भारत का राष्ट्रीय पशु है बाघ. बाघ जंगल में रहता है. शिकार करके खाता है. जब हम स्कूल की पहली या दूसरी जमात में पढ़ते थे. तभी से हमें ये रटा दिया गया था. लेकिन, हमारे शिक्षक निकले अल्पज्ञानी. वो हमें एक बात बताना भूल गए कि बाघ आतंकवाद का कारण भी होता है.

हालांकि, देर से ही सही यह ज्ञान हमारे देश के एक महान पुरूष को आ गया है. कल को हो सकता है कि इसे हमारे सिलेबस में भी शामिल कर लिया जाए. या फिर प्रधानमंत्री इसको लेकर कोई अभियान ही चला दें.

पेजावर मठ के स्वामी विश्वेश तृतियथा जिन्होंने बाघ को लेकर बयान दिया, फोटो सोर्स: गूगल

पेजावर मठ के स्वामी विश्वेश तृतियथा जिन्होंने बाघ को लेकर बयान दिया, फोटो सोर्स: गूगल

पहले इन महापुरूष के बारे में जान लें

कर्नाटक के उड्डपी में एक मठ है, पेजावर मठ. इसके स्वामी हैं, विश्वेश तृतियथा. इनका कहना है कि

बाघ और आतंकवादियों की विशेषता एक ही होती है. हमनें बाघ को अपना राष्ट्रीय पशु मान कर ग़लती की है. हमें गाय को अपना राष्ट्रीय पशु मान लेना चाहिए.

योग गुरू बाबा रामदेव, फोटो सोर्स: गूगल

योग गुरू बाबा रामदेव, फोटो सोर्स: गूगल

जब स्वामी जी यह ज्ञान दे रहे थे. उस वक्त बाबा रामदेव भी वहीं मौजूद थे. दरअसल, उड्डपी में संत समागम का आयोजन किया गया था. जहां देश के तमाम कोनों से साधु-संत आए हुए थे.

इस समागम को संबोधित करते हुए बाबा रामदेव ने भी एक अहम बात कही, जो विश्व के तमाम पर्यावरण विशेषज्ञों को जान लेना चाहिए. वरना पर्यावरण पर मंडरा रहा खतरा कभी समाप्त नहीं होगा. उन्होंने कहा कि

मांसाहार की वजह से ही ग्लोबल वार्मिंग हो रही है. रामदेव ने गोहत्या पर रोक लगाने के लिए कड़े कानून बनाने की बात कही है. इसके अलावा कश्मीर से धारा 370 हटाने समेत कई और मुद्दों पर भी इस समागम में बात की गई है.

कुल मिलाकार बात ये है कि मोदी जी को अब रक्षा विभाग, शिक्षा विभाग जैसे तमाम विभागों की तर्ज पर साधु-संत विभाग भी बना देना चाहिए. ताकि,  इन महान लोगों के महान ज्ञान और खोजों से देश की जनता अनजान न रह जाए. वैसे भी ‘गाय हमारी माता है हमको कुछ नहीं आता है’ वाले देश को ज्ञान, विज्ञान और सुरक्षा से करना क्या है? इनके लिए गाय का गोबर और मूत्र ही काफी है.

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