इन दिनों देश की बहुत बड़ी आबादी पानी की समस्या से जूझ रही है. कई राज्य इन दिनों सूखे की मार झेल रहे हैं. बूंद-बूंद पानी को तरसती जनता के लिए सरकार कौन से कदम उठा रही है? क्या कर रही है? इस पर लंबी चर्चा की जा सकती है. पर, फिलहाल हम सरकार संभाल रहे नेताओं की बात करने जा रहे हैं.

लेकिन, उससे पहले थोड़ी सी भूमिका और..

देश के लगभग हर शहर में सरकार का एक विभाग होता है. जल आपूर्ति विभाग यानी जल बोर्ड. जिसका काम होता है शहरों में पानी की सप्लाई करना, लोगों को इस्तेमाल लायक पानी मुहैय्या कराना. जल ही जीवन है पर, जीवन की वैल्यू लोग समझते नहीं है. शायद इसके लिए सरकार ने पानी की कुछ कीमत तय कर रखी है. सरकार, जल आपूर्ति के बदले में जनता से महीने का कुछ बिल वसूलती है. पानी के बदले में मासिक शुल्क; जो कि इतना ज्यादा नहीं होता है कि एक आम आमदनी का व्यक्ति इसे न चुका पाए. पर.. लोग होते हैं लापरवाह, बिल नहीं चुकाते है. तब सरकार इनको पकड़ती है, पेनाल्टी लगाती है, नोटिस भेजती है कि भैया बिल चुका जाओ. पर नहीं, लोग नहीं चुकाते हैं. तब आखिर में सरकार उस व्यक्ति को डिफाल्टर घोषित कर देती है. डिफाल्टर घोषित हुए व्यक्ति के घर में सप्लाई वाला पानी भेजना बंद कर दिया जाता है. ये हुई जानकारी कम भूमिका.

Water Crisis

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स- गूगल

अब पढ़िये खबर..

खबर ये कि मुंबई नगर पालिका ने पानी का बिल न चुकाने वाले डिफाल्टर्स की लिस्ट बनाई और नोटिस जारी किया. बढ़िया बात. पर इसमें एक ट्विस्ट आ गया. और वो ट्विस्ट बदल गया खबर में. ट्विस्ट ये कि इन डिफाल्टर्स की लिस्ट में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के बंगले का नाम भी शामिल है. मुम्बई नगर पालिका से आई खबर कहती है कि देवेन्द्र फडणवीस ने 7 लाख से ज्यादा का बिल नहीं चुकाया है. जिसके चलते उनके बंगले ‘वर्षा’ में पानी की सप्लाई बंद कर दी गई है. आइरनी देख रहे हैं. बंगले का नाम ‘वर्षा’ है जहाँ सरकारी विभाग पानी नहीं भेज रहा. वो भी उनके यहां जिनकी खुद की सरकार महाराष्ट्र में है. LoL.

Devendra Fadnavees

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस, फोटो सोर्स- गूगल

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के बंगले के नाम पर  7,44,981  रुपए का पानी बिल बकाया है. जिसके चलते बीएमसी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के ‘वर्षा’ बंगले को डिफॉल्‍टर्स की लिस्‍ट में डाल दिया है.

अच्छा.. इसमें एक बात और जोड़ लीजिए कि वो अकेले मंत्री नहीं है जिन्होंने पानी का बिल नहीं चुकाया है. ऐसे 18 और मंत्री हैं. जिन्हें डिफाल्टर घोषित किया गया है.  सभी के घरों, बंगलों, आवास को डिफाल्टर घोषित कर दिया गया है.  BMC ने उन सभी के घरों में पानी कि सप्लाई बंद करवा दी है.

ये सारी जानकारी एक आरटीआई के जरिये मिली है. राज्य के मुख्यमंत्री के अलावा इस लिस्ट में पंकजा मुंडे, एकनाथ शिंदे, सुधीर मुनगंटीवार, विनोद तावड़े जैसे बड़े नेताओं के नाम शामिल है.

एक तरफ महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा सूखा पड़ा है. पानी की कमी से लोग मर रहे हैं, किसान आत्महत्या कर रहे हैं. महाराष्ट्र में 1972 से अब तक का सबसे बड़ा सूखा पड़ा है. राज्य की 358 तहसीलों में से 151 तहसील सूखे से गुजर रही हैं. 13 हजार से ज्यादा गांव-बस्तियों में पानी की कमी देखी गई है। हालात इतने खराब हैं कि राज्य के जलाशयों में 14% पानी ही बचा है. अब वो भी इमरजेंसी लेवल पर पहुंच चुके हैं. 18 मई को राज्य के 26 बांधों में पानी का लेवल जीरो पर पहुंच चुका है। पिछले साल इस समय यह आंकड़ा 26% था.

अब जहाँ महाराष्ट्र में पानी की इतनी भारी कमी है, वहीं CM जैसे बड़े और मुखिया पद पर बैठे व्यक्ति का पानी का बिल न भरने जैसी लापरवाही का खबर बनना जरुरी भी है. ऐसी खबरें ये सोचने के लिए प्रेरित करती हैं कि जब राज्य के सरकारी विभागों के लिए है खुद एक मुख्यमंत्री का रवैय्या ऐसा है, तब भला जनता तो जनार्दन है. जिन्हें जनता के लिए प्रेरणा बनना चाहिए उन्हें खुद प्रेरणा की जरुरत है. है कि नहीं..