देश में चुनाव करवाने की ज़िम्मेदारी चुनाव आयोग की होती है. इसके लिए चुनाव आयोग की कुछ गाइडलाइंस  होती हैं जिनका नेताओं और पार्टियों को पालन करना होता है।

चुनाव आयोग की कुछ सामान्य गाइडलाइंस –

  1. राजनीतिक पार्टियों को अपने प्रतिद्वंदी पार्टियों की उनके पिछले रिकॉर्ड के आधार पर ही आलोचना करनी होगी।
  2. वोटरों को लुभाने के लिए जाति और सांप्रदायिक लाभ उठाने से बचना होगा।
  3. झूठी जानकारी के आधार पर उम्मीदवारों की आलोचना नहीं करनी होगी।
  4. वोटरों को किसी तरह का रिश्वत नहीं देना होगा।
  5. प्रदर्शन और अनशन भी प्रतिबंधित होंगे।
  6. सेना के नाम पर वोट नहीं मांग सकते।

इस गाइडलाइन में चुनाव से जुड़े ऐसे कई नियम होते हैं, जिनका चुनाव लड़ने वाली हर पार्टी को पालन करना होता है. अगर कोई इन नियमों का उल्लंघन करता है तो चुनाव आयोग उस पर कार्यवाई करता है।

2019 के लोकसभा चुनावों में शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर कोई बात नहीं कर रहा. कोई जाति के आधार पर वोट मांग रहा है तो कोई धर्म के आधार पर. इस बार वोट मांगने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे अलग तरीका अपनाया. महाराष्ट्र के लातूर में एक रैली में बोलते हुए पीएम मोदी ने पहली बार वोट डालने जा रहे वोटर्स से बालाकोट एयर स्ट्राइक और पुलवामा में शहीद जवानों के लिए अपना वोट समर्पित करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा-

‘मैं पहली बार वोट देने जा रहे लोगों से पूछता हूं, क्या आपका वोट उन सैनिकों को समर्पित हो सकता है जिन्होंने पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक की थी? क्या आपका पहला वोट उन्हें समर्पित हो सकता है जो पुलवामा हमले में शहीद हो गए?’

पीएम मोदी की इस अपील को बीजेपी के ऑफिसियल अकाउंट से ट्वीट किया गया. ट्विटर यूजर्स को ये सब चुनावी हथकंडा लगा।

एडवोकेट और एक्टिविस्ट प्रशांत भाषण ने ट्विटर कर मोदी पर जमकर हमला किया और पुलवामा हमले पर मोदी से जवाब मांगा. प्रशांत भूषण ने लिखा-

“इंटेलिजेंस में खामी के चलते हुए 40 सीआरपीएफ जवानों की शहादत का जिम्मेदार कौन है? ‘बालाकोट के बारे में क्या, जो टारगेट हिट नहीं हुए, जो हमारे MIG को गिरा दिया गया, पायलट को पकड़ लिया गया?”

मोदी की इस अपील के जवाब में महिला कांग्रेस के ऑफिसियल अकाउंट से ट्वीट किया गया जिसमे उन्होंने लिखा कि-

“18 साल के युवाओं, अपना पहला वोट पुलवामा के शहीदों के नाम दो, जिस सरकार की लापरवाही की वजह से वो शहीद हुए, उनको दोबारा सत्ता में ना आने देना।”

चुनाव आयोग को बताया ‘मोदी की सेना’

मोदी के इस बयान पर चुनाव आयोग का कोई कार्यवाई न करना भी कई लोगों को अखरा. ट्विटर पर एक यूजर ने चुनाव आयोग को ‘मोदी जी की सेना’ तक बोल दिया।

आपको याद होगा चुनाव आयोग ये बात पहले ही बोल चुका है कि चुनाव प्रचार में सेना या सैनिकों का किसी तरह इस्तेमाल न हो. आयोग ने कहा था कि तस्वीरों, दूसरे प्रचार सामग्रियों या भाषणों में किसी भी रूप में सेना या सैनिकों का प्रयोग न किया जाए. आयोग का मानना है कि सेना का राजनीतिक इस्तेमाल न हो.  लेकिन लातूर के भाषण में मोदी ने इस आदेश की धज्जियां उड़ा दी. उन्होंने सेना का इस्तेमाल तो किया ही है, शहीदों के नाम पर वोट माँगा है।

फर्स्ट टाइम वोटर्स से मोदी की इस अपील के मायने

2019 लोकसभा चुनाव में 90 करोड़ मतदाता हैं, और जो फर्स्ट टाइम वोटर्स हैं उनकी संख्या 1.5 करोड़ है. इन 1.5 करोड़ फर्स्ट टाइम वोटर्स को सब राजनीतिक दल लुभाना चाहते हैं. हर किसी की नजर इन वोटर्स पर है।

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