गर्मियों के दिनों में जब रसना, नींबूज, टैंग मैंगो जैसी पेय पदार्थ मार्केट में नहीं हुआ करती थी. न ही गर्मियों में ठंढक दिलाने का वादा करने वाली स्प्राइट, ड्यू , 7-अप जैसी कोल्ड ड्रिंक्स बाजार में थी. तब सिर्फ रूह-अफजा हुआ करता था जो गर्मियों के दिनों में हर परिवार का सदस्य जैसा बन जाता था. भाईसाहब क्या बताए नब्बे के दशक में पड़ने वाली गर्मी के मौसम में रूह-अफजा हमारे लिए सुपरस्टार हुआ करता था.

हर घर के फ्रिज में रूह-अफजा की लाल बोतल रखी मिल हीं जाती थी. गर्मियों के दिनों में घर आने वाले हर एक मेहमान का स्वागत रूह-अफजा से बना ठंडे शरबत से किया जाता था. माना आज के समय में मार्केट में ठंढे पेय पदार्थो की बहुत वैराइटी और अलग-अलग फ्लेवर मौजूद हैं. लेकिन गुरु कुछ भी कह लो रूह-अफजा शर्बत जैसी बात किसी में नही है, न कभी थी और न हीं कभी होगी.

जैसा कि आपको पता है कि रमजान का पवित्र महीन चल रहा है जिसमे हमारे मुस्लिम भाई रोजा रखते है. इन दिनों रोजेदारों के बीच शरबत की मांग चरम पर होती है. क्योंकि रोजेदार शाम को अपना रोजा खोलते समय आमतौर पर यूनानी पद्धति से बने रूह-अफजा शर्बत का उपयोग करते हैं. लेकिन इस बार भारतीय बाजारो में रूह-अफजा गायब है जिससे रोजेदारों में मायूसी है. सोशल मीडिया पर बाजार में रूह-अफजा की कमी चर्चा का विषय बना हुआ है, इस बीच इस चर्चा में हमारा पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान भी शामिल हो गया है.

खबर है कि हमदर्द कंपनी के प्रोमोटरों के बीच आपसी पारिवारिक विवाद चल रहा है. जिस कारण अप्रैल महीने से इसका प्रोडक्शन बंद पड़ा हैं. वहीं हमदर्द इंडिया इन अफवाहों से साफ इनकार किया है.

हालांकि हमदर्द लैबोरेट्रीज इंडिया कंपनी के चीफ सेल्स और मार्केटिंग ऑफिसर मंसूर अली ने कहा कि शर्बत में उपयोग आने वाले कुछ तत्वों की कमी के कारण सप्लाई में कमी आई है. उनका कहना है कि हमदर्द अपने प्रॉडक्ट की क्वालिटी में किसी भी तरह का समझौता नहीं करता इसलिए ऐसे हालात बन गए हैं. उन्होने बताया कि सप्लाई गैप को 1 हफ्ते में पूरा कर दिया जाएगा. अली के मुताबिक 400 करोड़ रुपए के इस ब्रांड की बिक्री गर्मियों में 25 फीसदी बढ़ जाती है.

दूसरी तरफ जब पाकिस्तान स्थित हमदर्द कंपनी के एमडी और सीईओ उस्मा कुरेशी को ये बात पता चली तो उन्होने एक ट्विट के जरिए पाकिस्तान से भारत रूह-अफजा शर्बत भेजने की पेशकश की है. ट्वीट में उन्होने लिखा-

“हम इस रमजान के दौरान भारत में रूह अफ्जा और रूह अफ्जागो की आपूर्ति कर सकते हैं. यदि भारतीय सरकार द्वारा अनुमति दी जाती है तो हम वाघा बॉर्डर से ट्रकों को आसानी से भेज सकते हैं.”

अब आप कन्फूजिया गए होंगे कि रूह-अफजा बनाने वाली असली कंपनी भारत वाली हमदर्द कंपनी है या पाकिस्तान वाली हमदर्द. यह कन्फ़्यूजन अभी दूर किए देते है.

तो बात एसी है कि 1900 के दशक में यूनानी चिकित्सा व्यवसायी हकीम हाफिज अब्दुल मजीद ने सबसे पहले पुरानी दिल्ली के लाल कुआं बाजार में ‘हमदर्द’ नाम का एक दवाखाना खोला. दिल्ली में पड़ने वाली गर्मी को देखते हुये हकीम मजीद ने गर्मी के लू, लपट से निपटने के लिए 1907-1908 में रूह-अफजा नामक पेय पदार्थ की खोज की. देखते ही देखते हकीम जी के दवाखाना को अब रूह-अफजा पेय की वजह से पहचाना जाने लगा. आजादी के पहले तक रूह-अफजा दिल्ली में और आसपास के राज्यो में हर किसी के रसोईघरों में पाया जाने लगा था.

फिर आता है 1947 का दौर जब देश का बंटवारा होने वाला था. देश के बटवारे के साथ-साथ ‘हमदर्द’ भी बंट गया. अब्दुल मजीद के मरने के बाद उनके छोटे बेटे हकीम मोहम्मद सईद ने पाकिस्तान जाना चुना और वहाँ कराची से हमदर्द नाम से हीं नयी कंपनी की शुरूआत की. भारतीय हमदर्द की तर्ज पर ये कंपनी खोली गई थी. जो आज पाकिस्तान में जाना माना ब्रांड बन चुकी है.

हालांकि जब से पाकिस्तानी हमदर्द की तरफ से भारत में रूह-अफजा भेजने की पेशकश की है तब से ट्विटर पर एक जंग जैसा माहौल बना गया है. दोनों देशो के लोग सोशल मीडिया पर जमकर एक दूसरे की खिल्ली उड़ाए जा रहे है.

पाकिस्तानी हमदर्द को जवाब देते हुए एक भारतीय यूजर ने लिखा,

‘पहले आतंकवादियों को भेजना बंद करो, फिर बाद में रूह-अफजा भेजना’.

वहीं एक ट्वीटर यूजर ने लिखा, ‘क्या आप रूह-अफजा के ट्रको के साथ मसूद अजहर को बांध कर भेज सकते हैं? अगर आप आप ऐसा कर सकते हैं तो भारत सरकार आपके लिए बार्डर खोल सकती है’. वहीं कुछ भारतीयों ने पाकिस्तान के इस प्रस्ताव की तारीफ भी की।

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