14 मार्च को मुंबई में एक दर्दनाक हादसा हुआ. मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस के पास वाले फुटओवर ब्रिज का एक बड़ा हिस्सा गुरूवार को ढ़ह गया. इस हादसे में 6 लोगों की मौत हो गई और 31 लोगों के घायल होने की खबर है.

इस घटना के बाद वहां हड़कंप मच गया. पुलिस की तैनाती रही, घायलों को अस्पताल ले जाया गया. हादसे के दौरान गिरा मलबा हटा-हटा कर लोगों बाहर निकाला गया. मुंबई में 2008 में जो आंतकी हमला हुआ था उसमें आंतकवादी कसाब ने इसी ब्रिज का इस्तेमाल किया था, इसलिए इसे ‘कसाब ब्रिज’ भी कहा जाता है.

खबरों के मुताबिक इस ब्रिज का ऑडिट छह महीने पहले ही किया गया था जिसकी रिपोर्ट्स में इसे नॉर्मल बताया गया था. उसके बाद भी ऐसे हादसे का होना बड़े सवाल खड़े करता है.

बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के आयुक्त अजॉय महता ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मैंने ब्रिज से जुड़े दस्तावेज़ों को अपनी कस्टडी में मांगा है, उनकी जांच करने के बाद आगे की कार्रवाही की जाएगी, लापारवाही पाए जाने पर लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाही होगी.

 


मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पर कहा है कि इस ब्रिज की जांच की गई थी और जांच में इसे सही पाया गया था. इसके बाद भी ऐसा हादसा हुआ. अब फिर से जांच की जाएगी और दोषियों पर कड़ी कार्यवाई होगी. इस हादसे में मरने वाले लोगों के लिए मुख्यमंत्री ने 5 लाख और घायलों को 50 हज़ार देने का ऐलान किया है. घायलों का मुफ्त इलाज करने के भी निर्देश दिए गए हैं.

2019 में ही बीएमसी ने 50 से अधिक ब्रिजों, फ्लाईऑवर, स्काईवॉक, फुटओवर ब्रिज की मरम्मत के लिए 65 करोड़ रूपए खर्च किए थे. जो ब्रिज ढ़हा है उसे स्ट्रक्चरल ऑडिट में फिट बताया गया था.

पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे

मुंबई में ये कोई पहली घटना नही है जिसमें ब्रिज गिरा है. मुंबई में बहुत लोग रहते हैं. वहां लोगों की संख्या ज़्यादा है और इमारतें पुरानी. इमारतों की जांच होती है और जांच में पास होने के बाद भी ऐसे हादसे हो जाते हैं. 3 जुलाई 2018 को भी मुंबई के अंधेरी में फुटओवर ब्रिज गिरा था जिसके गिरने से किसकी मौत नहीं हुई लेकिन 6 लोग घायल हुए थे, इस घटना से भी सरकार ने सबक नहीं लिया. पिछले 18 महीनों में यह तीसरा ऐसा हादसा है। एल्फिंस्टन फूटओवर ब्रिज के गिरने के बाद लोगों के अंदर गुस्सा भड़का था। लोगों के गुस्से को देखते हुए रेलवे बोर्ड ने 50 साल पुराने सभी फुट ओवर ब्रिज बदलने का निर्णय लिया था, लेकिन सालभर नहीं हुआ कि देश की आर्थिक राजधानी को एक और हादसा देखना पड़ा.

मुआवज़ा दे देने से समस्या हल नहीं हो जाती है. जांच बैठाई जाएगी और वो बैठी ही रहेगी. मामला भ्रष्टाचार का है, लापरवाही का है. इस खोखले होती जा रही व्यवस्था ने इतने लोगों की जान ले ली. सरकार बस जांच के आदेश देती रहेगी?

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