महाराष्ट्र की पॉलिटिक्स से अगर आपका थोड़ा सा भी राब्ता रहा है या फिर इसकी नॉलेज हो तो, एक परिवार का नाम आप जरूर सुनते होंगे। ठाकरे परिवार। ठाकरे परिवार के दो भाई अब अलग-अलग पार्टी चलाते हैं। राज ठाकरे महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और उनके चचेरे भाई उद्धव ठाकरे शिव सेना। दोनों ही पार्टी का अस्तित्व टिका है मराठी अस्मिता के ऊपर।

ठाकरे परिवार का हमेशा से ये मानना रहा है कि बाहरी लोग महाराष्ट्र आकर मराठी लोगों की नौकरियाँ और रोजगार छीन रहे हैं। यही वजह है कि एक समय ठाकरे परिवार ने अपनी छवि चमकाने के लिए यूपी और बिहार के लोगों को महाराष्ट्र में निशाना बनाना शुरू कर दिया था। पर, अब कुछ ऐसा पता चला है कि इन दोनों भाइयों को अपनी इस राजनीति पर शर्म आएगी।

उद्धव और राज ठाकरे। फोटो सोर्स: गूगल
उद्धव और राज ठाकरे, फोटो सोर्स: गूगल

दरअसल एक किताब आई है। नाम है- The Cousins Thackeray: Uddhav, Raj and the Shadow of their Senas. किताब के प्रकाशक हैं पेंगुइन रैंडम हाउस। किताब लिखी है धवल कुलकर्णी ने। धवल पेशे से पत्रकार हैं। इस किताब में कहा गया है कि यूपी-बिहार के लोगों का विरोध करने वाला ठाकरे परिवार खुद बिहार से वास्ता रखता है।

The Cousins Thackeray: Uddhav, Raj and the Shadow of their Senas किताब। फोटो सोर्स: गूगल
The Cousins Thackeray: Uddhav, Raj and the Shadow of their Senas किताब। फोटो सोर्स: गूगल

इस किताब में केशव सीताराम ठाकरे की किताब का हवाला दिया गया है। केशव सीताराम ठाकरे, बाला साहब ठाकरे के पिता। उद्धव और राज ठाकरे के दादाजी। केशव ठाकरे ने एक किताब लिखी थी। नाम था- ग्राम्यांचा सद्यानता इतिहास अरहत नोकरशाहिचे बन्दे। इस किताब में केशव ठाकरे लिखते हैं कि उनका परिवार चंद्रसेनीय कायस्थ प्रभु समुदाय से ताल्लुक रखता है। अब ऐसा है कि चंद्रसेनीय कायस्थ प्रभु समुदाय मूलतः मगध से वास्ता रखते हैं और मगध आता है बिहार के अंदर। यानि के ठाकरे परिवार मूलतः बिहार से वास्ता रखता है।

किताब के अनुसार ठाकरे परिवार तीसरी और चौथी सदी तक बिहार में रहता था। बाद में युद्ध या फिर अन्य कामों की तलाश में ये परिवार बिहार से बाहर आकर महाराष्ट्र में बस गया।

अब इस बात का पता दोनों ठाकरे भाइयों को है या नहीं, इसका पता हमें भी नहीं है। लेकिन, अगर अब जब उन्हें इस बात का पता चलेगा तो वो क्या करेंगे, ये सोच कर हमें उन पर दया आ रही है। अगर बिहार और यूपी के लोगों को लेकर उनका यही रवैय्या आगे भी चलने वाला है तो शायद ठाकरे बंधु ऐसा कुछ करने से पहले गैंग्स ऑफ वासेपुर के पीयूष मिश्रा की तरह ही खुद की पीठ पर कोड़े बरसाएँगे। काहे कि बिहारी तो अब वो भी है।

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