जैसे सुपीरियर इंजन मैट्रिक्स, इलेक्ट्रॉनिक युद्धक क्षमता और हथियार ले जाने की क्षमताओं से लैस किया जाएगा.

आगे उन्होंने कहा,

‘‘हम इस प्लेटफार्म और संरचना को दुनिया के किसी भी देश को नहीं बेचेंगे. लॉकहीड मार्टिन कंपनी की तरफ से भारत के लिए यह एक महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता है जो भारत की महत्ता तथा उसकी जरूरतों को रेखांकित करता है”

विवेक लाल ने बताया कि अगर भारतीय वायुसेना की तरफ से लॉकहीड कंपनी को यह कॉन्ट्रैक्ट मिलता है तो वह भारत के टाटा ग्रुप के साथ मिलकर F-21 अत्याधुनिक लड़ाकू विमान के निर्माण केंद्र की स्थापना करेगा. इससे भारत को रक्षा के निर्माण में सर्वांगीण विकास तंत्र को तैयार करने में भी मदद मिलेगी.

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आपको बताते चलें कि भारतीय वायुसेना के द्वारा 18 महीनों में करीब 18 अरब डॉलर की लागत से 114 लड़ाकू विमान खरीदने के लिए ‘ रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन’ (जानकारी के लिए अनुरोध) के तहत एक निविदा पत्र जारी किया गया था. जिसे हालिया वर्षों में सेना की सबसे बड़ी रक्षा खरीद के तौर पर देखा जा रहा है. इस सौदे के लिए दुनिया के शीर्ष दावेदारों में लॉकहीड का F-21, बोइंग का F/A-18, दसॉल्ट एविएशन का राफेल, यूरोफाइटर टायफून, रूसी लड़ाकू विमान मिग-35 और स्वीडिश कंपनी (SAAB) के ग्रिपेन विमान जैसी विमान बनाने वाली कंपनिया शामिल हैं.

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