29 नवंबर साल 2016, कश्मीर का नागरोटा आर्मी बेस कैंप। सुबह पांच बजे का समय था। तभी अचानक से आर्मी बेस कैंप से एक तेज आवाज सुनाई दी। आवाज किसी विस्फोट की थी। तभी अचानक से सोशल मीडिया से लेकर हर न्यूज चैनल्स तक यह ख़बर आने लगी-नागरोटा में आतंकी हमला, आतंकी हमले में 7 जवान हुए शहीद। हमले में शहीद हुए एक जवान, जिनका नाम मेजर अक्षय गिरीश था। उनकी पत्नी और एक 2 साल की बेटी नागरोटा में ही थी। जब यह हमला हुआ तो, ठीक उसी वक्त उनकी पत्नी ने फैमली के व्हाट्सप्प ग्रुप में एक मैसेज किया- कृपया न्यूज़ देखिए, नागरोटा में अटैक हुआ है। मैसेज मेजर अक्षय की माँ मेघना के लिए था। अक्षय की बहन नेहा ने मैसेज का रिप्लाई दिया- ओह नो! सब ठीक तो है? मेस में अक्षय नहीं दिखाई दे रहा है, ऐसा अक्षय पत्नी का जवाब था और फिर जो हुआ वह भारतीयों के लिए किसी बड़े हादसे से कम नहीं था।

मां की गोद में मेजर अक्षय गिरीश और बगल में उनकी बहन नेहा, फोटो सोर्स: गूगल

मां की गोद में मेजर अक्षय गिरीश और बगल में उनकी बहन नेहा, फोटो सोर्स: गूगल

चार आतंकवादियों का एक समूह पुलिस की ड्रेस पहने आर्मी बेस कैंप में आए और ग्रेनेड से हमला कर दिया। कई जवान जख्मी हो गए हैं। अभी तक इसके अलावा और कोई जानकारी नहीं। अक्षय की बहन नेहा बार-बार अक्षय की पत्नी संगीता को मैसेज करके और जानकारी लेने की कोशिश करने लगी। अक्षय की पत्नी मैसेज करने लगी कि यहां ड्रिल होना था लेकिन, फायरिंग शुरु हो गई। अभी व्हाट्सप्प पर ये सारी बातें हो ही रही थी कि अचानक सुबह 8.09 बजे के करीब अक्षय का मैसेज फैमली ग्रुप में आया कि-

मेजर हरीश और उनकी पत्नी, फोटो सोर्स: फेसबुक

मेजर गिरीश और उनकी पत्नी, फोटो सोर्स: फेसबुक

हमारे ऊपर फायरिंग हो रही है… फायरिंग का पहला राउंड हमारी गाड़ी के ऊपर ही आया है। मैं अपनी QRT (Quick Reaction Team) टीम के साथ हूँ। तीन लोगों की मरने की ख़बर है। 

मेजर अक्षय गिरीश की मां संगीता गिरीश ने कहा था कि

यह सुनने के बाद मैंने अपना फोन उठा कर अक्षय की पत्नी को कॉल की। उस वक्त उसकी जो आवाज मुझे सुनाई दी, मुझे नहीं लगता कि उससे मैं कभी उबर पाऊंगी। उसने फोन पर चीखते हुए कहा कि मां हमनें उसे खो दिया.

सुबह को यह घटना हुई और फिर शाम तक भी अक्षय गिरीश का शव नहीं मिला। लेकिन, देर रात जब शव मिला तो, पता चला कि उनकी मौत ग्रेनेड से हुई। मेजर अक्षय की जब मौत हुई तो, उस वक्त उनकी दो साल की बेटी नैना थी। जब मेजर अक्षय गिरीश शहीद हुए तो, उस वक्त उनकी उम्र 31 साल थी।

मेजर अक्षय गिरीश के साथ नागरोटा में 6 और जवान शहीद हुए थे लेकिन, अक्षय गिरीश की चर्चा इसलिए ज्यादा हुई क्योंकि उनके शहीद होने के बाद उनकी पत्नी ने फेसबुक पर अपनी कहानी लिखकर पोस्ट किया। इसके बाद सभी ओर चर्चाएं शुरु हो गईं। मेजर अक्षय गिरीश के पिता भी सैनिक थे और उनकी पत्नी यानि संगीता के पिता भी सेना में थे। ऐसे में उनकी पत्नी अपनी पहली मुलाकात के बारे में बताती हैं कि  दोनों आर्मी स्कूल में पढ़ते थे तो, पहली मुलाकात वहीं हुई, साल था 2003। फिर इसके बाद मिलना-जुलना होता रहा। धीरे-धीरे कब समय बीतता चला गया।

मेजर अक्षय गिरीश और उनकी पत्नी, फोटो सोर्स: ट्विटर

मेजर अक्षय गिरीश और उनकी पत्नी, फोटो सोर्स: ट्विटर

साल 2009 की बात है। मैं अक्षय के साथ चंडीगढ़ गई थी। हम वहां से शिमला भी गए लेकिन, वहां कर्फ्यू लगा हुआ था। वहां जिस होटल को हमनें बुक किया था वो, जल्दी बंद हो गया था। जल्दी के चक्कर में अक्षय घर से अंगूठी लाना भी भूल गए थे। इसलिए उन्होंने घुटनों के बल बैठ कर अपनी पॉकेट से पेन ड्राइव निकाला और प्रपोज कर दिया। साल 2009 के बाद दो साल हमनें इंतजार किया। फिर साल 2011 में हमनें शादी कर ली। शादी के बाद दोनों पुणे शिफ्ट हो गए। फिर अक्षय लम्बे समय के लिए बंगलुरु चले गए। ससुराल वालों ने सलाह दी कि वो भी बंगलुरु आ जाए लेकिन, संगीता रुकी रही। फिर साल 2016 में जब अक्षय की शिफ्टिंग नागरोटा में हुई तो, उनकी पत्नी भी नागरोटा चली गई। उसके बाद ही यह घटना हो गई।

इस घटना के बाद आज भी हम उनकी वर्दी को सहेज को रखे हुए हैं। उस वर्दी से एक अलग ही ख़ुशबू आती है। जब भी उस वर्दी पर हमारी नज़र जाती है तो, सर गर्व से ऊंचा हो जाता है। 

नागरोटा में शहीद हुए जवान, फोटो सोर्स: गूगल

नागरोटा में शहीद हुए जवान, फोटो सोर्स: गूगल

नागरोटा में शहीद हुए जवानों में मेजर अक्षय गिरीश के अलावा मेजर गोसावी कुणाल मन्नादिर, लांस नायक कदम सांभाजी येशवंत्रो, हवलदार सुखराज सिंह, ग्रेनेडियर राघवेंद्र सिंह, राइफलमैन असीम राय और नायक चितरंजन देबबर्मा भी थे।