मालेगांव ब्लास्ट मामले में भोपाल से सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर एक बार फिर मुसीबत में घिर गई हैं। बलास्ट के दौरान जो मोटरसाइकिल इस्तेमाल की गई थी, वो प्रज्ञा सिंह ठाकुर के नाम रजिस्टर्ड है। मुंबई की एक विशेष अदालत में मालेगांव ब्लास्ट को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान एनआईए(नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी) के विशेष जज विनोद पाडलकर के सामने दो मोटरसइकिल और पांच साईकिलें पेश की गई थी। चश्मदीद गवाह ने इन दो मोटरसाइकिलों में से एक गोल्डन कलर की एलएमएल फ्रीडम मोटरसाइकिल की पहचान की है। पहचान में यह मोटरसाइकिल साध्वी प्रज्ञा के नाम से रजिस्टर्ड बताई गई है।

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प्रतिकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स: गूगल

क्या है पूरा मामला?

भोपाल से सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर हैं जो फिलहाल भाजपा का सबसे विवादित चेहरा हैं। 2008 के मालेगांव ब्लास्ट में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। इस ब्लास्ट में 6 लोग मारे गए थे और 101 लोग घायल हुए थे। 9 साल जेल में रहने के बाद उन्हें 2016 में बेल मिल गई थी। जेल से बाहर आने के बाद चर्चा होने लगी कि साध्वी बीजेपी में शामिल हो सकती हैं और आखिरकार इस बात पर मोहर 2019 के लोकसभा चुनाव में लग गई जब बीजेपी ने प्रज्ञा को भोपाल से टिकट दे दिया। प्रज्ञा ने कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह को वोटों के बड़े अंतर से हराया था।

यह कोई पहला आरोप नहीं है

मालेगांव ब्लास्ट तो प्रज्ञा सिंह की जीवन में एक ऐसी घटना साबित हुई जो उन्हें देश भर में चर्चा का विषय बना दिया था। लेकिन, ऐसा नहीं है कि केवल मालेगांव ब्लास्ट का ठीकरा प्रज्ञा के सर पर फूटा है बल्कि, साल 2007 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक सुनील जोशी हत्याकांड में भी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को आरोपी बनाया गया था। पर, कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया था।

चुनाव के दौरान भी हुआ विवाद..

चुनाव के दौरान भी साध्वी के बयानों को लेकर काफी विवाद हुआ था। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान मुंबई हमले में शहीद हुए हेमंत करकरे पर बयान दिया था कि, ‘ हेमंत करकरे को मेरे शाप की वजह से अपनी जान गंवानी पड़ी थी’। हेमंत करकरे ने ही मालेगांव ब्लास्ट को लेकर प्रज्ञा सिंह ठाकुर को गिरफ्तार किया था।

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हेमंत करकरे और साध्वी प्रज्ञा, फोटो सोर्स: गूगल

वहीं प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने गांधी के हत्यारे नाथुराम गोडसे को देशभक्त बताया था। जिस के बाद भाजपा के उस समय के अध्यक्ष अमित शाह ने उन पर कार्रवाई करने की बात कही थी। वहीं पीएम मोदी ने कहा था कि बेशक पार्टी उन्हें माफ कर दे पर, वो साध्वी प्रज्ञा को मन से कभी माफ नहीं कर पाएंगे। हालांकि, उनसे टिकट वापस लेने के मामले में पार्टी पीछे हट गई थी।

सरकार की नीयत पर भी सवाल

मोदी सरकार जब से सत्ता में आई है तभी से खुद को देशहित में काम करने वाली पार्टी बताती रही है. वहीं विपक्षी दलों पर देश को बर्बाद करने का आरोप लगाती रही है। लेकिन जब सवाल खुद पर उठाए जाते हैं तो, सरकार केवल आश्वासन देकर चुप हो जाती है। वहीं कुछ नेता तो सवाल पूछने वालों को पाकिस्तान तक चले जाने को कह देते हैं। जैसा कि साध्वी प्रज्ञा के केस में देखने को मिल रहा है। इसके अलावा हाल में आप शबाना आज़मी का बयान सुन सकते हैं। शबाना आजमी ने सीधे तौर पर कहा था कि अगर देश की कोई भी जनता सरकार के खिलाफ एक भी लफ्ज़ बोलता है तो उसे देश का सबसे बड़ा देशद्रोही कहा जाता है।

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मोदी-शाह, प्रेसकांप्रेंस, पोटो सोर्स: गूगल

सबसे पहला सवाल तो ये उठता है कि जिसके ऊपर मासूम लोगों की हत्या का आरोप है, जो 9 साल जेल काट कर आई है, उसे देशहित में काम करने वाली पार्टी ने टिकट कैसे दे दिया? वहीं हेमंत करकरे और महात्मा गांधी पर दिए गए बयान पर कार्रवाई करने की बड़ी-बड़ी बाते कही जा रही थी फिर, उन तमाम बातों का क्या हुआ? स्थिति जस की तस बनी हुई है। सरकार अब भी प्रज्ञा सिंह ठाकुर मामले में चुप्पी साधे हुए है। ये तो वही हो गया कि जब कोई नेता किसी मुद्दे को लेकर विवादित बयान देता है तो, पार्टी उसका निजी बयान कह कर टाल देती है लेकिन, जब वही नेता कोई सराहनीय काम करता है तो, पार्टी उसका पूरा क्रेडीट लेेने के लिए आगे आ जाती है। इसे ही देहाती भाषा में ‘दोगली राजनीति’ की संज्ञा दी जाती है।

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