नाबालिग बच्चों के साथ अपराध बढ़ते जा रहे हैं लेकिन उसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाया ही नहीं जा रहा है। जब तक कहीं कुछ गलत न हो जाये तब तक किसी को कोई फ़र्क ही नहीं पड़ता कि किसके साथ क्या हो रहा है?

एक ऐसी ही खबर आई जहां सिर्फ 12 साल की बच्ची को आत्महत्या जैसा कदम उठाना पड़ा।

पूरी बात शुरू से जानते हैं

नई दिल्ली के रोहिणी इलाके में 12 साल की बच्ची ने रोज-रोज के शोषण और अत्याचार से तंग आकर सुसाइड करने का फैसला लिया। उसे शायद सुसाइड का मतलब भी ढंग से पता न हो लेकिन उसे इतना ज़रूर पता रहा होगा कि अपने साथ हो रहे अत्याचार से मुक्ति ज़रूर मिल जाएगी और यही सोच कर उसने खुद को मारने का कदम उठा लिया।

दिल्ली के रोहिणी इलाके में रहने वाला एक परिवार जिसे इतनी भी समझ नहीं थी कि छोटे बच्चों से काम करवाना कानूनन जुर्म है। वो एक 12 साल की बच्ची को घर पर नौकरानी रख लेते हैं। इन लोगों ने शकूरपुर स्थित एक प्लेसमेंट एजेंसी के जरिये मेड हायर की। अब यहां पर एक और बेकार बात ये कि उस एजेंसी ने एक 12 साल की बच्ची को मेड बना कर भेज भी दिया जबकि एक प्लेसमेंट एजेंसी चलाने वाले लोगों कम से कम इतना तो मालूम ही होगा कि ऐसा करना अपराध है। इसके बाद भी उन लोगों ने बिना किसी कानूनी डर के ये अपराध किया।

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स: गूगल
प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स: गूगल

जब माँ-बाप अपने बच्चों को कमाई करवाने का जरिया बना कर उन्हें एक अंधेरी दुनिया में धकेल देते हैं तब इस तरह की खबरें आती हैं। इस केस में भी ऐसा ही हुआ। असम की रहने वाली नाबालिग बच्ची भी इस घिनौने अपराध का शिकार हो गई। लड़की के सौतेले बाप ने उसे असम से दिल्ली बुलाया फिर उसे किसी प्लेसमेंट एजेंसी में बेच दिया। एक सौतेले बाप ने एक नन्ही सी ज़िंदगी को चाइल्ड रैकेट का शिकार बनने पर मजबूर कर दिया।

पहले प्लेसमेंट एजेंसी ने उस लड़की को खरीदा। उसके बाद रोहिणी के रहने वाले एक परिवार में उस नाबालिग बच्ची को मेड के तौर पर भेज दिया। जहां उस बच्ची के साथ हर रोज़ मार-पीट की जाती थी तो कभी उसका हाथ खौलते दूध में डुबा दिया जाता था। इस तरह की शारीरिक, मानसिक प्रताड़ना से उस बच्ची का हाल इतना बुरा हो गया कि उसे खुद को खत्म कर लेने जैसा बड़ा फैसला लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। उसने फिनाइल पीकर खुद को मारने की कोशिश की।

‘डीसीडब्ल्यू’ ने लिया एक्शन

सूचना मिलने पर उसी टाइम ‘दिल्ली महिला आयोग’ (डीसीडब्ल्यू) बच्ची की मदद करने के लिए वहाँ पहुंची और मामला दर्ज़ होने के बाद उत्तर-पश्चिमी जिले के पुलिस कमिश्नर को नोटिस भेजा। आयोग से मिली जानकारी के अनुसार, 12 साल की नाबालिग पीड़िता असम की रहने वाली है। उस बच्ची को उसके सौतेले बाप ने दिल्ली में एक ‘प्लेसमेंट एजेंसी’ को बेच दिया था। नाबालिग लड़की को उसके भाई के साथ मार्च 2019 में असम से दिल्ली लाया गया था। लड़की का बाप दिल्ली के पंजाबी बाग इलाके में काम करता था। दिल्ली के शकूरपुर इलाके में स्थित ‘प्लेसमेंट एजेंसी’ ने लड़की को रोहिणी के एक परिवार के यहां भेज दिया। यहां नाबालिग बच्ची को इतना प्रताड़ित किया गया कि उसने 6 जून को फिनाइल पीकर आत्महत्या करने की कोशिश की। तबियत बिगड़ने पर मालिक ने लड़की को प्लेसमेंट एजेंसी में छोड़ दिया। जहां से उसे भगवान महावीर अस्पताल में भर्ती कराया गया।

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स: गूगल
प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स: गूगल

बच्ची के साथ वो परिवार इतने बेरहमी से पेश आया कि डीसीडब्ल्यू की एक रिपोर्ट के हिसाब से उस बच्ची के शरीर पर जगह-जगह चोटों के निशान मिले, हाथ जले थे और बेल्ट से कई बार मारे जाने से मार के निशान भी देखे गए। उस मासूम बच्ची ने जब बयान दिया तो ऐसा लगा कि इस दुनिया में ऐसे भी जाहिल लोग रहते हैं जो इस तरह की घिनौनी हरकतोंं से बाज नहीं आते। बच्ची ने बताया कि,

“कुछ समय पहले उसके मालिक ने उसका हाथ खौलते दूध में डाल दिया था।”  

पुलिस ने इस मामले पर अपनी कानूनी कार्रवाई कर दी है और केस भी दर्ज कर लिया है।

अगर कोई प्लेसमेंट एजेंसी इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे रहा है तो यह कानूनन अपराध है। इस पर सख्त कदम उठाने की ज़रुरत है। ऐसे एजेंसियों के खिलाफ़ ठोस कदम उठाये जाने की जरुरत है ताकि आने वाले समय में ये एजेंसियां इस तरह के कदम उठाने से पहले सौ बार सोचें।

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