प्रकृति ने हम इंसानों को पांच ज्ञानेंद्रियां (सेंसेस) दी है। इन्हीं इंद्रियों (आंख, कान, नाक, जीभ और त्वचा) की मदद से हम अपनी जिंदगी के खुशी और गम को महसूस कर सकते हैं। इन्हीं की मदद से हमें प्यार और नफरत के भाव का अहसास होता है। यही इंद्रियां हैं जिससे हमें मीठे और तीखे शब्दों और स्वादों का पता चलता है। इंसान होने के नाते हम गलत और सही भी इन्हीं की मदद से समझ पाते हैं। लेकिन जब हम मानसिक रूप से कमजोर होते हैं तो हमें गलत और सही का पता नहीं चलता है।

दरअसल, पिछले दिनों ब्रिटिश संसद की पाकिस्तानी सदस्य नाज़ शाह को एक शर्मनाक अनुभव से गुजरना पड़ा। लंदन की एक बस में ऩाज शाह के सामने एक पुरूष ने हस्तमैथुन करना शुरू कर दिया। यह एक संसद के लिए बेहद डरावना अनुभव था। जिसे बाद में उन्होंने जाहिर भी किया।

मीडिया से मिल रही जानकारी के मुताबिक ब्रैडफोर्ड वेस्ट के लेबर पार्टी के नेता ने 1 अप्रैल को सुबह 10.50 बजे सेंट्रल लंदन के व्हाइटहॉल पहुंचने के बाद पुलिस को इस घटना के बारे में सूचना दी। इस घटना के बाद नाज़ ने एक बयान में कहा, “मैं पूरी तरह से चौंक गया था और इस घटना के बाद मैं बीमार-सी महसूस कर रही थी। वह मनोरोगी लापरवाही से हमारे सामने बैठा था। मुझे नहीं पता चल रहा था कि मुझे खुद से क्या करना है। इसके बाद मैंने यातायात विभाग और ब्रिटेन पुलिस को तत्काल इस घटना की जानकारी दी।”

अपने बयान में ब्रिटिश सांसद ने कहा कि अगर इस तरह के मामले रिपोर्ट नहीं की जायेंगे तो ये आंकड़ा बढ़ता ही जाएगा और हालात और भी खतरनाक हो जायेंगे। उन्होंने आगे लिखा कि ये यूट्यूब वीडियो शेयर करना मेरे लिए बेहद महत्वपूर्ण था। कुछ भी हो हमेशा अपने साथ हुए गलत बर्ताव को रिपोर्ट करें, इमरजेंसी नंबर पर मैसेज करें, कॉल करें चाहे आप कहीं भी हों एक्शन लें।

अपने साथ हुई इस घटना के बाद नाज ने एक यूट्यूब वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि किस तरह लगभग 90 प्रतिशत लोग यौन दुर्व्यवहार से संबंधित घटनाओं की रिपोर्ट नहीं करते हैं।

ब्रिटिश सांसद ने आगे लिखा कि उस शख्स ने मेरे सामने मास्टरबेट किया था जब मैं बस से उतर गई मैंने देखा उसके बाद भी वह ऐसा कर रहा था। उन्होंने बस ड्राइवर को इसकी शिकायत की तब तक वह शख्स वहां से जा चुका था। लंदन मेट्रोपॉलिटन पुलिस डिपार्टमेंट फिलहाल इस घटना की जांच कर रहे हैं।

इस घटना के साथ ही जो बड़ी बात हमारे सामने आई वो यह है कि ब्रिटेन जैसे देश में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं है। एक देश भौतिक सुख सुविधाओं के आधार पर कितना भी विकसित हो जाए लेकिन वैचारिक स्तर पर जब तक परिपक्व ना हो पाए समाज में इस तरह की घटना घटती रहती है।

हस्तमैथुन इंद्रिय सुख प्राप्त करने का एक समान्य तरीका है। यह किसी इंसान के लिए बेहद निजी मामला है। यह माना जाता है कि काम सुख को प्राप्त करने के लिए एक इंसान इस समय ‘किन्हीं खूबसूरत पलों’ की कल्पना करता है। लेकिन यदि किसी महिला को अकेले में देखते ही कोई पुरूष हस्तमैथुन करने लगता है तो इससे उस पुरूष के मानसिक संक्रमण का पता चलता है।

एक पुरूष जब महिला के अंगों को किसी काम सुख के माध्यम के रूप मे देखने लगता है। जब किसी पुरूष के लिए एक महिला एक सेक्स टॉय से ज्यादा अहमियत नहीं रखती है, तो इस तरह की घटनाएं हमारे समाज में घटने लगती है। ऐसे ही लोग अकेले में महिलाओं को देखते ही उन्हें अपनी हवस का शिकार बनाना चाहते हैं। मौका मिलते ही ऐसे लोग इस तरह की घटना को अंजाम देते हैं।

सांकेतिक तस्वीर (Image Creadit: bbc)

ब्रिटेन में आज जो घटना घटी है वो दुनिया भर के समाज में आम हो चुकी है। इससे हमें यह पता चलता है कि दुनिया की आधी आबादी के लिए यह दुनिया सुरक्षित नहीं है। भारत में भी आए दिन बसों, रेलों व सड़कों पर चलते हुए महिलाओं को इस तरह के मानसिक संक्रमण का शिकार होना होता है।

दुनिया जितनी तेजी से विकसित हो रही है उतनी तेजी से महिलाओं के अनुकूल हमारा समाज नहीं बदल पा रहा है। आज भी दफ़्तरों और घरों में महिलाओं का यौन शोषण किया जा रहा है। भारत की महिलाओं को पहले गुड टच व बैड टच के बारे में पता नहीं था, अब जब शहरी महिलाओं को पता भी चला है फिर भी महिलाएं खुल कर सामने नहीं आती हैं। महिलाओं के साथ होने वाले यौन शोषण के बढ़ते मामले को देखते हुए दुनिया भर में नोफैप जैसा आंदोलन चलाया गया। यह एक ऐसा आंदोलन है जो लोगों को पॉर्न ना देखने और हस्तमैथुन छोड़ने के लिए प्रेरित करता है। यह लोगों के मानसिक संक्रमण को रोकने का एक तरीका भर है।

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