प्रशांत किशोर को 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी के जीत का छक्का माना जाता है. प्रशांत किशोर पहली बार 2012 में चर्चा में आए. जिस साल नरेंद्र मोदी तीसरी बार गुजरात के मुख्यमंत्री चुने गए थे. तभी से प्रशांत किशोर देश के अधिकांश बड़े राजनीतिक दलों के लिए काम कर चुके हैं. अक्सर प्रशांत किशोर को नेताओं को चुनावी जीत की चटनी चटाते देखा जा सकता है. पर चटनी बनाने का राज वो खुद के दिमागी फ्रिज में ही रखते है ताकि खोलने पर बासी ना हो जाए .

फोटो सोर्स गूगल

एक बार फिर प्रशांत किशोर की बिहार में राजनीतिज्ञ खेल की चर्चा जोरो पर है. चर्चा की शुरुआत लालू प्रसाद यादव की लिखी किताब पर राबड़ी देवी के बयान के बाद शुरु हुआ है. जिसमें बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने शुक्रवार को दावा किया कि चुनावी जीत के खिलाड़ी प्रशांत किशोर ने उनके पति लालू प्रसाद से भेंट करके यह प्रस्ताव रखा था कि राजद और नीतीश कुमार के जद(यू) का विलय हो जाए और इस प्रकार बनने वाले नए दल को चुनावों से पहले अपना ‘प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार’ घोषित करना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर प्रशांत किशोर पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद से इस प्रस्ताव को लेकर मुलाकात करने से इंकार करते हैं तो वह ‘सफेद झूठ’ बोल रहे हैं.  राबड़ी देवी ने कहा  ‘मैं इससे बहुत नाराज हो गई और उनसे निकल जाने को कहा क्योंकि नीतीश के धोखा देने के बाद मुझे उन पर भरोसा नहीं रहा. और तो और राबड़ी देवी ने गवाह भी खड़ कर दिए और कहा ‘हमारे सभी कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी इस बात के गवाह हैं कि उन्होंने हमसे कम से कम पांच बार मुलाकात की. इनमें से अधिकांश तो यहीं (दस सर्कुलर रोड) पर हुईं और एक-दो मुलाकात पांच नंबर (पांच देशरत्न मार्ग-छोटे पुत्र तेजस्वी यादव के आवास) पर हुईं.

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राबड़ी देवी के बयान के बाद प्रशांत किशोर कहां शांत बैठने वाले थे. प्रशांत किशोर ने कहा है कि सरकारी पदों का दुरुपयोग करने वाले और फंडों में धांधली करने के दोषी ठहराए जा चुके लोग सच के रक्षक बन रहे हैं. प्रशांत किशोर ने ट्वीट किया, ‘लालू यादव जी जब चाहें मेरे साथ मीडिया के सामने बैठ जाएं. सबको पता चल जाएगा कि मेरे और उनके बीच क्या बात हुई और  किसने क्या ऑफर दिया.

 

दरअसल  प्रशांत किशोर और लालू प्रसाद यादव के बीच इस खेल की लड़ाई तब शुरू हुई जब हाल ही में लालू प्रसाद यादव द्वारा लिखी आत्मकथा  ‘गोपालगंज टू रायसीना: माइ पॉलिटिकल जर्नी’ में लालू ने दावा किया कि जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार के प्रस्तावक के तौर पर उनसे मुलाकात की थी और प्रस्ताव दिया था कि जेडीयू की पार्टी को महागठबंधन में फिर से शामिल कर लिया जाए.

आपके बता दें बीते साल सितंबर में जदयू के पूर्ण सदस्य बने प्रशांत किशोर ने लालू प्रसाद के इस दावे के बाद ट्विटर पर स्वीकार किया था कि उन्होंने जदयू की सदस्यता लेने से पूर्व प्रसाद से कई बार मुलाकात की थी. किशोर ने यह भी कहा कि अगर वह यह बताएंगे कि किस बात पर चर्चा हुई थी तो उन्हें (लाल प्रसाद यादव को) शर्मिंदगी उठानी पड़ सकती है.

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देश की तमाम बड़ी राजनैतिक पार्टियों के लिए काम कर चुके प्रशांत किशोर को पता है कि किस नेता को कौन सी चटनी पसंद है और कितनी तीखी. इसलिए तो शायद उन्होंने बोला की चर्चाओं के राज को खोला तो शर्मिंदगी की मिर्च लग सकती है. सारी बातों से लगता है एक बार फिर किशोर बिहार में या तो खुद खेल रहे है या तो किसी को खेला रहे है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जिस तरह से पीके इतने कम वक्त में विवादों में फंसते जा रहे हैं, तमाम नेता भी उनसे दूरी बनाए रखना बेहतर समझ रहे हैं. ऐसे में पीके का राजनीतिक करियर खतरे में पड़ सकता है.

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