किसी भी लोकतांत्रिक देश में लोकसभा चुनाव इसलिए कराया जाता है ताकि देश के नागरिकों को यह एहसास हो सके कि वह जिस लोकतांत्रिक देश में रहते है उसमें सरकार चुनने का अधिकार सिर्फ नागरिक का है। लेकिन यही नागरिक उस वक्त काफी असमंजस की स्थिति में फंस जाते हैं, जब इनके सामने वैसे नेता को चुनने का वक्त आता है जो राजनीति को जातीय समीकरण पर बांटता हो। जातिवाद के नाम पर राजनीति करने वाले नेता सत्ता की कुर्सी के लालच में अपनी जुबान के साथ-साथ अपनी मर्यादा का भी ख्याल नहीं करते है। लोकसभा चुनाव 2019 में भी कुछ इसी तरह की असमंजस की स्थिति लोगों के लिए बनी हुई है। कुछ इसी तरह का नज़ारा पीलभीत लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रही मेनका गांधी की जनसभा में देखने को मिल रहा है।

मेनका गांधी छह बार से इस संसदीय सीट से सांसद है। 1996 से 2004 तक लगातार यहां सांसद रही मेनका, अपने बयानों को लेकर हमेशा से चर्चा में रहती है। 2009 में अपने बेटे वरुण गांधी को सुल्तानपुर से सांसद नियुक्त करके उनके राजनीति करियर का शानदार आगाज मेनका गांधी ने कराया। लेकिन फिर 2014 में मेनका अपने पीलभीत सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया और तब तक उनके बेटे वरुण गांधी सुल्तानपुर में अपनी जगह पक्की कर चुके थे। 2014 में पीलभीत से चुनाव जीतने के बाद मेनका गांधी ने एक बार फिर सुल्तानपुर की तरफ रुख किया है। इस लोकसभा में पीलभीत से वरुण गांधी चुनावी मैदान में है।

मेनका गांधी, फोटो सोर्स: गूगल

लोकसभा चुनाव को लेकर सभी राजनैतिक दल अपने अलग अलग मुद्दों को लेकर लोगों को रिझाने में लगे हुए है। वहीं पीलभीत की कहानी कुछ और है। यानि यहां की लोकसभा चुनाव के लिए जिस तरह से मेनका गांधी जनसभा में भाषण दे रही हैं ऐसा लगता है कि उनका स्क्रिप्ट राइटर एक ऐसा राइटर है जिसे स्पेशली मुसलमानों के विरोध में लिखने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसा इसलिए कहना पड़ रहा है क्योंकि मेनका गांधी के भाषण में मुस्लिम समुदाय के प्रति जिस तरह से आग उगली जा रही है वह वाकई चौकाने वाली बात है।

क्या था बयान?

मेनका गांधी सुल्तानपुर के मुस्लिम बहुल क्षेत्र तुराबखानी में एक जनसभा को संबोधित कर रही थी। उस वक्त उन्होंने मुस्लिम समुदाय की तरफ इशारा करते हुए कहा –

हमने पीलभीत में कम से कम 1000 करोड़ रुपये मुसलमानों के ऊपर बांटे होंगे ताकि वो खुशी से अपने जीवन को बिता सकें। लेकिन चुनाव के समय जब आप कहते है कि हम बीजेपी को छोड़कर बाकि किसी को वोट दे देंगे ताकि बीजेपी हार जाए तो इससे हमारा दिल टूटता है।

आपको कुछ भी होता है तो आप मेरे पास आते है ना कि उसके पास जिसे आप वोट दिए होते है। इसलिए इस बार का वोट मुझे हीं दें क्योंकि चुनाव के बाद आपको मेरी ही ज़रुरत पड़ेगी।

मेनका का कहना था कि चुनाव में जीत मुसलमानों के बिना भी हो जाएगी और साथ रहेंगे तब भी। अब ये बात उन्हें खुद फैलानी है और खुद तय करनी है कि वो वोट करे या न करे। उनके इस बयान से एक प्रकार का दंभ नज़र आता है। जहाँ दिखाई देता है कि उन्हें और उनकी पार्टी को मुसलमानों के साथ होने या न होने से कोई खास फर्क नहीं पड़ता है।

मेनका के इस बयान के बाद जिले के चुनाव अधिकारियों ने कारण बताओं नोटिस भेजा है। जिसका तीन दिन के अंदर मेनका को जवाब देना होगा। दिल्ली में चुनाव आयोग भी मेनका के इस भाषण की जांच कर रहा है।

विपक्ष का वार

रणदीप सुरजेवाला, कांग्रेस प्रवक्ता, फोटो सोर्स: गूगल

मेनका गांधी के इस बयान के बाद कांग्रेस और बाकी पार्टियां इस बयान को लेकर काफी आलोचना कर रही हैं। कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार को चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि चुनावी कदाचार के लिए मेनका का नामांकन खारिज़ किया जाए। साथ ही साथ पार्टी ने यह भी कहा कि धार्मिक भावनाएं भड़काने के लिए उनके खिलाफ शिकायत भी दर्ज करनी चाहिए। कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि मोदी और उनके मंत्री बौखला गए है इसलिए कभी जाति तो कभी धर्म के नाम पर लोगों को बांटने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे लोगों को एक दिन के लिए उम्मीदवार बनने का अधिकार नहीं है।

पहले भी दिए जा चुके है विवादित बयान

मुस्लिम समुदाय के खिलाफ़ बोलने की आदत शायद कांग्रेस परिवार से अलग होने के बाद ही मेनका गांधी और उनके बेटे वरुण गांधी के अंदर आ गई थी। अब इसे बीजेपी में शामिल होने का साइड इफेक्ट समझे या फिर आरएसएस का प्रभाव। क्योंकि गांधी परिवार में 1996 के बाद का इतिहास उठा कर देखे तो मुस्लिम समुदाय को साथ मिलाकर राजनीति करने की रणनीति बन गई है। कुछ ऐसी ही घटना हुई साल 2009 में जब पीलभीत लोकसभा से राहुल गांधी चुनावी मैदान में उतरे।

वरुण गांधी, फोटो सोर्स: गूगल

वरुण के ऊपर अपनी मां के क्षेत्र से जीत दर्ज करने का एक अतिरिक्त दवाब था। शायद इस दवाब के बोझ में वरुण गांधी क्या कुछ अपने भाषण में बोल गए और उसका क्या परिणाम होगा इसका अंदाज खुद उनको भी नहीं था। नवभारत टाइम्स में छपी खबर के अनुसार पीलभीत में हिन्दु बहुल जनसभा को संबोधित करते वक्त वरुण गांधी ने कहा था कि अगर आपके ऊपर कोई हाथ उठाया तो वरुण गांधी उसका हाथ काट देगा। क्योंकि आपके इज्जत पर कोई हाथ डालेगा तो वरुण गांधी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कर सकता। जिसके बाद उनपर आरोप लगे और गिरफ्तार किया गया।

मेनका गांधी भी पहले इस तरह की भाषण दे चुकी हैं, जब वह पीलभीत से लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी की उम्मीदवार थी। अब मेनका गांधी द्वारा दिए गए भाषण का मतलब निकाले तो इसके कई अर्थ है। एक तरह से देखा जाए तो मेनका गांधी इस तरह के भाषण देकर मुस्लिम समुदाय को खुली चेतावनी दे रही हैं और बीजेपी द्वारा जिस तरह से जातीय समीकरण को आधार बनाकर राजनीति की जा रही है उसका एक उदाहरण बनने की कोशिश कर रही है। मेनका का यह बयान हिन्दुओं की तरफ भी इशारा कर रही है कि एक ऐसा नेता है जो हिन्दुवाद पर चुनाव जीतेगा यानि मुस्लिम विरोधी है। मेनका के इस भाषण का आधार जो भी हो लेकिन चुनाव आय़ोग ने तीन दिन के अंदर उनसे जवाब मांगा है।

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