आज वूमेंस डे है। आज के दिन सोशल मीडिया से लेकर अखबार, टी.वी. में हर जगह वुमेंस डे पर आर्टिकल होंगे, उनके सशक्तीकरण पर बातें होंगी। लेकिन एक औरत के रूप में कह लो या फिर मेरी जिंदगी के रूप में। मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा तोहफा मेरी मां है। जिसने मुझे दुनिया दिखाई, जिसने मुझे नौ महीने तक अपना अंश बनाकर रखा। आज के दिन उस मां के बारे में मेरी कुछ भावनायें और मेरे शब्दों में उनको धन्यवाद।

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मेरी प्यारी मां!

मुझे दुनिया में आये हुए इक्कीस वसंत हो चुके हैं। मैंने इन बीस वसंतों में बहुत कुछ देखा है, बहुत कुछ घूमा है। इन सालों में मैंने आपको याद किया हो या न किया हो लेकिन आपने मुझे हर रोज याद किया है। मुझे याद है अपना बचपन, जब मैं गली के उस पार जाने से डरता था। क्योंकि वहां बड़े लोग ताश खेलते थे जो मुझे चिढ़ाते थे। तब आप ही थी, जो उनसे भिड़ जाती थी, उनको डांटती थीं। तब आपमें माता दुर्गा को देखकर मैं बहुत खुश होता था। जब मुझे छोटी-सी चोट लग जाती थी, तब आप मेरी ऐसी चिंता लेकर बैठ जाती जैसे कि कोई भारी-भरकम चोट ने मुझे घेर लिया हो।

मुझे आपने ही सबसे परिचित करवाया। मैंने पापा को, पापा कहा। क्योंकि आपने बोलने को कहा, आप कुछ और बोलती तो मैं और कुछ ही बोलता। आपने मुझे अच्छाई और बुराई में फर्क सिखाया।

‘‘मुझे याद है कि जब मैं छोटे में अपने पड़ोस में रहने वाले दोस्त आसिफ के यहां से एक घड़ी उठाया लाया था। क्योंकि वह मुझे बहुत अच्छी लगी थी और मुझे वो चाहिए थी। तब आपने ही मुझे बड़े प्यार से बताया था। किसी की चीज को बिना पूछे लेना अच्छी बात नहीं है। ऐसा सिर्फ गंदे लोग ही करते हैं। तब मैं दौड़कर उस घड़ी को वापिस उस जगह रखा था।’’

आपने ही मुझे सिखाया है कि बड़े लोगों की इज्जत करो और छोटों को प्यार। आज मैं जहां भी हूं सफल हूं या नहीं, लेकिन एक अच्छा इंसान बनने की भरपूर कोशिश है। मेरे लिए आप सबसे खास हो। आप ही वो हो जो भगवान से कुछ मांगती हो तो सिर्फ मेरे लिए, सोचती हो तो सिर्फ मेरे लिए। कहते हैं कि समय के साथ सबका प्यार और मोह कम हो जाता है लेकिन आपके शब्द और आंखों में मुझे मेरे लिए फिक्र और प्यार ही दिखता है।

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मैंने आपसे मार भी बहुत खाई है लेकिन जाने क्यों वो पिटाई याद नहीं रहती है। याद रहती है तो तुम्हारी फ़िक्र और तुम्हारे हाथ का खाना। बैगन का छोका आपसे अच्छा कोई नहीं बना सकता। जब मैं बेगानों के शहर दिल्ली में हूं तो आपकी याद बहुत आती है लेकिन जब रात में आपका फोन आता है तो अच्छा लगता है। आप ही मेरी फ़िक्र करती रहती हैं।जब मैं जयपुर जा रहा था। तब भी आप ने मुझे कहा था, संभलकर जाना। रास्ते में किसी का खाना मत लेना और पहुंचकर फोन करना। मैं उस समय जरूर कह देता हूं, ‘‘बच्चा हूं क्या?’’ लेकिन बाद में अच्छा लगता है। आज के दिन बस मैं आपको धन्यवाद और बताना चाहता हूं कि मां आप मेरे लिए सबसे अच्छा तोहफा हो।

‘‘मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं ‘‘मां’’!

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