प्रशांत किशोर, एक राजनीति सलाहकार। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की जीत सुनिश्चित करने में इनका बहुत बड़ा योगदान रहा। लेकिन, इसके लिए उन्हें कीमत भी चुकनी पड़ी थी। दिल्ली चुनाव से ठीक पहले ही नीतीश कुमार और प्रशांत किशोर के बीच जो हुआ, उससे पूरा देश वाकीफ है। नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी से प्रशांत किशोर और पवन वर्मा को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इसी के बाद दोनों के बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा है। नीतीश कुमार ने तो यहां तक कह दिया था कि आज कल प्रशांत किशोर किसी और के लिए बोल रहे हैं इसलिए उनका मन JDU में नहीं लग रहा है।

इसी विवाद के बाद सभी जगह अटकले लगाई जा रही थी कि शायद आने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर अपनी पार्टी का ऐलान कर सकते हैं। मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की बात जब सामने आई तो लोगों को लगने लगा कि शायद प्रशांत किशोर अब पार्टी का ऐलान कर सकते हैं लेकिन, प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि वह किसी भी तरह का चुनाव लड़ने या लड़ाने नहीं आए हैं। या न ही या किसी भी पार्टी से गठबंधन करने आए हैं। आज बिहार में विकास जिस स्टेज पर है, 15 साल पहले भी यह वहीं था।

प्रशांत किशोर, फोटो सोर्स: गूगल

प्रशांत किशोर, फोटो सोर्स: गूगल

प्रशांत किशोर ने ये भी साफ कर दिया कि वह क्यों पार्टी से बाहर निकाल दिए गए थे। लोकसभा चुनाव से ही दोनों के बीच मतभेद की खबर आ रही थी। इसी पर खुलासा करते हुए प्रशांत किशोर का कहना था कि नीतीश कुमार ने मुझे अपने बेटे की तरह रखा। वह हमारे पिता के समान हैं। हमदोनों में विचारों को लेकर मतभेद है। मुझे पार्टी से निकालने और रखने के पूरे फैसले पर नीतीश कुमार का हक है और मैं उनके किसी भी फैसले का सम्मान करता हूं। जहां तक विचारधारा की बात है तो नीतीश जी का कहना है वह गांधी, जेपी और लोहिया को और उनकी बातों को नहीं छोड़ सकते। लेकिन मेरे मन में यह दुविधा रही कि कोई अगर ऐसा सोचता है तो वह उस समय गोडसे के साथ खड़े होने वाले और उनकी विचारधारा के लोगों के साथ कैसे खड़े हो सकते हैं? मतलब गोडसे और गांधी को एक साथ कैसे देखा जा सकता है?

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प्रशांत किशोर का यह सीधा इशारा बीजेपी-जदयू गठबंधन पर था। इसके बाद उन्होंने बिहार के विकास के ऊपर बात करते हुए कहा कि मैं ये नहीं कहूंगा कि बीते पंद्रह सालों में बिहार में विकास नहीं हुआ है लेकिन, अगर आप दूसरे राज्यों से तुलना करें तो रफ़्तार उतनी नहीं रही है। बिहार साल 2005 में सबसे ग़रीब राज्यों में था और अभी भी वहीं है। विकास की रैकिंग में भी बिहार अब भी सबसे नीचे ही है। नीतीश जी हमेशा लालू जी के राज से तुलना करके कहते हैं कि बिजली नहीं थी, बिजली आ गई। पटना छह बजे बंद हो जाता था, आज 10 बजे बंद होता है। लेकिन वे कब तक लालू जी के राज से तुलना करते रहेंगे।

इसके बाद प्रशांत किशोर ने ये भी कह दिया कि बिहार को इस वक्त मज़बूत नेता कि ज़रूरत है कि ऐसे नेता कि नहीं जो किसी का पिछलग्गू हो। जब उनसे पूछा गया कि उनके बिहार आने का क्या उद्देश्य है? इस बारे में प्रशांत किशोर का कहना है कि

मैं एक अभियान चला रहा हूं। इस अभियान का नाम ‘बात बिहार की’ है। मुझे ऐसे लड़को को तैयार करना है जो इस बात में यक़ीन रखते हैं कि बिहार दस साल में देश के अग्रणी राज्यों में कैसे खड़ा हो। इस विचारधारा से जो सहमत हैं, जो अपने जीवन के दो चार साल इस उद्देश्य में लगाना चाहते हों, मैं ऐसे युवाओं को जोड़ने आया हूं। मेरा मक़सद बिहार में निचले स्तर पर राजनीतिक चीज़ों को सुदृढ़ करना है।

प्रशांत किशोर ने इस बयान के बाद ये भी कह दिया कि आप लोग इस अभियान को जिसके साथ जोड़ना चाहते हैं जोड़ सकते हैं। आप स्वतंत्र हैं। आप केजरीवाल, राहुल गांधी या सुशील मोदी, जिसके साथ चाहें उसके साथ जोड़ सकते हैं। CAA और NRC पर भी अपनी बात कहते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में CAA, NRC और NPR लागू नहीं होगा। मैं शुक्रगुजार हूं नीतीश कुमार जी का जिन्होंने खुद भी ये स्टेटमेंट दिया है। जिस दिन बिहार में NRC के अंतर्गत किसी भी नागरिक को नागरिकता दे दी जाएगी तो मैं एक राजनीतिक कार्यकर्ता के तौर पर मैं इसका विरोध करूंगा।