“सौ सुनार की तो एक लुहार की” भाजपा और कांग्रेस के आईटी सेल वाले वीर जांबाज हर तरह से अपनी काबिलियत साबित करने में लग गए हैं। दोनों ही दलों के आईटी सेल वालों में एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ है। आईटी सेल वालों की बात तो छोड़िए दोनों ही दलों के समर्थक भी अपने-अपने मुताबिक सोशल मीडिया पर अफवाह और झूठ फैलाने की हर तरकीब अपना रहे हैं।

इसी क्रम में भाजपा के एक समर्थक ने अभी अटल बिहारी वाजपेयी के अंतिम संस्कार में जुटी भीड़ को प्रधानमंत्री मोदी के नमांकन के मौके पर जुटी भीड़ बताकर सोशल मीडिया पर सर्कुलेट कर दिया। इसी तरह से सोशल मीडिया पर मौजूद ‘जागरूक कांग्रेसी समर्थकों’ ने प्रधानमंत्री के भाषण के साथ छेड़छाड़ करके सोशल मीडिया पर भाजपा समर्थकों को मुंहतोड़ जवाब दिया।

दरअसल, कांग्रेस समर्थक गौरव पांधी नाम के एक व्यक्ति ने 21 अप्रैल को सोशल मीडिया पर एक वीडियो सर्कुलेट किया। इस वीडियो को शेयर करते हुए पांधी ने लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने रैली को संबोधित करते हुए भाषण में असंवैधानिक भाषा का प्रयोग किया।

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कांग्रेस समर्थक पांधी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री यह किस तरह की भाषा है? आगे पांधी ने लिखा कि प्रधानमंत्री महोदय कुछ और नहीं तो अपनी कुर्सी का सम्मान कीजिए।

द क्विंट ने अपनी रिपोर्ट में ये दावा किया कि पांधी ने जो वीडियो शेयर की है वो वीडियो द क्विंट के लाइव स्ट्रीमिंग से रिकॉर्ड की गई। इसके बाद वीडियो को एडिट करके लोगों के बीच सर्कुलेट कर दिया गया। यही नहीं द क्विंट ने अपने रिपोर्ट में यह भी दावा किया कि जो वीडियो पांधी द्वारा लोगों के बीच फैलाई जा रही है वो लोगों को भ्रमित करने वाला है। यह वीडियो गलत तरीके से एडिट करने के बाद लोगों के बीच फैलाई गई है।

प्रधानमंत्री ने अपने उस रोज के भाषण के दौरान कभी भी बहन से संबंधित गाली या किसी तरह की असंसदीय भाषा नहीं बोली। एक ट्वीटर यूजर सेमू भट्ट के मुताबिक, मोदी ने गुजराती में ‘थवान चे तो’ बोला था, जिसे एडिट किए गए वीडियो में लूप में चलाकर ‘BC’ बता दिया गया।

इस तरह से कच्चा चिट्ठा की असली-नकली चेक टीम ने वीडियो को झूठा पाया है। इस तरह की फेक खबरें हमारे समाज को कहीं न कहीं कमजोर करती हैं। पांधी जैसे लोगों को इस वीडियो को सर्कुलेट करने से पहले सोचना चाहिए कि वो किसी सामान्य नागरिक नहीं बल्कि देश के प्रतिष्ठित पदों पर बैठे इंसान की गरिमा पर सवाल उठा रहे हैं।

वोट बैंक पॉलिटिक्स और वैचारिक प्रतिबद्धता से जरा हटकर पांधी सोचते तो उन्हें पता चलता कि यदि प्रधानमंत्री मोदी इस तरह के बयान देते हैं तो सिर्फ एक व्यक्ति, एक पार्टी नहीं बल्कि पूरे देश की प्रतिष्ठा कम होगी। पांधी भले कांग्रेसी हों लेकिन पहले वो भारतीय हैं। उनको अपने मुल्क और मुल्क की प्रतिष्ठा के लिए भी इस तरह से प्रधानमंत्री के बारे में अफवाह नहीं फैलानी चाहिए।

इसके पहले भी प्रधानमंत्री को झूठा कहकर खुद राहुल गांधी भी फंस चुके हैं। मामला यह था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्च 2019 के पहले सप्ताह में अमेठी जाकर आयुध कारखाने का शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने जो भाषण दिया कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उनके भाषण में झूठ बोलने का आरोप लगाया।

राहुल गांधी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री ने जो कहा वो झूठ है। राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने जिस आयुध फैक्ट्री के शिलान्यास करने की बात कही है। उसकी सच्चाई ये है कि 2010 में उन्होंने इस कारखाने की आधारशिला रखी थी और यह कारखाना वर्षों से छोटे हथियारों का उत्पादन कर रहा है। लेकिन ऐसा करके खुद राहुल ने गलत जानकारी दे दी।

राहुल के ट्वीट के जवाब में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने तुरंत ट्वीट कर प्रतिक्रिया दी और राहुल के दावे को ‘झूठ’ कहा।

स्मृति ईरानी ने दो पुरानी फोटो को पोस्ट करते हुए, राहुल को गलत साबित कर दिया। उन्होंने दावा किया कि राहुल उस वर्ष को भूल गए जब उन्होंने आयुध निर्माण की आधारशिला रखी थी।

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