प्रधानमंत्री कार्यालय से जब चौकीदार मोदी जी के विदेश यात्राओं का हिसाब मांगा गया तब उनका कहना था कि वह इन खर्चों का हिसाब नहीं रखते. कितना खाये कितना उड़ाए किसी चीज़ का हिसाब नही है. कम से कम कितने की मोदी जी ने शॉपिंग की उसका हिसाब तो रखना ही चाहिए था. फकीरों के पास तो पाई-पाई का हिसाब होता है तो फिर हमारे ‘डिजिटल फकीर’ के पास ये डेटा सेव क्यों नही है? .

इन्होनें पहले भी कहा है कि वो फकीर आदमी हैं झोला लेकर चल पड़ेंगे. लगता है शायद वही झोला लेकर मोदी जी चल पड़े हैं पर अभी ये नहीं पता कि विदेश दौरे पर भरा हुआ झोला लेकर गए थे कि झोला भरने गए थे. इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता अनिल गलगलि ने आरटीआई दायर की थी. इसके जवाब में प्रवीण कुमार जो प्रधानमंत्री कार्यालय में सेक्रेटरी हैं उन्होनें बताया कि डोमेस्टिक विजिट किसी ऑफिस के अंदर नहीं आता जो इसका लेखा-जोखा रखे क्योंकि इस तरह की यात्रा का प्रबंध दूसरे-दूसरे संगठन कराते रहते हैं.

प्रवीन कुमार फोटो सोर्स गूगल

तो अगर कल को हम फ्लाइट का टिकट और रहने का प्रबंध करा देंगे तो मोदी जी हमारे भी शहर चले आएंगे चाहे वह फ्लाइट की बूकिंग काला धन से ही क्यों नहीं कराया हो. इसके साथ में कुमार ने यह भी कहा कि चुनाव प्रचार में किया गया दौरा आधिकारिक नही है और प्रधानमंत्री कार्यालय इसका खर्च नहीं उठता है. इसका मतलब जांच इसमें भी होना चाहिए कि प्रधानमंत्री ने जो दौरे किए हैं उनमें से कितने आधिकारिक थे और कितने आधिकारिक नहीं थे पर उन्हे आधिकारिक बताकर पैसे लिए गए हैं.

जब प्रवीण जी से विदेशी दौरे का विवरण मांगा गया तो उन्होने सलाह दी कि विवरण जानने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय के वेबसाइट पर जाइये. हमने भी सोचा कि एक बार प्रधानमंत्री कार्यालय के वेबसाइट से होकर आया जाये. एक अजीब  चीज़ हमे देखने को मिली. जब आप प्रधानमंत्री कार्यालय के साइट पर जाएँगे तो वहाँ आपको ऑप्शन मिलेगा ‘पीएम विजिट’का जिसपर आप क्लिक करेंगे तो दो ऑप्शन खुलेंगे ‘इंटरनेशनल विजिट’ और ‘डोमेस्टिक विजिट’.

पीएमओ की साइट

जब डोमेस्टिक विजिट खुद के पैसों से की जाती है तब क्यों इसको पीएमओ के साइट पर रखा गया है?  दूसरी बात साइट पर बस इंटरनेशनल विजिट का ऑप्शन है. वहाँ क्लिक करने पर आपको कोई भी जानकारी नहीं मिलेगी.

 

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