अक्सर देखा गया है कि धर्म से जुड़े मामले कितनी तेजी से भयानक रूप धारण कर लेते हैं. कभी ये लिंचिंग की शक्ल ले लेते हैं. तो कभी दंगों की. कई बार इसकी चपेट में वो लोग भी आ जाते हैं जिनका इससे दूर-दूर तक कोई लेना देना नहीं होता है. वैसे भी हमारे देश में धर्म, लोगों की जान से ज्यादा बड़ा हो गया है. यही वजह है कि लोग कानून को अपने हाथ में लेने से पहले एक बार भी नहीं सोचते हैं. जैसा कि तबरेज अंसारी केस में देखने को मिला था. झारखंड के तबरेज अंसारी को मॉब ने चोरी के आरोप में लिंच कर दिया था. उनसे ‘जय श्री राम’ और ‘जय श्री हनुमान’ के नारे भी लगवाये गए थे. जिसके बाद इस पूरे मामले ने हिंदू-मुस्लिम झगड़ों रूप ले लिया था.

पर इसी बीच एक ऐसा मामला सामने आया है. जिसने ये साबित कर दिया है कि अगर धर्म से जुड़े मामलों को संवेदनशीलता और सूझबूझ के साथ सुलझाया जाए. तो उसे भयानक रूप लेने से रोका जा सकता है. झारखंड के रांची जिले के सिविल कोर्ट ने एक ऐसी ही मिसाल पेश की है. सिविल कोर्ट ने रिचा भारती को धार्मिक उन्माद फैलाने के मामले में बेल देते हुए. यह शर्त रखी है कि उसे 15 दिनों के भीतर ‘धार्मिक ग्रंथ क़ुरआन ‘ की  पांच प्रतियां खरीदकर बांटनी होंगी. जिसमें से एक प्रति पिठौरिया के सदर अंजुमन कमेटी को और 4 प्रतियां सरकारी विश्वविद्यालय या कॉलेज को दान देनी होंगी. न्यायिक दंडाधिकारी(जुडिशियल मजिस्ट्रेट) मनीष कुमार सिंह ने रिचा से सात-सात हज़ार रुपये के दो मुचलके (जमानती वॉरेंट) भी भरवाए.

क्या है मामला

झारखंड के रांची जिले के पिठौरिया इलाके में रहने वाली ग्रेजुएशन की छात्रा रिचा भारती ने सोशल मीडिया पर मुस्लिम समुदाय को लेकर आपत्तिजनक पोस्ट डाला था. जिसके बाद पिठौरिया के सदर अंजुमन कमेटी की शिकायत पर उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया था. उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने मुस्लिम समुदाय की धार्मिक चीजों को लेकर आपसी सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की है. वह दो-तीन दिन से लगातार फेसबुक और व्हाट्सएप्प के जरिए धर्म के प्रति आपत्तिजनक पोस्ट भेज रही हैं. इससे कभी भी विवाद बढ़ सकता है. इस पर पुलिस ने रिचा को गिरफ्तार कर लिया था.

हिंदू संगठनों ने गिरफ़्तारी पर आपती जताई थी

रिचा भारती की गिरफ्तारी का हिंदूवादी संगठनों ने जबरदस्त विरोध किया था. संगठनों ने रिचा के समर्थन में रविवार की शाम पिठौरिया के मेन रोड में जुलूस निकाला था. रिचा की तत्काल रिहाई और पिठौरिया थाना प्रभारी पर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई थी. संगठनों का कहना था कि पुलिस ने खास पक्ष के दबाव में ये सब किया है.

भाजपा की ओर से भी आई प्रतिक्रिया

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि रिचा भारती को जमानत देने के मामले में कोर्ट का फैसला चौंकाने वाला है. उन्होंने कहा कि , हालांकि, मैंने फैसला नहीं देखा है, पर मीडिया में जो खबरें आ रही हैं, उसके आधार पर यह कहा जा सकता है कि अदालत का ऐसा फैसला, पहले कभी न देखा है और न ही सुना है.

 

 

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