सावधान.. चुनावी मौसम आ गया है। ऐसे में गौ भक्त, राम भक्त और मोदी भक्त सारे लोग एक्टिव हो गए हैं। अपनी संवैधानिक आज़ादी के तहत भक्तों को हाथ-पैर सीधा करने की खुली छूट दी गई है। इस दौरान आप बस इतना करें कि अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को घर के ताख पर रख दें। ध्यान रहे, यह बस एक सुझाव है कोई सरकारी आदेश नहीं है। ऐसे समय में आप देश में जहां कहीं भी हैं, आप जैसे भी हैं, स्वयं व अपने सामानों की सुरक्षा को लेकर सावधान रहें। सावधानी हटते ही दुर्घटना घट सकती है।

दरअसल, आज-कल राजनीतिक बहस के दौरान मारपीट की बात आम हो गई है। ऐसे में बेहतर है कि ट्रेनों व बसों में यात्रा करने के दौरान आप राजनीतिक बहस से बचें।

चुनाव नज़दीक आते ही उत्तर प्रदेश के लोगों का मिजाज़ गर्म हो गया है। इसी गर्मी का असर है कि सांसद महोदय से सवाल पूछते ही विधायक जी की धुनाई हो गई। यही नहीं उन्नाव में विधायक जी के समर्थकों ने मुंह खोलते ही समाज कल्याण पदाधिकारी को पीट दिया।

अब, मुज़फ्फरनगर से एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में जहां भाजपा के कथित समर्थकों ने न्यूज़ चैनल के एक प्रोग्राम के दौरान सवाल पूछने पर एक लड़के को पीट दिया। अदनान की गलती यह थी कि उसने मोदी सरकार को रोज़गार के मामले में फेल बताया था। रोज़गार की बात करते ही लड़के को मोदी भक्तों ने घेर लिया और नारा लगाते हुए, उसे आतंकवादी बताना शुरू कर दिया। लड़का इससे पहले की कुछ बोल पाता वहां जमा भीड़ ने उसे पीट दिया।

आपने ऊपर जो पढ़ी वो ख़बर है। एक ऐसी ख़बर जहां एक इंसान को कई इंसान पीट रहे हैं। इंसान जैसे ही संविधान से मिले अधिकारों के तहत अपने हक में रोज़गार की बात करता है, लोग देशद्रोही कहकर पीटने लगते हैं। मोदी सरकार के खिलाफ़ सवाल पूछने वाले देशद्रोही कैसे हो जाते हैं? यह कैसी राजनीतिक संस्कृति पैदा करने की कोशिश की जा रही है, जिसमें मोदी मतलब भारत हो जाता है।

भाजपा के नेता और कार्यकर्ताओं में इतनी हिम्मत कहां से आ गई कि सरकार के खिलाफ़ बोलते ही वो पीटने लगते हैं। क्या अब हमारे आसपास के लोगों में अब इतनी भी सहनशीलता नहीं बची है कि वो अपनी आलोचना को सुन सके और समझ सके? देश की राजनीति में जब यह गिरावट देखने को मिल रही है, तब मुझे लगता है कि जनता को सजग रहने की जरूरत है। आप किसी भी पार्टी के नेता या कार्यकर्ता हों पर देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी की यह कविता आपको पढ़ना चाहिए –

कौरव कौन कौन पांडव, टेढ़ा सवाल है,

दोनों ओर शकुनि का फैला कूटजाल है।

धर्मराज ने छोड़ी नहीं जुए की लत है,

हर पंचायत में पंचाली अपमानित है।

बिना कृष्ण के आज महाभारत होना है,

कोई राजा बने रंक को तो रोना है।

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