मोदी जी को 25 सितंबर को ग्लोबल गोलकीपर अवार्ड मिला है. उन्हें ये अवार्ड उनके स्वच्छ भारत अभियान के लिए मिला है. जिसका अहम उद्देश्य है देश को खुले मैं शौच करने से पूरी तरह मुक्त करना. जिसके लिए पीएम मोदी ने देश भर में शौचालय बनवाने का संकल्प भी लिया है. इस योजना की स्थिति कितनी खराब है ये आए दिन अखबारों में छपता रहता है.

कहीं शौचालयों के ऊपर छत नहीं है तो कहीं शौचालय में पानी नहीं आ रहा है. शायद बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने बिना स्वच्छ भारत अभियान की असलियत जाने मोदी जी को ये अवार्ड दे दिया है.

देश में आज भी कई राज्य ऐसे हैं जहां लोग खुले में शौच करने के लिए मजबूर हैं. पर मीडिया और सरकार दोनों ने ये कसम खा रखी है कि हम लोगों के सामने सच नहीं आने देंगे. बस लोगों को बड़े-बड़े होर्डिंग्स और विज्ञापनों से बताते रहेंगे कि ‘सब बढ़िया है‘, ‘सब चंगा सी‘. हालांकि, स्थिति इसके बिल्कुल उलट है. देश में जहां पहले धर्म के नाम पर लोगों को लिंच किया जा रहा था. वहीं अब खुले में शौच को लेकर लोगों को मारा जा रहा है.

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स: गूगल
प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स: गूगल

मामला जान लीजिए

मध्यप्रदेश के सागर से यह बात सामने आ रही है कि खुले में शौच को लेकर. दो गुटों में लड़ाई हो गई. जिसकी चपेट में आकर एक बच्चे की मौत हो गई है.

दरअसल, मध्यप्रदेश के सागर में एक गांव है, बगासपुर. यहां रहने वाले मोहर सिंह के घर के सामने उसके पड़ोसी राम सिंह का बेटा खुले में शौच कर रहा था. मोहर सिंह इस पर गुस्सा हो गया. जिसके बाद उसके और राम सिंह के बीच झगड़ा शुरू हो गया. दोनों एक दूसरे को गालियां देने लगे. बात इतनी बिगड़ गई की दोनों एक दूसरे पर लाठियों से हमला करने लगे. इसी हाथापाई में एक बच्चे की मौत हो गई.

जब दोनों तरफ से लाठियां चल रही थी. इसी दौरान मोहर सिंह का डेढ़ साल का बेटा इसकी चपेट में आ गया. आरोपियों ने उस पर भी लाठी बरसा दी, जिससे बच्चे की घटनास्थल पर ही मौत हो गई. मोहर सिंह को भी खाफी चोटें लगी हैं.

पुलिस ने मौके पर पहुंच कर झगड़ा खत्म कराया. साथ ही आरोपियों को गिरफ़तार कर लिया और घायलों को सिविल अस्पताल पहुचां दिया गया है.

यह कोई पहली घटना नहीं है

25 सितंबर को मध्य प्रदेश के शिवपुर में ऐसी ही एक घटना घटी थी. रोशनी वाल्मीकि (12साल) और अविनाश (10 साल) सड़क के किनारे शौच कर रहे थे. उसी वक्त हाकिम सिंह यादव और रामेश्वर सिंह ने दोनों को लाठी से पीट-पीट कर मार डाला था.

अब हमें समझना होगा कि लोगों को मार-पीट कर, उनकी हत्या करके. हम देश में स्वच्छता नहीं ला सकते. इसका सिर्फ एक ही तरीका है कि जहां अभी तक शौचालय नहीं बने हैं. वहां शौचालय बनाया जाएं. जिसका लोग इस्तेमाल कर सकें. सिर्फ खाना पूर्ति के लिए नहीं. साथ ही लोगों को उसके इस्तेमाल के फायदे के बारे में बताया जाए. इसके लिए जागरूकता अभियान चलाया जाए. न कि उनकी हत्या कर दी जाए.

सोचने की बात ये है कि, क्या अब अपने देश में हर चीज़ का हल किसी की जान लेकर ही निकलेगा?

ये भी पढ़ें: मोदी जी ‘खुले में शौच से मुक्त भारत’ का जो आंकड़ा दुनिया को बता रहे हैं, वो आधा सच है

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here