बलात्कार और क़त्ल जैसी घटनाएँ जब भी हमें सुनने को मिलती हैं तो हम सबसे पहले बलात्कारी या क़ातिल को ढूंढते है ताकि हम उसे जिम्मेदार ठहरा सकें। समाज में ऐसे गुनाह या इस तरह की घटना से पैदा हुई नकारात्मकता से उबरने के लिए हमारा मन एक बहाना ढूँढता है। जब इस तरह के मामलों में गुनाहगार को सज़ा मिल जाती है तो वही हमारा बहाना होता है। ये एक तरह का Escape साबित होता है।

प्रतीकात्मक तस्वीर / इमेज सोर्स – गूगल

लेकिन आप तब क्या करेंगे जब आपके पास ऐसा कोई Escape ही ना हो?

दिल्ली बॉर्डर के कापसहेड़ा इलाके से एक ऐसी ही घटना सामने आई है, जो हमें सोचने पर मजबूर कर दे रही है कि आखिर हमने अपने समाज की नींव में ऐसी कौन सी गड़बड़ी कर दी है जिसका खामियाज़ा हमें इस तरह से भुगतना पड़ रहा है।

ख़बर है एक 5 साल की मासूम बच्ची के साथ किए गए दुष्कर्म की, और दोषियों की उम्र चौंका देने वाली है।

पुलिस के अनुसार, सोमवार की रात बच्ची अपने घर के पास खेल रही थी, उसी बीच उसके पड़ोस में रहने वाले दो लड़के जिनकी उम्र 10 और 11 साल बताई जा रही है, उसके पास आए और टॉफी के बहाने से बच्ची को एक सूनसान इलाके में ले गए। वहाँ ले जाकर दोनों ने बच्ची के साथ बारी-बारी से रेप किया। जब बच्ची बहुत देर तक अपने घर नहीं लौटी तो उसकी माँ उसे खोजने के लिए पार्क में गई जहां उन्होनें दोनों लड़कों को बच्ची के साथ रेप करते हुए देखा। बच्ची की माँ को देख कर दोनों लड़के भाग खड़े हुए। उसके बाद पुलिस की एक टीम बच्ची को अस्पताल ले गयी और एक दूसरी टीम ने दोनों लड़कों को गिरफ़्तार कर लिया।

अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टर ने रेप कन्फ़र्म किया लेकिन राहत की बात ये है कि बच्ची शारीरिक रूप से स्वस्थ है और उसे घर भेज दिया गया है। पुलिस ने दोनों लड़कों को जुविनाइल करेक्शन होम भेज दिया है और धारा 375D और POCSO एक्ट में मुकदमा भी दर्ज कर लिया गया है।

प्रतीकात्मक तस्वीर / इमेज सोर्स – गूगल

जब ऐसा कोई मामला सामने आता है तो हम ये सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि आखिर किसी 10 या 11 साल के लड़के में ऐसा वहशीपन कैसे आ गया? क्या उनको पूरी तरह से जिम्मेदार ठहराना सही है या और भी कुछ फ़ैक्टर्स हैं जो इसके लिए जिम्मेदार होते हैं।

हमें नहीं मालूम आप इस मामले के बारे में क्या सोचते हैं, मगर हमारा मानना है कि ऐसी घटनाओं के पीछे हमारे समाज का स्ट्रक्चर, हमारे समाज के ट्रेंड्स और हम भी उतने ही जिम्मेदार हैं जितने कि वो लड़के हैं, जिन्होनें ये गुनाह किया है।

अँग्रेजी भाषा में एक टर्म है “Toxic Masculinity”। इसका मतलब है मर्दानगी के वो एहसास जो छोटी उम्र से ही बच्चों के दिमाग़ में हमारा समाज बैठा देता है और उन्हें कई मायनों में औरतों से अलग कर देता है। जैसे, मर्द कभी रोते नहीं, मर्द को दर्द नहीं होता, वगैरह- वगैरह। बचपन में तकरीबन हर लड़के को ये बातें सुनने को मिलती है, हम ये नहीं समझते कि ये छोटी-छोटी बातें जो हम मज़ाक में ही बोल देते हैं वो लड़कों के दिमाग़ पर बहुत गहरा असर छोड़ जाती है, और उनकी भावनाओं के रेंज को छोटा कर देती हैं। ये बातें लड़कों के दिमाग़ में एक ऐसे बबल का रूप ले लेती हैं जो उन्हें एक भावनात्मक बंधन में डाल देता है। साथ ही उनके अंदर ये एहसास छोड़ जाता है कि वो औरत या बाकी जेंडर के मुक़ाबले ज़्यादा सहनशील और ताकतवर है। इसी को हम अँग्रेजी में “Toxic Masculinity” कहते हैं और ये “Alpha male” होने का एहसास एक ज़हर की तरह लड़कों की रग-रग में बस जाता है।

Toxic Masculinity / इमेज सोर्स – गूगल

ये सारी बातें लड़कों को alpha male साबित करने की जद्दो-जहद में डाल देती हैं। वो एक लंबा समय खुद को ताकतवर और डोमिनेटिंग साबित करने में गुज़ार देते हैं। कापसहेड़ा के जिस इलाके की ये घटना है उस इलाके में ज़्यादातर आबादी गरीबी से जूझ रही है। ऐसे इलाकों में ये देखा गया है कि छोटे लड़के दिन का ज्यादातर वक्त अपने से बड़े लड़कों के साथ गुज़ारते हैं, उनकी बातें सुनते हैं और उनके जैसा बनने की कोशिश करते हैं। यहीं बड़े लड़के उन्हें सेक्स और नशे से परिचय करवाते हैं और जिस तरीके से उन्हें इन चीजों के बारे में बताया और समझाया जाता है वो बहुत घटिया तरीका होता है। इन बातों से पैदा हुई जिज्ञासा बहुत जहरीली होती है और कहीं न कहीं यही “toxic masculinity” और गलत बातों से पैदा हुई जिज्ञासा ही कापसहेड़ा जैसी घटनाओं के पीछे का कारण बनती है।

इमेज सोर्स – Michal Huniewicz

इन सब के अलावा हमारे समाज में बना patriarchy(पितृसत्ता) का ढांचा भी कहीं न कहीं ऐसी घटनाओं के पीछे का एक बड़ा कारण बनता है।

जिस Escape की हमने शुरू में बात की वो हमें ऐसे मामलों में नहीं मिल सकता, और मिलना भी नहीं चाहिए। अगर ऐसी घटनाएँ सामने आ रही हैं तो इसका मतलब है कहीं न कहीं हमने ऐसी ग़लतियाँ की हैं जो हम आज तक ठीक नहीं कर पाए हैं

छोटे लड़कों को मर्द बनने के लिए धक्का देना बंद करिए। उनके मासूम कंधों पर अगर आप ऐसे ही मर्दानगी का बोझ डालते रहेंगे तो वो एक दिन उसके तले दब कर अपना विवेक खो देंगे फिर, आप और हम ऐसे ही जुविनाइल करेक्शन होम भरते जाएँगे और एक दिन कोई करेक्शन होम हमारे काम नहीं आ सकेगा।

खुद से सवाल करिए कि आप कहाँ चूक कर रहे हैं?

 

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