लोकसभा चुनाव के नियमों को लेकर चुनाव आयोग के रुख़ दिन प्रति दिन कड़े होते जा रहे है। इस बार चुनाव आयोग ने बीजेपी द्वारा लॉंच किए गए नमो टीवी को निशाने पर लिया है। चुनाव आयोग ने बीजेपी द्वारा बनाए नमो टीवी पर आरोप लगाते हुए कहा है कि यह कोई टीवी चैनल नहीं बल्कि बीजेपी द्वारा चुनाव प्रचार करने का जरिया है इसलिए अगर आचार संहिता लागू होने के बाद इसपर किसी तरह का विज्ञापन दिखाया जाता है तो यह आचार संहिता का उलंघन है। इसलिए बीजेपी को इसपर जवाब देने की ज़रुरत है।

फोटो सोर्स: गूगल

चुनाव आयोग ने Namo tv पर होने वाले प्रचार का खर्च भाजपा के खाते में जोड़ने का फैसला किया है। एक चुनाव में किसी भी राजनीतिक पार्टी के खर्च की सीमा तय होती है लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं है. इसलिए चुनाव आयोग ने एक पत्र लिखकर इस बारे दिल्ली के मुख्य चयन अधिकारी को निर्देश दिया है कि मीडिया प्रमाणन और निगरानी आयोग यह जांच करे कि NaMo TV पर प्रसारित कंटेंट का अधिकार पहले से लिया गया था या नहीं। साथ हीं साथ इस बात की भी जांच की जाए कि NaMo TV ने किसी तरह से आचार संहिता का उल्लंघन किया है या नहीं।

NaMo TV पर विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। चुनावी माहौल में बीजेपी ने इसे चुनाव प्रचार के लिए शुरु किया था लेकिन चुनाव में ही यह बीजेपी के लिए मुसिबत बनकर सामने आ गयी है।

क्या है पूरा मामला?

लोकसभा चुनाव को लेकर सभी जगह काफी गरम माहौल है। सात चरणों में होने वाले लोकसभा चुनाव का पहला चरण कल यानि 11 अप्रैल को होगा जिसके लिए आदर्श आचार संहिता लागू हो चुका है। यानि जिन क्षेत्रों में पहले चरण में चुनाव होना है वहां मंगलवार शाम पांच बजे के बाद चुनावी शोरगूल होना बन्द हो गया है। लेकिन चुनाव आयोग ने यह दावा किया है कि आदर्श आचार संहिता लगने के बाद जिन क्षेत्रों में पहले चरण में चुनाव होना है वहां NaMo TV पर बार-बार प्रधानमंत्री के भाषण दिखाए जा रहे है। दावा करने के बाद चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि NaMo TV कोई टीवी चैनल नहीं है बल्कि यह बीजेपी का चुनाव प्रचार करने का एकमात्र जरिया है। इसलिए इस बात पर मुख्य चयन अधिकारी को पत्र लिखकर जांच करने की बात कही गई है।

खर्च पर उठाए गए सवाल पर बीजेपी ने स्पष्टिकरण दे दी है. बीजेपी के अनुसार खर्च के बारे में उन्होंने बता दिया है। यह पहली बार नहीं है जब NaMo TV पर सवाल उठाए गए हो। इसके पहले भी 31 मार्च को NaMo TV देश की कुछ DTH सर्विस पर लॉन्च हुआ था, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण, भारतीय जनता पार्टी का चुनावी प्रचार, मोदी सरकार की योजनाओं का बखान किया जा रहा था। इसको लेकर कांग्रेस और कई विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी। जिसपर चुनाव आयोग की तरफ से जवाब मांगा गया था। तब सूचना प्रसारण मंत्रालय ने कहा था कि यह कोई चैनल नहीं है इसलिए इसे किसी तरह की परमिशन की जरूरत नहीं है।

दूरदर्शन पर भी सख्ती

ऐसा नहीं है कि NaMo TV ही चुनाव आय़ोग के सवालों के घेरे में खड़ा हो। चुनाव आयोग की सख्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने दूरदर्शन पर भी सवाल उठा दिया है। दूरदर्शन पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग ने आरोप लगाया था कि विभिन्न राजनीतिक दलों को दिए गए एयरटाइम कवरेज में समानता नहीं है। इस बारे में स्पष्टिकरण की मांग की गई थी। दरअसल, कांग्रेस पार्टी ने चुनाव आयोग से शिकायत करते हुए कहा था कि 31 मार्च को प्रधानमंत्री के कार्यक्रम “मैं भी चौकीदार हूँ” को दूरदर्शन ने 84 मिनट तक लाइव कवरेज़ दी थी।  इसे भी पार्टी के एयरटाइम में ही जोड़ा था। इसके एवज में या तो बाकी दलों को भी दूरदर्शन अतिरिक्त वक्त दे या फिर बीजेपी के वक्त में कटौती करें।

इस तरह से एक बार फिर NaMo TV को लेकर बाते होनी शुरु हो गई है। अब देखना यह है कि इस बात पर बीजेपी की क्या प्रतिक्रिया आती है। मुख्य चयन अधिकारी ने भी इस पर कोई स्पष्टिकरण देने से इंकार कर दिया है। उनका कहना है कि इस मामले की जांच करने के बाद हीं किसी तरह का फैसला लिया जाएगा।

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