निर्देशक: सार्थक दासगुप्ता

कास्ट: मानव कौल, अमृता बागची, नीना गुप्ता, दिव्या दत्ता, निहारिका

कभी-कभी जीवन में कुछ बड़ा पाने की वजह और बड़े ख्वाबों का पीछा करते-करते हम छोटी-छोटी खुशियों को भूल जाते हैं. हम ये भी भूल जाते हैं कि जो भी हमारे पास है वो बहुत खूबसूरत है.

आजकल की इस दौड़ती भागती लाइफ में जिसके पास बहुत कुछ है वो भी खुश नहीं है और जिसके पास कुछ नहीं है उसका तो दुखी होना बनाता है. मंजिल पाने के चक्कर में हम सब इतने अंधे हो चुके हैं कि रिश्तों के लिए किसी के पास वक्त ही नहीं है. हम सब बिना फिनिशिंग लाइन वाली दौड़ में भाग रहे हैं बस.

हर इंसान अपनी लाइफ में किसी ना किसी चीज से जूझ रहा है. अपने हिसाब से अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहा है. किसी को सफलता खुद अपने से मिल जाती है तो कोई सफलता के लिए किसी का सहारा लेता है.

अब बात करते हैं इस फिल्म की, मानव कौल, दिव्या दत्ता और नीना गुप्ता द्वारा अभिनीत ‘म्यूजिक टीचर’ में भी इंसान की रोजमर्रा की लड़ाई को दिखाया गया है. फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे हमारे दुख कहीं ना कहीं हमारी आकांक्षाओं से जुड़े होते हैं.

फिल्म के शुरुआत में आपको एक आदमी दिखेगा जो पहाड़ की एक सुंदर सी घाटी की ओर पीठ करके बैठा है. वो सिगरेट जलाता है और फिर उसे फेंक भी देता है. ऐसा लगता है खुद के अतीत की यादों में कहीं खोया हुआ है. जहां कभी घुंघराले बालों वाली एक लड़की हुआ करती थी जिसको उसने संगीत सिखाया था. वो लड़की अपने संगीत टीचर के साथ सुंदर सी पहाड़ियों पर रहना चाहती है लेकिन उसका टीचर उसको मुंबई भेजना चाहता है.

आपके और हमारे जो कुछ रोजाना की जिंदगी में होता है इस फिल्म में बड़ी खूबसूरती से दिखाया गया है. इस फिल्म में मानव कौल, बेनी माधव सिंह नाम के गायक के रूप में दिखेंगे. जो मुंबई जाकर अपने सपनों को सच करना चाहता है, मगर किसी मजबूरी के कारण वो जा नहीं पाता और फिर शिमला में ही म्यूजिक क्लासेज देता है. इसी कड़ी में उसकी मुलाक़ात ज्योत्सना से होती है जो आगे चलकर उसकी स्टूडेंट और प्रेमिका भी बनती है.

इस फिल्म में दो लोगों के प्यार को बहुत ही अच्छे ढंग से दिखाया गया है. प्यार की मासूमियत और मजबूरी दोनों को शानदार तरीके से दिखाया गया है कि किरदारों के बिना कुछ बोले और बिना किसी अंतरंग दृश्यों के ही आपको यकीन हो जाता है कि दोनों एक दूसरे से प्यार करते हैं.

एक्टिंग की बात करें तो सभी कलाकारों ने दमदार एक्टिंग की है. परन्तु मानव भैया तो बिलकुल गर्दा ही कर दिये. जिस तरह से उन्होंने अपने किरदार के छोटे-छोटे भावों में जान भरी है, वह काबिल-ए-तारीफ़ है. इस फिल्म में आप देखेंगे कैसे मानव भैया एक ही सीन में कई भाव एक साथ बदलते है. इस फिल्म का संगीत तो भैया एक दम कातिल है. मैं ज्यादा क्या बोलू यार आप खुद ही देख लो ना.

बाकी आप तो चाहते होंगे कि आपको हम यहीं पूरी फिल्म की कहानी बता दें. तो यार ऐसा नहीं हो सकता. इसके लिए आपको नेटफ़लिक्स पर जाना होगा और वहीं इस फिल्म को देखना होगा और दूसरा आइडिया ये है कि दोस्त का नेटफ़लिक्स आईडी और पासवर्ड ले लो और मौज लूटो. बाकी ऐसा है अभी के लिए हमको दो इजाजत. मिलते हैं फिर जल्दी. तब तक ये गाना सुनो.

 

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