मनाली, भारत का वो खूबसूरत शहर हैं जहां आप कभी भी जाकर अपनी दौड़ती-भागती ज़िंदगी को कुछ समय के लिए रोक कर सिर्फ सुकून की जिंदगी जी सकते हैं। पहाड़ों की चादर ओढ़े ये शहर इतना सुंदर दिखता है कि छूट्टियां मानने के लिए जब भी लोग अपनी लिस्ट बनाते हैं तो उस लिस्ट में यह शहर भी होता है। पहाड़ों की दुनिया होती ही इतनी अलग है जहां आप भागदौड़ की ज़िंदगी से दूर कुछ समय के लिए ही सही लेकिन प्रकृति की गोद में होते हैं।

अब जरा सोचिए जिन पहाड़ों पर आप भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर जाकर समय बिताते हैं क्या आप जानते हैं कि अब इन पहाड़ों पर भी गंदगी लगातार बढ़ती जा रही है। और इसके जिम्मेदार हम और आप ही है। ऐसे में सरकार और किसी और को दोष देने के वजाय अगर अपने आप को दोषी मान लिया जाए तो ज्यादा बेहत्तर होगा।

आइए शुरू से जानते हैं

Garbage In Manali

मनाली में जमा हुआ कूड़े का ढेर

टाइम्स ऑफ इंडिया ने एक रिपोर्ट जारी की। जिसमे उन्होंने बताया कि, मनाली पर्यटक शहर होने के कारण, वहाँ हर साल लोग गर्मी से राहत पाने जाते हैं। इस साल भी मई-जून में करीबन 10 लाख लोग वहाँ गए और ये प्रक्रिया अभी भी चल रही है। अब जब लोग कहीं जाते हैं तो उस जगह की खूबसूरती में गंदगी फैलाने जैसा दाग लगा देते हैं। यहाँ भी यही समस्या देखने को मिली। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मनाली में इस साल 2000 टन से भी ज़्यादा कूड़ा देखने को मिला। अब तो वहां कि स्थिति ये हो गई है कि लोगों को वहां खूबसूरती की जगह कूड़े के ढ़ेर मिल रहे हैं।

रोहतांग पास, सोलंग से मनाली शहर और वहाँ के आस-पास के होटल्स का सारा कूड़ा इकट्ठा करके उसे शहर के कचरा ‘ट्रीटमेंट प्लांट’ में भेज दिया जाता है। असल में दुख की बात ये है कि इस कचरे का ज़्यादातर हिस्सा प्लास्टिक होता है, जिसकी वजह से इससे फैलने वाली बीमारियाँ और वायू प्रदुषण जैसी समस्या उत्पन्न हो रही है।

वहाँ के बस अड्डों के आस-पास की हालत इतनी खराब है कि पर्यटकों को उतरकर मास्क लगाना पड़ता है। पहले यह शहर अपने पर्यटकों को खूबसूरत प्राकृतिक खुशबू के साथ स्वागत करता था लेकिन अब पूरा शहर उनका गंदगी और बदबू के साथ स्वागत करता है। हाल सिर्फ बस स्टैंडों तक ही खराब नहीं हैं बल्कि हवाई अड्डों का भी यही हाल है। यानी अगर आप हवाई जहाज़ से जाएँ या फिर रोड से जाएँ, शहर के आस-पास कूड़े का ढे़र आपके साथ चल रहा होगा।

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स: गूगल

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स: गूगल

मनाली नगरपालिका के अधिकारी नारायण सिंह वर्मा ने कहा बताया कि, ‘हर दिन 100 टन कूड़ा जलाने की क्षमता वाला संयंत्र अगले हफ्ते तक काम करना शुरू कर देगा। मनाली में ‘पीक टूरिस्ट सीजन’ के समय हर दिन 35 टन कचरा निकलता है जबकि, बाकी दिनों में यह लगभग 10 टन कूड़ा ही पैदा करता है। एक बार जब प्लांट काम करना शुरू कर देगा तो हमारी कचरे से जुड़ी सभी समस्याएं हल हो जाएंगी।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, मनाली शहर के बाहर कूड़े से बिजली उत्पन्न करने के लिए प्लांट पर काम किया जा रहा है और इस काम की शुरुआत जल्दी ही होगी। ‘नैशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल’ ने मनाली और कुल्लू के म्युंसिपल को कड़ी हिदायत दी हैं कि, ‘यहां से निकलने वाले कूड़े को जल्द-से-जल्द डिस्पोज किया जाए। इस कचरे से हिमाचल प्रदेश के पर्यावरण और नदी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए, इस बात का भी खास ध्यान रखा जा रहा है।

मनाली और आस-पास की जगहों पर डम्पिंग यार्ड न होने की वजह से वहाँ के लोगों को संघर्ष करना पड़ रहा है। इसलिए वहाँ की ग्राम पंचायत और म्युंसिपल डिपार्टमेंट इस समस्या से निपटने के लिए हर संभव काम करने में लगी है जिससे वहाँ की वातावरण को फिर से पहले जैसा आकर्षित और सुंदर बनाया जा सके