प्रशांत कनौजिया कहने को तो पत्रकार है मगर ये भाई साहब ट्विटर पर खूब गुल खिलाते हैं और कुछ भी लिख देते हैं. आपको याद होगा इन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ एक विवादित ट्वीट किया था. तब इनको जेल तक जाना पड़ा था. इस बार प्रशांत कनौजिया ने आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत की तुलना ब्रिटिश जनरल रेजीनाल्ड डायर से की है. इस ट्वीट का वायरल होना तो लाजमी था. बस फिर उसके बाद सुप्रीम कोर्ट के वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन में प्रशांत के खिलाफ शिकायत भी कर दी है।

प्रशांत कनौजिया, फोटो सोर्स- गूगल

पूरी बात समझ लीजिए.

दरअसल, प्रशांत कनौजिया ने शनिवार 10 अगस्त को आर्मी चीफ बिपिन रावत के खिलाफ एक बवाली ट्वीट कर दिया था. जिसके बाद ट्विटर पर उनकी जमकर थू-थू हो रही है. सुप्रीम कोर्ट के वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने तो तिलक मार्ग थाने में प्रशांत खिलाफ देशद्रोह का मामला तक दर्ज करा दिया है. आम आदमी पार्टी के बागी नेता कपिल मिश्रा ने तो उनको आगरा भेजने तक की बात कह दी है।

कपिव मिश्रा, पूर्व नेता आप, फोटो सोर्स- गूगल

प्रशांत ने भले ही अपना वो ट्वीट डिलीट कर दिया मगर इससे उनकी मानसिकता का पता चलता है. प्रशांत कनौजिया सोशल मीडिया पर हमेशा चर्चाओं में बने रहते है. पेशे से पत्रकार होने के नाते उनकी कुछ जिम्मेदारियां बन जाती हैं, जो उनको निभानी चाहिए. अभी तक यह बात समझ नहीं आती कि आखिर उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में कौन सा उत्कृष्ट काम किया है।

प्रशांत कनौजिया, फोटो सोर्स- गूगल

ट्वीट करने से पहले उनको सोचना चाहिए था कि वो लिख क्या रहे हैं. एक पत्रकार के तौर पर उनकी जिम्मेदारी बनती है कि, जो वो लिख रहे हैं उससे किसी की भावनाएं ना भड़के. उनको पहले फैक्ट चेक कर लेनी चाहिए कि वो किसकी तुलना किससे कर रहे हैं. शायद प्रशांत ने इतिहास नहीं पढ़ा है। उनको नहीं पता कि जनरल रेजीनाल्ड डायर कौन था और उसने हम भारतियों पर क्या जुल्म किया है. चलिए प्रशांत हम आपको बताते हैं कि कौन था जनरल डायर?

जनरल डायर, फोटो सोर्स- गूगल

आपने जलियांवाला बाग हत्याकांड तो सुना ही होगा या कभी ट्विटर से फुर्सत मिली होगी तो पढ़ा होगा. प्रशांत हम आपको बताना चाहते हैं कि जब हिंदुस्तान गुलाम था तब कुछ आजादी के दिवाने बैसाखी के दिन 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग में रौलेट एक्ट का विरोध करने के एकत्र हुए थे. ये सिर्फ एक सभा थी जो शांतिपूर्ण तरीके से चल रही थी. अंग्रेजों को यह बात पसंद नहीं आई और अंग्रेजों के एक अफसर जनरल डायर ने वहां आए सभी लोगों पर चारों तरफ से अंधाधुंध गोलियां चलवानी शुरू कर दीं. बाग से बाहर जाने के सभी रास्ते बंद कर दिए गए. इस हादसे में हजार से ज्यादा लोग और बच्चे मारे गए. 2000 से ज्यादा जख्मी हुए. सैकड़ों महिलाओं, बूढ़ों और बच्चों ने जान बचाने के लिए कुएं में छलांग लगा दी थी।

जलियांवाला बाग, फोटो सोर्स- गूगल

प्रशांत ने आर्मी चीफ बिपिन रावत की तुलना जनरल डायर से की है. प्रशांत के पास पता नहीं खबरों का कौन सा सोर्स है जिसमें ये सब लिखा है कि कश्मीर में लोगों पर गोलियां चलाई जा रही है, वहां के लोगों से उनकी आजादी छिनी जा रही है. प्रशांत को शायद ये नहीं पता कि ये आर्टिकल 370 को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों से बिल पास हुआ है. आर्मी सिर्फ शांति बनाए रखने के लिए अपनी ड्यूटी कर रही है।

आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत, फोटो सोर्स- गूगल

प्रशांत अब हम उम्मीद करेंगे कि आप जो भी लिखें सोच समझकर लिखें. वो क्या है ना ट्वीट करना बहुत आसान है पर उसके बाद उसका समाज पर क्या असर पड़ता है ये अभी आपको ये जानने की जरूरत है. उम्मीद करते हैं कि अब आप जो ट्वीट करेंगे सोच-समझकर करेंगे. पिछले ट्वीट की वजह से आपको जेल जाना पड़ा था, सुना वहां मार-कुटाई हुई थी इसलिए प्लीज देश के बारे में या जिन मुद्दों पर देश की भावनाएं जुड़ी रहती है उनपर सोच-समझकर लिखा करिए।

हम यह नहीं कहते कि आप सवाल न करें, विरोध न करें। एक लोकतांत्रिक देश की खुबसूरती हीं यही होती है कि वहां पर वैचारिक मतभेद होते हैं और उसे सबके सामने रखने का पूरा-पूरा अधिकार भी। पर अंधविरोधी न बनें। फैक्ट्स पर बात करें और सबसे जरुरी बात अपनी भाषा की मर्यादा बनाए रखें। एक पत्रकार के पास अभिव्यक्ति की आज़ादी होना अलग बात है लेकिन, किसी की तुलना अगर आप जिससे कर रहे हैं उसके पहले आपको समझना चाहिए कि जिस व्यक्ति से आप तुलना कर रहे हैं वह किस चीज के लिए जाना जात है या उसने इतिहास में क्या किया है।

जलियांवाला बाग हत्या कांड पर अधिक जानकारी के लिए ये पढ़े.

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