कुछ लोगों को बस मुनाफे से मतलब होता है। वो स्थिति नहीं देखते, परिस्थिति नहीं देखते, बस अपना फायदा सोचते हैं। इन्हें नहीं मतलब होता है कि दुनिया किस दौर में है और उनके इस हरकत से लोगों की मानसिकता पर क्या असर पड़ेगा। लेकिन, ऐसी घटनाएँ इंसानियत को जरूर शर्मसार करती हैं। एक ऐसी ही खबर आई है जोकि बेहद ही शर्मनाक है।

दरअसल नवभारत टाइम्स में छपी एक खबर के मुताबिक डार्क वेब पर आजकल एक नया बिज़नस शुरू हो गया है। यहाँ पर कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों का खून गुपचुप और गैर-कानूनी तरीके से बेचा जा रहा है। खबर के माने तो Agartha नाम की एक डार्क वेब मार्केट है जहां पर कोरोना वायरस के खिलाफ प्रतिरोधात्मक क्षमता यानि कि इम्‍युनिटी विकसित करने के लिए कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों का प्‍लाज्‍मा बेचा जा रहा है। जो लोग ये काम कर रहे हैं उन्होंने इसकी शुरुआत 25 मिलीलीटर प्‍लाज्‍मा बेचने से की थी। फिर बाद में 50ml, 100ml, 500ml के पैकेट्स भी लिस्‍ट किए गए। इस डार्क वेब मार्केट पर 2.036 बिटक्‍वाइंस (10.86 लाख रुपये) में एक लिटर खून बेचने का दावा किया जा रहा है।

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और भी क्या-क्या बिक रहा है?

डार्क वेब पर सिर्फ कोरोना से ठीक हुए मरीजों का खून ही नहीं बल्कि, कई और भी कोरोना से जुड़ी चीजें के बिकने की बात सामने आई है। डार्क वेब पर मौजूद एक विक्रेता जिसका नाम safetyfirst2020 है, वो कोरोना जांच करने की किट बेच रहा है। इसके अलावा कमाल बात तो ये है कि Agartha नाम की डार्क वेबसाइट पर तो ‘कोरोना वायरस की वैक्‍सीन’ तक बेची जा रही है। जबकि अबतक पूरी दुनिया कोरोना की वैक्सीन ढूंढ ही नहीं पायी है। इस वैक्सीन की कीमत 0.065 बिटक्‍वाइंस है यानि कि भारतीय रुपयों में 34,751 रुपये।

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स: गूगल

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स: गूगल

वहीं Pax Romana नाम की एक और वेबसाइट पर कोरोना मरीजों के ठीक होने के बेहतर चांसेज के नाम पर 20 कैप्‍सूल्‍स का पैकेट भी बेचा जा रहा है। इसकी कीमत 43 डॉलर है यानि कि 3,291 रुपये में ये दवाई उपलब्‍ध है। इसके अलावा chloroquine (Covid-19 में यूज हो रही hydroxychloroquine का कम जहरीला रूप) और favipiravir (जापान में फ्लू के खिलाफ यूज होने वाली एंटी वायरल दवा) भी सेल के लिए है। इनके दाम 23,000 रुपये से डेढ़ लाख रुपये के बीच हैं।

कितने सही इनके दावे?

वैसे तो डार्क वेब पर जो विक्रेता होते हैं वो अक्सर अपने वादे पूरे करते हैं लेकिन, कोरोना से जुड़ी लगभग हर चीज एक स्केम है जिससे आपसब को बच कर रहने की जरूरत है। जैसे कि कोरोना से जुड़ी वैक्सीन का वादा एक धोखे से ज्यादा और कुछ भी नहीं क्योंकि कोरोना की कोई वैक्सीन ही उपलब्ध नहीं है।

डार्क वेब मार्केट की कोशिश ये भी रहती है कि वो स्कैम कर रहे विक्रेताओं को बैन कर दें। इसलिए उम्मीद ये भी की जा रही है कि डार्क वेब मार्केट कोरोना को लेकर बेचे जा रहे फर्जी उत्पादों को बेचने वालों पर कड़े कदम उठाएगी। आइसे ही एक डार्क वेब मार्केट व्‍हाइट हाउस मार्केट ने होमपेज पर लिख दिया है कि

कोरोना वायरस के इलाज वाले विज्ञापनों को रिजेक्‍ट किया जाएगा और वेंडर्स को बैन भी किया जा सकता है।

क्या होता है डार्क वेब?

डार्क वेब, डीप वेब यानी इंटरनेट का वो हिस्सा जहां तक आप आम वेब ब्राउज़र से नहीं एक्सैस कर सकते हैं। इंटरनेट की इस काली दुनिया में कई ग़ैरकानूनी बाज़ार सजते हैं। कई ऐसी मादक, ख़तरनाक चीज़ें ख़रीदी-बेची जाती हैं, जिन्हें बेचना या ख़रीदना जुर्म माना जाता है। पैसे की बजाय वर्चुअल मनी, बिटकॉइन से पेमेंट होता है।