आपने अक्सर कैदियों के बारे में सुना होगा कि वो हिरासत में आपस में झगड़ पड़े हैं. कैदियों ने मिल कर आपस में सीर फुटवल कर लिया है. कभी तो पुलिस के सामने ही उनके आपस में किए गए ‘दंगल’ की खबरें आ जाती है. लेकिन अब जरा सोचिए कुछ ऐसे ही अगर दो नेताओं के बीच सुनने को मिले तो आप क्या कहेंगे? उन नेताओं को कैदी तो बिल्कुल नहीं कहेंगे लेकिन एक और बात है ऐसे नेताओं के लिए आपके पास कोई शब्द भी नहीं होंगे.

दरअसल, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद, वहां के दो बड़े राजनेताओं महबूबा मुफ्ति और उमर अब्दुल्ला को हिरासत में ले लिया गया था. ताकि, कोई भी दुर्घटना न घट सके और कश्मीर घाटी में शांती कायम रखी जा सके. दोनों को सरकारी गेस्ट हाउस हरि निवास में रखा गया था. हालांकि, ये बात जग जाहिर है कि दोनों ही एक-दूसरे को देखना तक पसंद नहीं करते हैं.

इसी का नतीजा है कि हरि निवास में दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ गया था कि उन्हें अलग करना पड़ा. दोनों एक-दूसरे पर जम्मू-कश्मीर में भाजपा को लाने का आरोप लगा रहे थे.

इसी दौरान उमर अब्दुल्ला महबूबा मुफ्ति पर चिल्ला पड़े. उन्होंने महबूबा मुफ्ती और उनके दिवंगत पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद को बीजेपी से 2015 और 2018 में गठबंधन करने का जिम्मेवार ठहराया. इसी को लेकर दोनों के बीच खूब कहा-सुनी हुई.

उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, फोटो सोर्स: गूगल
उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, फोटो सोर्स: गूगल

महबूबा ने भी पलटवार करते हुए उमर को याद दिलाया कि फारूक अब्दुल्ला का गठबंधन अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में एनडीए (नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस) के साथ था. इतना ही नहीं उन्होंने जोर से उमर से कहा कि आप तो वाजपेयी सरकार में विदेशी मामलों के जूनियर मिनिस्टर थे. इतना ही नहीं महबूबा मुफ्ती ने उमर अब्दुल्ला के दादा शेख अब्दुल्ला को भी 1947 में जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया.

ये विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों को अलग-अलग रखने का फैसला करना पड़ा. उमर को महादेव पहाड़ी के पास चेश्माशाही में वन विभाग के भवन में रखा गया है. जबकि महबूबा हरि निवास में ही हैं. झगड़े से पहले उमर हरि निवास के ग्राउंड फ्लोर पर थे. जबकी महबूबा को पहली मंजिल पर रखा गया था.यह जानना जरुरी है कि हरि निवास एक सरकारी गेस्ट हाउस है जिसका इस्तेमाल अब आतंकियों से पूछ-ताछ करने के लिए किया जाता है.

इसी झगड़े के दौरान यह बात भी सामने आई है कि दोनों नेताओं को जेल के नियमों और उनके ओहदों के हिसाब से खाना दिया जा रहा है. इतना ही नहीं महबूबा मुफ्ती ने जब ब्राउन ब्रेड खाने की इच्छा जाहिर की तो उन्हें वह नहीं दिया गया क्योंकि, जेल के मेन्यू में हिरासत में लिए गए वीवीआईपी लोगों के लिए ऐसा कोई प्रावधान नहीं है.

गौरतलब है कि इससे पहले महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला के बीच तीन तलाक हटाने के मामले को लेकर भी खूब विवाद हो चुका है. जहां उमर अब्दुल्ला ने भाजपा सरकार के इस फैसले का समर्थन किया था वहीं, महबूबा मुफ्ती ने इसे मुस्लिम घरों में भाजपा की घुसपैठ करार दिया था. दोनों के बीच इसको लेकर लगातार ट्वीटर वॉर देखने को मिला था.

नेताओं के बीच बहस-मुबाहिसे, आरोप-प्रत्यारोप, वाद-विवाद पहले भी हुए हैं. जूते-चप्पल भी चले हैं. गाली-गलौच भी हुए हैं. लेकिन, ऐसा पहली बार देखने को मिला है कि किसी पार्टी का प्रमुख, दूसरी पार्टी के प्रमुख के साथ हिरासत में होते हुए भी झगड़ पड़ा हो. ये अपने आप में एक अनोखी और शर्मसार करने वाली घटना है.

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