देश सेवा में जान न्योछावर करने वाले बेटे को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ देकर श्रद्धांजलि दी गयी थी लेकिन, अब शहीद की माँ देश के लिए जो कर रही है वो ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ से भी बढ़ कर है.

 

दो साल पहले, 6 अक्‍टूबर 2017 को अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले में वायु सेना का MI-17 हेलीकॉप्टर हादसे का शिकार हुआ था. इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में देश ने स्क्वाड्रन लीडर शिशिर तिवारी के रूप में एक वीर सपूत को खो दिया था. स्क्वाड्रन लीडर शिशिर तिवारी की शहादत पर करोड़ों लोगों की आँखों में आँसू थे और हाथ सलामी दे रहे थे. इन्हीं में से दो हाथ शहीद की माँ के थे जिसने, शिशिर तिवारी जैसे जांबाज को जन्म दिया था.

 

शहीद स्काड्रन लीडर श‍िश‍िर तिवारी, फोटो सोर्स - गूगल
शहीद स्क्वाड्रन लीडर श‍िश‍िर तिवारी, फोटो सोर्स – गूगल

 

बेटे की याद में माँ सविता तिवारी की आंखों से निकलने वाले आंसू आज भी थमने का नाम नहीं ले  रहे थे. इसी दौरान माँ सविता तिवारी ने एक फैसला किया कि वो अपने बेटे की शहादत को जाया नहीं जाने देगी. इसके लिए उन्होंने गरीब और बेसहारा बच्चों को शिक्षित बना कर उनकी ज़िंदगी संवारने का जिम्मा उठाया. अब सविता तिवारी ने इसी काम को अपनी ज़िंदगी का मकसद बना लिया है. उन्होंने अपने पति के साथ मिल कर अपने बेटे शिशिर की याद में शहीद स्क्वाड्रन लीडर शिशिर तिवारी चैरिटेबल ट्रस्ट की शुरुआत की.

शहीद शिशिर तिवारी चैरिटेबल ट्रस्ट में पढ़ते बच्चे

फोटो सोर्स – गूगल

 

 

 

शहीद स्क्वाड्रन लीडर शिशिर तिवारी का परिवार इंदिरापुरम के अहिंसाखंड-स्थित अंबाजी सोसायटी में रहता है. शिशिर के पिता शरद तिवारी वायुसेना से ग्रुप कैप्टन पद से रिटायर हो चुके हैं. जवान बेटे के शहीद होने के बावजूद शिशिर के माता-पिता ने खुद को टूटने नहीं दिया बल्कि समाज को एक नई दिशा देने की ठानी.

शहीद शिशिर तिवारी कि तस्वीर के साथ माता - पिता, फोटो सोर्स - गूगल

शहीद शिशिर तिवारी की तस्वीर के साथ माता-पिता, फोटो सोर्स – गूगल

 

शिशिर की माँ लंबे समय से बेसहारा बच्चों के लिए काम कर रही थी लेकिन, बेटे की शहादत के बाद वो इस काम के लिए पूरी तरह से समर्पित हो गईं. अपने बेटे की याद में खोले गए ट्रस्ट के जरिये सविता तिवारी ने शुरुआत में मयूर विहार के गरीब बच्चों को पढ़ाना शुरू किया. जहां पर पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों के लिए अच्छे खाने-पीने की व्यवस्था भी की जाती है.

सविता तिवारी ने बताया-

“शुरुआत में हमारे पास 10 बच्चे आते थे, फिर 20 हुए. ऐसा चलते-चलते आज की तारीख में हमारे पास 12वीं तक के लगभग 400 बच्चे आने लगे हैं. जहां इन बच्चों का भविष्य संवारने के लिए मुफ्त शिक्षा दी जा रही है.”

 

फोटो सोर्स - गूगल
फोटो सोर्स – गूगल

 

सविता तिवारी ने बताया कि, अक्सर जब मैं गरीब बच्चों को अपने आस-पास कचरा उठाते हुए देखती थी तो मेरा मन विचलित हो जाता था. मेरी आंखों से आंसू निकल पड़ते थे. उसी दौरान मैंने फैसला किया कि,ऐसे गरीब बच्चों को पढ़ाकर उन्हें आगे बढ़ने का मौका दूँगी. जिसके बाद मैंने बच्चों को पढ़ाने के लिए एक पाठशाला खोल ली.

इसके बाद उन्होंने स्लम इलाकों में जाकर बच्चों के माता-पिता से बात कर उनको शिक्षा के लिए जागरूक किया. अपना अनुभव साझा करते हुए सविता तिवारी बताती हैं, मेरे समझाने पर इन बच्चों के माता-पिता आसानी  से समझ गए जैसे कि इनको इसी तरह की मदद का इंतज़ार था. कि कोई आकर इनके बच्चों को एक नई दिशा दे दे. ट्रस्ट में पढ़ने आने वाले बच्चों के माता-पिता रिक्शा चलाने, मजदूरी या फिर किसी के यहाँ घरेलू काम करते हैं. ऐसे हालातों में अपने बच्चों को पढ़ा पाना आसान नहीं होता है.

सविता तिवारी ने बताया, उनके ट्रस्ट में 25 वालंटियर्स की एक टीम बच्चों के होम वर्क से लेकर तमाम विषयों पर नजर रखती है. पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को सामाजिक और व्यावहारिक गुण भी सिखाए जाते हैं. स्वास्थ्य और स्वच्छता, जैसे विषयों पर भी बात की जाती है. पिछले एक साल में यहाँ पढ़ने वाले बच्चों में काफ़ी अच्छा बदलाव आया है. बच्चों की आदतों को देख कर अब उनके माता-पिता की आदतों में भी बदलाव आने लगे हैं.

फोटो सोर्स - गूगल'

फोटो सोर्स – गूगल

सविता तिवारी ने बताया, ट्रस्ट के लिए फंडिंग अभी भी एक समस्या बनी हुई है. इस काम में ज़्यादातर पैसे वो खुद से लगा रही हैं लेकिन, अब 1 साल गुजर जाने के बाद लोगों को हमारे बारे में पता लग रहा है. लोग मदद के लिए आगे आ रहे हैं.

सविता तिवारी का सपना है कि, वो इन गरीब बच्चों को पुलिस अफसर, आर्मी अफ़सर, वकील या फिर डॉक्टर बनाकर देश की सेवा करते हुए  देखें. जिस दिन ऐसा होगा उस दिन उनको लगेगा कि उन्होंने अपने बेटे को सच्ची श्रद्धांजलि दे दी है.    

यदि आप भी सविता तिवारी द्वारा शुरू किए गए  काम का हिस्सा बनना चाहते हैं तो उनसे  tee_vee15@yahoo.co.in या फिर +91 9891195135 पर संपर्क कर सकते हैं.

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