वैसे तो कालाधन का बोल बाला तब से है, जब से टैक्स चोरी करने वाले अपनी कमाई को टैक्स न देने की वजह से छुपा लेते हैं। यह रोग सिर्फ भारत का ही नहीं है, बल्कि दुनिया के ज़्यादातर मुल्कों का है। बस भारत दूसरे मुल्कों के मुक़ाबले ऐसे लोगों के ख़िलाफ थोड़ा कम सख़्ती बरतता है। लेकिन बीजेपी और मोदी ने जिस तरह से 2014 के चुनाव में कालाधन और स्वीस बैंक को भुनाया। साल 2014 में मोदी ने कालाधन वापस लाने के लिए जो वादें किए थे उस आधार पर जनता ने मोदी को अपना प्रधानमंत्री तो चुन लिया लेकिन, पीएम मोदी अपने इस वादे को पूरा करने में कहीं न कहीं फेल होते दिखाई दिए।

आम जनता ने इस उम्मीद के साथ पीएम मोदी को दोबारा सरकार में लाई कि पहली पारी में किए वादों को शायद दूसरी पारी में पूरा करेंगे। लेकिन हुआ कुछ और ही। काला धन तो नहीं आया लेकिन 30 सितंबर तक सभी भारतीयों के खातों की डीटेल ज़रूर आ जाएगी।

अब क्या हुआ है?

जिन भारतीयों की स्वीस बैंक में खाता हैं उनका डिटेल जानने के लिए ऑटोमेटिक एक्सचेंज ऑफ इंफोर्मेशन(AEOI) समझौते के तहत सारी प्रक्रियाएँ पूरी कर ली गई है। यह समझौता साल 2018 के जनवरी महीने में किया गया था। यह समझौता स्विट्जरलैंड और भारत सरकार के बीच हुआ था। जिसमें 30 सितंबर तक सभी भारतीयों के खाते की जानकारी आपस में साझा करने की बात कही गई थी।

इसी समझौते के तहत अब स्विट्जरलैंड की संसद ने भी अपनी संसदीय प्रक्रिया पूरी कर ली है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, स्विस वित्त मंत्रालय और स्विस फेडरल टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन (ESTV) के अधिकारियों का कहना है कि,

“हो सकता है कि स्विट्जरलैंड में सभी भारतीयों के बैंक खातों की जानकारी को भारतीय टैक्स अधिकारियों को देनी पड़ जाए”

साथ ही स्विट्जरलैंड के फेडरल टैक्स ऑफिस ने ये भी बताया कि,

‘भारत के मामले में मुमकिन है कि सूचनाओं को कई मुश्त में भेजना पड़ जाए’

स्विट्जरलैंड के फेडरल टैक्स ऑफिस द्वारा ये कहना है कि सूचना एक बार में नहीं कई बार में भेजनी पड़ेंगी। इससे ये तो साफ हो जाता है कि सभी भारतीयों के खातों से जुड़ी कितनी ज़्यादा जानकारियाँ स्विस बैंक के पास है और ये सभी जानकारियाँ भारतीय टैक्स ऑफिसर को देनी पड़ेंगी।

Image result for स्विस वित्त मंत्रालय और स्विस फेडरल टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन
प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स- गूगल

जिस पर फॉरेन टेक्सेशन एंड टैक्स रिसर्च (एफटी एंड टीआर) के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि,

‘जानकारी साझा करने के बाद स्विस खाता विवरण की तुलना खाताधारकों के टैक्स रिटर्न से की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई होगी’

साथ ही स्विस एजेंसियों के अनुसार, भारत उन 73 देशों में से एक है, जिनके साथ इस साल बैंक खातों की जानकारी साझा की जा रही है। वहीं पिछले साल की बात करे तो यह एईओआई समझौता कुल 36 देशों के साथ लागू किया गया था। वहीं ध्यान देने वाली बात ये है कि फिलहाल स्विस बैंक में धन जमा करने वाले देशों की सूची में भारत 74वें स्थान पर है। जबकि ब्रिटेन पहले नंबर पर मौजूद है। और यह छलांग भी भारत में पिछले साल ही लगाई है। क्योंकि इससे पहले भारतीयों का नंबर 88 था।

Image result for स्विस नेशनल बैंक
प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स- गूगल

जबकि स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी) के द्वारा जारी वार्षिक बैंकिंग आंकड़ों के विश्लेषण के हिसाब से जब बात भारतीय नागरिकों द्वारा स्विस बैंकों में जमा कुल धन की जमा राशि की बात आती है। तो इस सूची में भारत बहुत ज़्यादा पीछे नजर आता है। क्योंकि स्विस बैंकों में विदेशियों द्वारा जमा धन का सिर्फ 0.07 फीसदी धन भारतीयों का है।

आख़िर में…

आपको मालूम ही होगा कि स्विस सरकार ने विदेशों बैंकों में कालाधन रखने वाले 50 भारतीय कारोबारियों के नाम उजागर कर दिए थे। साथ ही स्विस अधिकारियों ने इन खाताधारकों को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस भी भेजा दिया था। जिसका जवाब तो हमें नहीं पता लेकिन इन खाताधारकों में सबसे ज़्यादा कोलकाता, मुंबई, गुजरात और बेंगलुरु के हैं। वहीं पिछले एक साल में 100 से ज़्यादा भारतीय खाताधारकों के नाम सामने आ चुके हैं।

Image result for स्विट्जरलैंड सरकार के फेडरल गजट
प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स-गूगल

स्विट्जरलैंड सरकार के फेडरल गजट(सरकारी कागज़) के इन नामों में कुछ नाम ये हैं

कृष्ण भगवान रामचंद्र, पोतलुरी राजामोहन राव, कल्पेश हर्षद, कुलदीप धींगड़ा, भास्करन नलिनि, ललिताबेन चिमनभाई, संजय डालमिया, पंकज कुमार साराओगी, अनिल भारद्वाज, थरानी रेनू टीकमदास, महेश टीकमदास थरानी, सवानी विजय कन्हैयालाल, भास्करन थरूर, कल्पेश भाई पटेल, अजय कुमार, दिनेश कुमार, रतन सिंह चौधरी और कठोतिया राकेश कुमार के नाम शामिल हैं।

आख़िर में यही कहा जा सकता है और साथ ही भारतीय सरकार से भी ये उम्मीद है कि जितनी जल्द से जल्द ये नाम सरकार के पास आ जाते हैं। सरकार उन्हें जारी करे और सभी पर सख्त से सख्त कार्यवाई करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here