‘चाचा हमारे विधायक नहीं, पर हमारे सगे मोटा भाई प्रधानमंत्री हैं’

एक तरफ हमारे प्रधानमंत्री मोदी जिनमें फकीरी है। हर आम और खास इंटरव्यू में जहां इंटरव्यू कर रहे देशभक्त पत्रकार से लेकर, हर किसी को पीएम मोदी में एक शालीनता और फकीरी नज़र आती हैं। वहीं, उनके छोटे भाई के कामों से मालूम पड़ता है कि उन्होंने हमारे पीएम से कुछ खास नहीं सीखा। अगर सीखा होता तो शायद प्रहलाद मोदी ऐसा न करते।

प्रहलाद मोदी को पुलिस ने क्यों मनाया?

असल में बात कुछ यूं हुई कि पीएम मोदी के छोटे भाई बीते मंगलवार को जयपुर होते हुए हरिद्वार जा रहे थे। सुरक्षा के लिहाज़ से पुलिस अधिकारियों ने उन्हें 2 पीएसओ मुहैया करवाने का आदेश दिया। जो कि उनकी निजी गाड़ी में ही उनके साथ जाने वाले थे। कानून भी यही कहता है कि-  ‘सुरक्षा के लिहाज़ से जिन्हें दो सुरक्षाकर्मी दिये जाते है, उन्हें संबंधित व्यक्ति की गाड़ी में ही बैठना होता है।’

लेकिन, मामले में नया मोड़ तब आया जब प्रहलाद मोदी ने अपने दोनों सुरक्षाकर्मियों को अपनी गाड़ी में बिठाने से इंकार कर दिया। मोदी की मांग थी कि उन्हें इन सुरक्षाकर्मियों के लिए पुलिस की ओर से एक एस्कॉर्ट गाड़ी दिलवाई जाए। लेकिन पुलिस अधिकारियों ने इसके लिए मना कर दिया। फिर क्या था वो कहते है न, ‘चाचा हमारे विधायक है’(ज़ाकिर भाई को साभार पहुंचे)

लेकिन यहां तो ‘हमारे मोटा भाई (गुजराती में बड़े भइय्या को कहते हैं) प्रधानमंत्री है’ वाला मामला था। प्रहलाद मोदी नाराज़ हो गए। अपने वाहन के साथ एस्कॉर्ट भेजने की मांग को लेकर वह, जयपुर-अजमेर हाइवे पर बगरू थाने के बाहर धरने पर बैठ गए।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के छोटे भाई प्रह्लाद मोदी, यही धरने पर बैठे थे. फोटो सोर्स: गूगल

फिर पुलिस ने प्रहलाद मोदी को काफी मनाया, बहुत समझाया कि यही नियम है, यही कानून है, उन्हें ऑर्डर की कॉपी भी दिखाई गई, फिर उनकी बात आला-अफसरों से कराई गई। तब जाकर लगभग कई घंटों की मशक्कत के बाद वो माने और धरने से उठे।

इस पूरी घटना पर जयपुर के पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव ने बताया कि,

“प्रहलाद मोदी सड़क मार्ग से जयपुर आ रहे थे। वे एस्कॉर्ट गाड़ी की मांग कर रहे थे जिसके लिए वह पात्र नहीं हैं। हमारे पास उनको दो पीएसओ उपलब्ध कराने के आदेश थे जो पहले से ही बगरू थाने में मौजूद थे ताकि उनके साथ आगे जा सकें, लेकिन मोदी उन्हें अपने वाहन में ले जाने को तैयार नहीं थे और अलग पुलिस वाहन की मांग कर रहे थे”

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आनंद श्रीवास्तव (जयपुर पुलिस आयुक्त), फोटो सोर्स: गूगल

श्रीवास्तव अपनी बात को पूरा करते हुए आगे कहते है कि,

“हमने उन्हें दो पीएसओ देने संबंधी आदेश भी दिखाया। पीएसओ उनके साथ उनके वाहन में ही जा सकते थे लेकिन प्रहलाद मोदी इसके लिए तैयार नहीं थे। हालांकि बाद में प्रहलाद मोदी बात को समझ गए और नियमों के तहत उन्हें दो पीएसओ उपलब्ध करवाए गए”

ये भी जान लीजिए –

ज़्यादातर अखबारों के मुताबिक यह मनोरंजन एक घंटे मे सुलझ गया। लेकिन एक अखबार में (अखबार का नाम नहीं लेंगे) की माने तो यह मनोरंजन एक नहीं बल्कि पूरे 4 घंटे तक जारी रहा। हाई प्रोफाइल मामला होने की वज़ह से जब मामले ने तूल पकड़ा तो, अफसरों के आदेश पर प्रहलाद मोदी को आखिरकार एस्कॉर्ट गाड़ी मुहैय्या कराई गई। फिर रात के करीब 9 बजे मोदी सुरक्षाकर्मियों के साथ हरिद्वार को रवाना हो गए।

ख़ैर, मामला एक घंटे में सुलझा हो या 4 घंटों में लेकिन इस पूरी कहानी से यह सीख मिली कि ‘चाचा हमारे विधायक है’ के डायलॉग में सच में काफी पावर है, यह लाइन यूं ही नहीं बोली जाती।

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