चंद्रयान-2 मिशन के तहत 7 सितंबर की आधी रात को लैंडर विक्रम को सॉफ्ट लैंडिंग के जरिये चंद की सतह उतरना था. लेकिन, 7 तारीख की रात जब लैंडर को चंद की सतह पर लैंड करने की प्रक्रिया चल रही तभी इसरो का लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया था. संपर्क टूटने के समय लैंडर विक्रम चांद की सतह से महज 2.1 किलोमीटर दूर था. उस समय इसरो वैज्ञानिकों समेत 130 करोड़ देशवासियों के चेहरों पर निराशा छा गई थी. संपर्क टूटने से हताश हुए इसरो प्रमुख के सिवान की आंखों से निकलते आंसू पूरे देश ने देखे थे.

लैंडर से संपर्क टूटने के बाद इसरो प्रमुख अपने आसूं रोक नहीं पाए, फोटो सोर्स - गूगल
लैंडर से संपर्क टूटने के बाद इसरो प्रमुख अपने आसूं रोक नहीं पाए, फोटो सोर्स – गूगल

लेकिन अगले ही दिन इसरो के लिए थोड़ी राहत की खबर आई. और ये खबर लाने वाला था चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर जो लगातार चंद्रमा के चक्कर काट रहा है. शनिवार को ऑर्बिटर ने लैंडर विक्रम की एक थर्मल इमेज भेज कर लोकेशन कंफर्म कर दी. इस खबर के आते ही ऑर्बिटर को चंद्रयान मिशन का मुख्य हीरो मान लिया गया था.

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स - गूगल
प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स – गूगल

लैंडर की लोकेशन के बारे में जानकारी देते हुए इसरो वैज्ञानिकों ने बताया था कि, लैंडर पूरी तरह से सुरक्षित है. लेकिन संपर्क टूटने की वजह से लैंडर ने चांद पर हार्ड लैंडिंग की, जिस कारण वह चाँद की सतह पर टेढ़ा पड़ा है. हालांकि अच्छी बात ये थी कि लैंडर विक्रम में कोई टूट-फूट नहीं हुई है. हम लैंडर विक्रम से वापस संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं. बता दें कि 5 दिन गुजर जाने के बाद भी लैंडर विक्रम से कोई संपर्क नहीं साधा जा सका है.

चाँद के चक्कर लगाता ऑर्बिटर, फोटो सोर्स - गूगल
चाँद के चक्कर लगाता ऑर्बिटर, फोटो सोर्स – गूगल

इस वक्त नासा समेत दुनिया भर की स्पेस एजेंसियों की नजरें इसरो के मिशन चंद्रयान-2 पर लगी हुई हैं. वहीं इसरो वैज्ञानिक लगातार लैंडर से संपर्क साधने की कोशिश में लगे हुए हैं.

लैंडर से संपर्क साधने की कोशिश में लगे इसरो वैज्ञानिक, फोटो सोर्स - गूगल
लैंडर से संपर्क साधने की कोशिश में लगे इसरो वैज्ञानिक, फोटो सोर्स – गूगल

अब खबर ये है कि इसरो लैंडर से संपर्क पुर्नस्थापित करने के लिए कर्नाटक के गांव बयालालु में लगे 32 मीटर का एंटीना इस्तेमाल कर रहा है. इस एंटीना की मदद से इसरो ऑर्बिटर को सिग्नल भेज रहा है. ऑर्बिटर लगातार ये सिग्नल चाँद पर निष्क्रिय पड़े लैंडर विक्रम को भेज रहा है. जिस कारण अभी भी लैंडर को एक्टिव करने की संभावनाएं अभी भी बनी हुई हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर , फोटो सोर्स - गूगल
प्रतीकात्मक तस्वीर , फोटो सोर्स – गूगल

खुद इसरो वैज्ञानिकों ने कहा है कि हमारे चंद्रयान 2 मिशन की पूरी सफलता का जिम्मा ऑर्बिटर के कंधों पर है. इस वक्त ऑर्बिटर इसरो के लिए संकट मोचन जैसा है. जो हनुमान की तरह अपना काम कर रहा है. क्योंकि अभी ऑर्बिटर में इतना ईधन है कि वो आने वाले 7 साल तक लगातार चाँद के चक्कर लगा कर हमें जरूरी जानकरियां भेजता रहेगा.

ऑर्बिटर की प्रतीकात्मक तस्वीर , फोटो सोर्स - गूगल
ऑर्बिटर की प्रतीकात्मक तस्वीर , फोटो सोर्स – गूगल

अब तक के सबसे पावरफुल कैमरे से लैस है हमारा ऑर्बिटर

चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर में जिस कैमरे का इस्तेमाल किया है वो अब तक के किसी भी लूनर मिशन में इस्तेमाल किये कैमरों में से सबसे उन्नत तकनीकी से लैस है. इस कैमरे का हाई रिजॉल्यूशन 0.3m का है.

इस वक्त ऑर्बिटर चांद की सतह से 100 किलोमीटर की ऊंचाई (एल्टिट्यूड) पर चक्कर काट रहा है. जहां से वो चांद की हाई रिजॉल्यूशन की तस्वीरें इसरो के कमांड सेंटर भेजता रहेगा.

ऑर्बिटर चाँद की ये अलग-अलग तस्वीरें आगे भी भेजता रहेगा जो आगे की रिसर्च और स्टडी में काम आएंगी.

इसरो ने कहा, चाँद की सतह पर तिरछा पड़ा लैंडर विक्रम में लगा पावर जेनरेट कर रहा है या नहीं, इस बारे में अभी तक कुछ कहा नही जा सकता है. इसरो चेयरमैन के अनुसार, वैज्ञानिक अभी भी ऑर्बिटर से मिले डाटा को एनालिसिस कर रहे हैं. इसरो वैज्ञानिकों ने अनुसार, चाँद पर मौजूद लैंडर विक्रम को सिर्फ एक लूनर डे (14 दिन) तक ही सूरज की सीधी रोशनी मिलेगी. ऐसे में इसरो के पास लैंडर से संपर्क स्थापित करने के लिए 14 दिनों का वक्त था. अब 5 दिन गुजर चुके हैं. ऐसे में इसरो के पास सिर्फ 10 दिनों का समय ही बचा है.

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