मतदान पर एक नागरिक का जितना हक और अधिकार है, उतना ही किसी भी देश के नागरिक के पास इसकी निजता का अधिकार भी है. यह पूरी तरह से जायज है कि कोई मतदाता अपने मतदान को गुप्त रखे. यहाँ तक कि अगर कोई पोलिंग एजेंट मतदान बूथ पर किसी भी मतदाता को प्रभावित करता नज़र आता है तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाता है. ये सारे नियम, कायदे और क़ानून सब बने हुए हैं जिनका पालन सभी को करना होता है.

हम ऐसी बातें क्यों कर रहे हैं? इतना ज्ञान किस बात के लिए? इसके पीछे की वजह एक ट्वीट की सीरीज है. इस ट्वीट की सीरीज को पोस्ट किया है मिलन गुप्ता नाम के एक शख्स ने जिनका आरोप है कि चुनाव अधिकारियों ने उनके गुप्त मतदान के अधिकार का हनन किया है.

क्या है पूरा मामला?

मिलन गुप्ता ने अपने 17 ट्वीट के सीरीज के जरिये बताया है कि वो दिल्ली के मटियाला इलाके के बूथ नंबर 96 पर जब वोट डाला तब उनके साथ कुछ अप्रत्याशित हुआ. मिलन ने जब अपने प्रत्याशी को वोट डाला तब ईवीएम मशीन ने तो ठीक तरह से काम किया लेकिन जो वीवीपैट पर्ची उनको दिखी उसमें गलत चुनाव चिन्ह प्रिंट था. इसे एक उदहारण से समझिये. मान लीजिये कि मिलन ने वोट डाला आम को लेकिन पर्ची पर दिखा कि उनका वोट इमली को गया है. अब तो यह बहुत बड़ी समस्या है.

इसी समस्या को लेकर मिलन ने वहां मौजूद अधिकारियों से इस बात की शिकायत करी लेकिन हर अधिकारी उन्हें दुसरे अधिकारी के पास भेज देता और हरेक अधिकारी उनसे शिकायत न करने को कहता. लेकिन मिलन जांच को लेकर अड़े रहे और तब उन्हें बताया गया कि अगर उनकी यह बात गलत साबित होती है तो उन्हें आईपीसी की धारा 177 के तहत गिरफ्तार किया जा सकता है.

 


मिलन लिखते हैं कि उन्हें यह बात जानकार काफी आश्चर्य हुआ क्योंकि उनकी जानकारी के मुताबिक़ धारा 177 के तहत तब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकती जब तक कोर्ट का आदेश न आये. मिलन ने फिर भी कहा कि वो लिखित कम्प्लेन दर्ज करवाने को तैयार हैं. वहां पर मौजूद सबसे सीनियर अधिकारी ने उनसे कहा कि मिलन को अपनी कम्प्लेन अनुलग्नक 6 में दर्ज करवानी होगी. इसके अलावा मिलन को कहा गया कि वो अपनी पत्नी को इस बात की जानकारी दे दें कि वे ऐसा कुछ करने जा रहे हैं और उनकी संभावित तौर पर गिरफ्तारी हो सकती है. मिलन लिखते हैं कि उनकी पत्नी को जानकारी देने से ज्यादा डराने की कोशिश की गयी. मिलन से यह भी कहा गया कि चूँकि पूरे भारत में वीवीपैट को लेकर अभी तक कोई शिकायत नहीं आई है तो ऐसे में उन्हें भी अपनी कम्प्लेन वापस ले लेनी चाहिए.

इनसब के बाद मिलन को एक टेस्ट वोट के लिए राजी होने को कहा गया. इस टेस्ट में उनसे कहा गया कि वो अपना गुप्त मतदान सबके सामने फिर से करेंगे. मिलन को यह बात खटक गयी क्योंकि किसी को भी अधिकार नहीं है कि वह किसी भी नागरिक के गुप्त मतदान के बारे में जबरदस्ती पूछे या जानने की कोशिश करे. मिलन ने इसका विरोध किया लेकिन उनसे कहा गया कि अगर उन्होंने शिकायत की है तो उन्हें इस टेस्ट से गुजरना भी होगा और अपना गुप्त मतदान भी सभी को बताना होगा. मिलन ने अधिकारी से कहा भी कि आप अपनी यह बात लिखित में दें लेकिन उसने ऐसा करने से मना कर दिया. यह सब ताम-झाम करते-करते डेढ़ घंटे बीत चुके थे और उस बूथ पर जहाँ गड़बड़ी मिली थी वहां इस दौरान भी बेधड़क मतदान हो रहा था.

इस टेस्ट मतदान से पहले उन्हें फिर से चेतावानी दी गयी कि अगर वो इसमें फेल होते हैं तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा. मिलन इसके लिए तैयार हो गए. इस टेस्ट वोट में उन्हें किसी भी एक बटन को दबाने के लिए कहा गया. मिलन ने किसी भी एक बटन को आँख बंद कर के दबा दिया क्योंकि वो नहीं चाहते थे कि उनका गुप्त मतदान किसी को पता चले. ऐसे में उन्होंने जो बटन दबाया वो किसी ईंट चुनाव चिन्ह को गया और कुछ ही सेकंड्स में वीवीपैट की पर्ची ने भी बता दिया कि ईंट चुनाव चिन्ह को ही वोट गया है. वहां मौजूद अधिकारी ने मिलन से कहा कि आप गलत साबित हुए और अब आपको गिरफ्तार किया जाएगा. मिलन ने इसके लिए हामी भर दी. अधिकारी ने पुलिस को आदेश दिया कि वो मिलन को गिरफ्तार कर लें.

पुलिस अधिकारी ने उन्हें साथ चलने को कहा. मिलन ने उनसे जानकारी मांगी कि उन्हें किस क़ानून के तहत गिरफ्तार किया गया है या फिर कस्टडी में लिया जा रहा है? इसके जवाब में पुलिस अधिकारी ने उनसे कहा कि कोई धारा नहीं है, बस साथ में चलो. मिलन को पुलिस स्टेशन में चार घंटे बिठा कर रखा गया. इस दौरान पुलिस अधिकारी लगातार चुनाव अधिकारी से बात कर रहा था कि मिलन का क्या करना है? चार घंटे वहाँ बैठे रहने के बाद मिलन का धैर्य जवाब देने लगा. उन्होंने पुलिस अधिकारी से कहा कि या तो उन्हें कानूनन गिरफ्तार कर लिया जाये या फिर उन्हें घर जाने दिया जाये. अंत में पुलिस अधिकारी ने मिलन को घर छोड़ दिया. ऐसा इसलिए क्योंकि धारा 177 किसी को गिरफ्तार करने की अनुमति नहीं देता है जब तक कि कोर्ट का आदेश न हो.

मिलन के क्या आरोप हैं?

इस पूरी कहानी के बाद मिलन लिखते हैं कि उनके साथ यह पूरा गैर-कानूनी व्यवहार इसलिए हुआ क्योंकि उन्होने वीवीपैट को लेकर शिकायत करी. मिलन कहते हैं कि सिर्फ एक बटन दबा कर वो कैसे तय कर सकते हैं कि सारे बटन सही ढंग से काम कर रहे हैं? वो आगे लिखते हैं कि इस सब के दौरान उनके साथ सबसे ज्यादा बुरा जो हुआ वह है उनके वोट की निजता का हनन. चुनाव अधिकारी ने मिलन पर बार-बार दबाव बनाया कि वो वही बटन दबाएँ जो उन्होंने मतदान के दौरान दबाया था जोकि कानूनन तौर पर गलत है. मिलन को इस बात पर भी संदेह है कि उनके कंप्लेन के बाद क्या उनका वोट काउंट भी होगा या नहीं. मिलन ने यह भी कहा है कि वोलोग जो डेमोक्रेसी यानि के लोकतन्त्र को बचाने की बात करते हैं उन्हें चुनाव अधिकारियों द्वारा इस तरह के बर्ताव पर ध्यान देना चाहिए.