इसी साल के अप्रैल महीने में अमित शाह ने NRC को लेकर एक बड़ा बयान दिया था, जिसकी काफी निंदा हुई थी. भारतीय संविधान में लिखे शब्द ‘धर्म-निरपेक्षता’ को ठेंगा दिखाते हुए अमित शाह ने कहा था कि, केवल हिन्दुओं, सिखों और बौद्ध धर्म के लोगों को छोड़ कर बाकी सारे घुसपैठियों को देश से बाहर निकाल दिया जाएगा. उनका ये बयान काफी विवादों में रहा था.

NRC पर बोलते  तब के बीजेपी अध्यक्ष रहे अमित शाह, फोटो सोर्स - गूगल
NRC पर बोलते तब के बीजेपी अध्यक्ष रहे अमित शाह, फोटो सोर्स – गूगल

अब एक बार फिर से NRC की निष्पक्षता पर पर सवाल खड़े हो रहे हैं. अमेरिका की अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर बनी USCIRF (United States Commission on International Religious Freedom) कमीशन ने भारत सरकार द्वारा असम में लागू की गई राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) पर सवाल उठाते हुए कहा कि, असम में NRC का इस्तेमाल करते हुए अल्पसंख्यकों और मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है.

 अमेरिका की अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता (USCIRF) , फोटो सोर्स - गूगल
अमेरिका की अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता (USCIRF) , फोटो सोर्स – गूगल

USCIRF आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट में लिखा गया कि,

असम में क्या चल रहा है इसके बारे में और जानना चाहते हैं. दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश भारत, धार्मिक आजादी को लेकर उठे विवाद का सामना कर रहा है.

USCIRF ने कहा कि, NRC पर इससे पहले भी भारत के ही कई घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने सवाल उठाए हैं. इन सबका कहना है कि, NRC सरकार के लिए सिर्फ असम में बंगाली मुसलमानों को निशाना साधने का एक जरिया मात्र है.

NRC सरकार के लिए सिर्फ असम में बंगाली मुसलमानों को निशाना साधने का एक जरिया मात्र है, फोटो सोर्स - गूगल
NRC सरकार के लिए सिर्फ असम में बंगाली मुसलमानों को निशाना साधने का एक जरिया मात्र है- USCIRF , फोटो सोर्स – गूगल

हालांकि, भारत सरकार NRC को जायज ठहराते हुए कहती आई है कि, असम की राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर को गलत तरह से अल्पसंख्यक अधिकारों के मुद्दे से न जोड़ा जाए. संयुक्त राष्ट्र (UN) ने एक विशेष प्रतिनिधि द्वारा NRC के चलते मानवीय संकट की संभावनाएं जताई थी. जिसका जवाब देते हुए भारत ने साफ-साफ कह दिया था कि, किसी को भी बिना समझ के आधार पर गलत निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए.

UN में  उठते सवालों के जवाब पॉलोमी त्रिपाठी ने दिए थे. फोटो सोर्स - गूगल.
UN में NRC पर उठते सवालों के जवाब पॉलोमी त्रिपाठी ने दिए थे. फोटो सोर्स – गूगल.

गौरतलब है कि जब असम में एनआरसी लागू की गई जिसमें असम में रहने वाले लोगों को 24 मार्च 1971 तक या उसके पहले अपने परिवार के असम में होने के सबूत देने पड़े थे. 30 जुलाई, 2018 को NRC की फाइनल लिस्ट जारी की गई थी. इस लिस्ट में शामिल होने के लिए असम में रहने वाले 3.29 करोड़ लोगों ने आवेदन किया था. जिसमें से सिर्फ 40.07 लाख आवेदकों को जगह नहीं मिली थी. वहीं इस लिस्ट में जिन 19 लाख लोगों को शामिल नहीं किया गया. इसमें चौंकाने वाली बात ये थी कि, इन 19 लाख लोगों में हिन्दू भी थे और मुसलमान भी.

असम में NRC लिस्ट में शामिल होने का आवेदन करने के लिए दफ्तर के सामने लोगों की लंबी कतारें लगी थी, फोटो सोर्स- गूगल
असम में NRC लिस्ट में शामिल होने का आवेदन करने के लिए दफ्तर के सामने लोगों की लंबी कतारें लगी थी, फोटो सोर्स- गूगल

बताते चलें कि असम देश का ऐसा पहला राज्य है जहां भारतीय नागरिकों के नाम शामिल करने के लिए 1951 के बाद एनआरसी को अपडेट किया जा रहा है. NRC का पहला मसौदा 31 दिसंबर और 1 जनवरी की रात जारी किया गया था, जिसमें 1.9 करोड़ लोगों के नाम थे.

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